सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपी केबिनेट में नोएडा को महानगर निगम बनाने के लिए मंथन किया गया।
UP Cabinet Decision उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नोएडा ( NOIDA ) के प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। पिछले लंबे समय से चर्चा चल रही थी कि क्या नोएडा को भी दिल्ली की तर्ज पर 'मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन' ( महानगर निगम ) बनाया जाएगा?गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर गहन मंथन हुआ लेकिन अंततः सरकार ने मौजूदा व्यवस्था को ही बरकरार रखने का निर्णय लिया है।
दरअसल यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश से जुड़ा हुआ है जिसमें शीर्ष अदालत ने पिछले साल यूपी सरकार से नोएडा को 'सिटिजन सेंट्रिक' ( नागरिकों के अनुकूल ) बनाने के लिए एक नया शासन मॉडल तैयार करने को कहा था। कोर्ट का सुझाव था कि नोएडा अथॉरिटी के बजाय यहाँ महानगर निगम के गठन पर विचार किया जाए ताकि स्थानीय निवासियों को बेहतर शहरी सुविधाएं मिल सकें। इसी को देखते हुए अब यूपी में केबिनेट की बैठक इस बात पर चर्चा हुई कि क्या किया जा सकता है।
कैबिनेट बैठक के बाद उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचा एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने मीडियाकर्मियों को बताया कि "सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मॉडल पर विचार किया गया था। सुझावों में मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन का विकल्प भी शामिल था लेकिन कैबिनेट ने नोएडा के वर्तमान कानूनी ढांचे और औद्योगिक स्वरूप का अध्ययन करने के बाद पाया कि यहाँ 'यथास्थिति' ( Status Quo ) बनाए रखना ही उचित है। आगे इस पर दोबारा से चर्चा होगी।
50 साल पुराना है नोएडा का सफर
बता दें कि गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित नोएडा की स्थापना आज से ठीक 50 साल पहले 1976 में 'उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम' के तहत की गई थी। नोएडा प्राधिकरण के पास ही अभी तक यहाँ के प्रशासन और विकास की जिम्मेदारी है। जानकारों का मानना है कि महानगर निगम बनने से स्थानीय चुनाव और पार्षदों की भूमिका बढ़ जाती, लेकिन औद्योगिक विकास की रफ्तार पर इसका क्या असर पड़ता, इसे लेकर सरकार फिलहाल जोखिम नहीं लेना चाहती।
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