
प्रतीकात्मक फोटो
Delhi NCR to Nepal: यूपी और बिहार से सटे देश नेपाल घूमने के लिए उत्तर भारत के सभी राज्यों से हर साल लाखों की संख्या में लोग जाते हैं। नेपाल में प्रवेश करने की बात करें तो यूपी में सोनौली बॉर्डर और बिहार में रक्सौल से जा सकते हैं। इसी बीच नेपाल की यात्रा करने की चाह रखने वाले यात्रियों को लिए राहत भरी खबर हो सकती है। दरअसल, अब उत्तर प्रदेश में शामली से और गोरखपुर तक एक ऐसा एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है, जिससे दिल्ली से नेपाल की दूरी महज 8 घंटे में तय की जा सकती है। वहीं, 40,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे 742 किलोमीटर लंबा होगा, जो राज्य के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को आपस में जोड़ेगा।
जी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस बड़ परियोजना को समय से पूरा किया जा सके इसके लिए इसे दो बड़े हिस्सों (सेक्शन) में बांट दिया गया है। एक भाग को पूर्वी हिस्सा के रूप में रखा गया है, जो 394 किलोमीटर लंबा है और इसे बनाने की जिम्मेदारी एनएचएआई की ईस्ट रीजन को दी गई है। वहीं, दूसरा पश्चिमी हिस्सा है, जो कि 348 किलोमीटर लंबा है और इसे बनाने की जिम्मेदारी एनएचएआई की वेस्ट रीजन टीम द्वारा संभाली जा रही है। वर्तमान में, एनएचएआई (NHAI) उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए तेजी से भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के काम में जुटा हुआ है।
आपको बता दें कि यह हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे हरियाणा सीमा के पास से शुरू होगा और उत्तराखंड के हरिद्वार क्षेत्र की तरफ बढ़ते हुए बिहार सीमा पर स्थित कुशीनगर में समाप्त होगा। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख जिलों को आपस में जोड़ेगा, जिनमें शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, संत कबीर नगर, गोरखपुर और कुशीनगर शामिल हैं।
आपको बता दें कि एक बार इसका निर्माण पूरा हो जाने के बाद, दिल्ली-एनसीआर और नेपाल सीमा के बीच का सफर बेहद आसान और आरामदायक हो जाएगा। इसके साथ ही इस नए एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल बिहार और उसके आसपास के क्षेत्रों की यात्रा आसान होगी, बल्कि उद्योगों, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
इस एक्सप्रेसवे की मुख्य सड़क (मेन रूट) 4-लेन की होगी, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सभी बड़े फ्लाईओवर, पुल और रेलवे ओवरब्रिज (ROB) को 6-लेन के ढांचे के रूप में विकसित किया जा रहा है। यात्रियों और स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए इसमें रणनीतिक रूप से एग्जिट रैंप (निकास मार्ग) बनाए जाएंगे, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के पड़ोसी शहरों तक आ-जा सकें। प्रशासनिक योजना के मुताबिक, इस पूरे शामली-गोरखपुर कॉरिडोर को साल 2030 के अंत तक पूरी तरह से चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
Updated on:
22 May 2026 12:14 pm
Published on:
22 May 2026 12:14 pm
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