
Anthropic Threat Report: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सैन्य तकनीक के क्षेत्र में एक खतरनाक औजार बनकर उभर रहा है। अमरीकी एआइ कंपनी एंथ्रोपिक ने अपनी ताज़ा थ्रेट रिपोर्ट में खुलासा किया है कि यमन, रूस और चीन से जुड़े मिलिट्री समूहों ने उसके एआइ मॉडल 'क्लॉड' का दुरुपयोग घातक हथियार प्रणालियां विकसित करने में किया। दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कंपनी ने ऐसी छह बड़ी सैन्य व खुफिया गतिविधियों को नाकाम किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक यमन के हूती विद्रोहियों के एक इंजीनियरिंग समूह ने 'क्लॉड कोड' की मदद से उड़ने वाले मिसाइल वाहनों के लिए नेविगेशन और स्टेबलाइजेशन सॉफ्टवेयर तैयार करवाया। समूह ने एक गाइडेड रॉकेट का परीक्षण भी किया, जो असफल रहा। नाकामी के कुछ ही घंटों बाद यह समूह दोबारा एआइ के पास लौटा ताकि कोड की खामी का पता लगाया जा सके।
रूस से संबंध रखने वाले एक ग्रुप ने बिना इंसानी हस्तक्षेप के काम करने वाले सैन्य ड्रोन झुंड के लिए स्वचालित कोड लिखवाने में एआइ का इस्तेमाल किया। इसमें हमला करने, निगरानी रखने और स्वतः बेस पर लौटने जैसे व्यवहार शामिल थे। इसके अलावा सैन्य-नागरिक दोहरे उपयोग वाले उपकरणों की खरीद-फरोख्त में भी एआइ का सहारा लिया गया।
चीन से जुड़े मामलों में तीन प्रमुख गतिविधियां सामने आईं- पहला, टॉरपीडो मिसाइलों के फायर कंट्रोल से जुड़े तकनीकी दस्तावेज़ चीनी भाषा में तैयार किए गए। दूसरा, चीनी टॉरपीडो क्षमताओं की तुलना अमरीकी एंटी-टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन कार्यक्रमों से करवाई गई। तीसरा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और डायरेक्ट-एनर्जी हथियारों की सप्लाई चेन से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने में एआइ का उपयोग हुआ।
अपनी 154 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में एंथ्रोपिक ने स्वीकार किया कि कंपनी के सुरक्षा तंत्र ने कई दुर्भावनापूर्ण प्रयासों को समय रहते रोका, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह चूकरहित नहीं है। इसी क्रम में जैविक घटकों से जुड़े पांच ऐसे मामले भी पकड़े गए, जिनका संभावित इस्तेमाल जैविक हथियार निर्माण में हो सकता था। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब कंपनी के एक शीर्ष शोधकर्ता ने हाल ही में इस्तीफा देकर चेतावनी दी थी कि एआइ सुरक्षा मानकों से कहीं तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।