Umar Khalid Interim Bail: दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद को उनकी मां की सर्जरी के लिए 1 जून से 3 जून तक 3 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर की है।
Umar Khalid Interim Bail Delhi High Court: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े 'बड़ी साजिश' (Larger Conspiracy) के मामले में उमर खालिद को 1 जून से 3 जून तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। यह राहत उमर खालिद की मां की आगामी सर्जरी को ध्यान में रखते हुए दी गई है।
इससे पहले, 19 मई को कड़कड़डूमा स्थित एक विशेष ट्रायल कोर्ट ने उमर खालिद की अस्थायी रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद खालिद ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 22 मई से 5 जून तक यानी 15 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी थी।
आपको बता दें कि उमर खालिद की मां 62 साल की है और 2 जून को उनकी 'लंप एक्सीजन' (गांठ हटाने की) सर्जरी होनी है, जिसके लिए उन्हें अस्पताल और घर पर देखभाल की जरूरत है। इसके साथ ही उमर के सगे मामा का हाल ही में निधन हो गया था, जिनकी याद में आयोजित होने वाली 'चेहलुम' रस्म में वे शामिल होना चाहते थे।
हाई कोर्ट में अपनी अपील के दौरान उमर खालिद ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि निचली अदालत की यह टिप्पणी पूरी तरह गलत और निराधार थी कि उनके मामा उनके 'निकटतम संबंधी' (Immediate Relation) नहीं थे या मां की देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य मौजूद हैं। खालिद ने अदालत को बताया कि उनके अपने दिवंगत मामा के साथ बेहद करीबी रिश्ते थे। इसके अलावा, इस दुख की घड़ी में वे अपनी 87 वर्षीय बुजुर्ग नानी के साथ समय बिताना चाहते हैं और अपनी बीमार मां की सर्जरी के वक्त उनके साथ रहना चाहते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मानवीय आधार पर उमर खालिद को राहत देने का फैसला किया। हालांकि, अदालत ने 15 दिनों की मांग के मुकाबले सिर्फ 3 दिनों (1 जून से 3 जून) की ही अंतरिम जमानत मंजूर की है, ताकि वे अपनी मां की सर्जरी के वक्त अस्पताल और परिवार के साथ मौजूद रह सकें।
गौरलतब है कि उमर खालिद सितंबर 2020 से जेल में बंद हैं। उन पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों की साजिश रचने के आरोप में कड़े आतंकवाद विरोधी कानून 'यूएपीए' (UAPA) और आईपीसी की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।