भोपाल

3 साल में जन्मे 39 शावकों से हुई वंश-वृद्धि, कूनो के माहौल में रम गए अफ्रीकन चीते

Kuno- प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन के ‘प्रोजेक्ट चीता’ विश्व का सबसे सफल अभियान,

2 min read
Feb 22, 2026
39 African cheetah cubs born in Kuno in 3 years

Kuno- मध्यप्रदेश के कूनो के माहौल में अफ्रीकन चीते पूरी तरह रम चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां चीतों की सफल बसाहट पर खुशी जताते हुए कहा कि 28 फरवरी तक बोत्सवाना से 8 और चीते लाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन के ‘प्रोजेक्ट चीता’ विश्व का सबसे सफल अभियान है। सितंबर 2022 में शुरू हुई यह वन्य जीव संरक्षण यात्रा सफलता के स्वर्णिम सोपान चढ़ चुकी है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों ने भारतीय धरती पर खुद को अनुकूलित कर लिया है।

भारत में विलुप्त हो चुके चीते के पुनर्स्थापन का ऐतिहासिक प्रयास, ‘प्रोजेक्ट चीता’ अपने तीन वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर चुका है। कूनो और गांधी सागर अभयारण्य में चीतों की दूसरी पीढ़ी के शावक निर्भय होकर फर्राटों भर रहे हैं। नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को 8 चीतों का आगमन हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कूनो अभयारण्य के संरक्षित बाड़ों में छोड़ इस परियोजना का शुभारंभ किया। दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते 18 फरवरी 2023 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़े गए।

ये भी पढ़ें

एमपी में टेट्रा पैक में फ्री दूध बांटेगी सरकार, राज्य के नए बजट में बड़ा प्रावधान

दक्षिण अफ्रीका से आए 12 में से 8 चीते वर्तमान में कूनो अभयारण्य में पूर्णतः स्थापित होकर स्वयं को वर्तमान आवास की परिस्थितियों में ढाल चुके हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं। इनमें से 3 चीते गांधी सागर अभयारण्य में स्थानांतरित किए गए हैं। दक्षिण अफ्रीकी माताओं से जन्मे 10 शावक वर्तमान में जीवित और स्वस्थ हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता ‘मुखी’ ने भी 5 शावकों को जन्म दिया है।

‘गामिनी’ दूसरी बार मां बनी है। उसकी पहली खेप में 3 स्वस्थ सब-एडल्ट शावक हैं और हाल ही में उसने 3 नए शावकों को जन्म दिया है। वीरा अपने 13 माह के शावक के साथ खुले जंगल में विचरण कर रही है, जबकि निर्वा अपने 10 माह के तीन शावकों के साथ संरक्षित बाड़े में है। नामीबियाई से आये 8 में से 3 चीते वर्तमान में कूनो में स्थापित हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं।

2023 से 2026 के बीच कुल 39 शावकों का जन्म

नामीबियाई माताओं से जन्मे चीतों के 12 शावक वर्तमान में जीवित हैं। कूनो में वर्ष 2023 से 2026 के बीच कुल 39 शावकों का जन्म हुआ। 3 साल की इस ​अवधि में इनमें से 27 शावक वर्तमान में कूनो में स्वस्थ और जीवित हैं।

परियोजना के दौरान प्राकृतिक कारणों और अनुकूलन संबंधी चुनौतियों के चलते कुछ चीतों की मृत्यु भी हुई। हालांकि जीवित चीतों ने भारतीय जलवायु, शिकार प्रजातियों और पारिस्थितिकी के अनुरूप स्वयं को ढालकर यह सिद्ध किया कि यह परियोजना दीर्घकालिक सफलता की ओर अग्रसर है। सरकार का लक्ष्य वर्ष-2032 तक करीब 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 60–70 चीतों की आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करना है। इसके लिए गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में एक संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किया जाएगा।

ये भी पढ़ें

एमपी में 8वें वेतन आयोग में अधिकारियों-कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा अपडेट, जारी की एडवाइजरी

Published on:
22 Feb 2026 03:13 pm
Also Read
View All

अगली खबर