भोपाल. अब 130 नहीं बल्कि सौ से कम बेड कॉलेस्ट्रॉल वाले ही स्वस्थ माने जाएंगे। पहली बार भारतीयों के लिए नए रिस्क फैक्टर तय किए गए हैं। अब तक एलडीएल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल की जांच वेस्टर्न देशों के मापदंड के तहत होती थी। जिसे खारिज करते हुए कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया ने नई गाइडलाइन तय की है।
भोपाल. अब 130 नहीं बल्कि सौ से कम बेड कॉलेस्ट्रॉल वाले ही स्वस्थ माने जाएंगे। पहली बार भारतीयों के लिए नए रिस्क फैक्टर तय किए गए हैं। अब तक एलडीएल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल की जांच वेस्टर्न देशों के मापदंड के तहत होती थी। जिसे खारिज करते हुए कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया ने नई गाइडलाइन तय की है।
यह हैं नए पैमाने
बीमारियों के रोकथाम में होगी मदद
एम्स भोपाल के जैव रसायन विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सुखेश मुखर्जी ने बताया कि अलग अलग रोगों के लिए नई रेंज के तहत रोगियों की सही पहचान होगी। जिससे सही इलाज मिलेगा। लोग बेवजह दवा खाने से बचेंगे। जिससे उनके शरीर में टॉक्सिसिटी नहीं बढ़ेगी। इन नए पैरामीटर्स के आधार पर बीमारियों के रोकथाम में मदद होगी।
क्यों जरूरी थी नई गाइडलाइन
एक भारतवासी और एक अमेरिकी में कोलेस्ट्रॉल का लेवल एक जैसा है तो भी दिल की बीमारी का ज्यादा खतरा भारतवासी में होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कोलेस्ट्रॉल का सब पार्ट माइक्रो एलडीएल की मात्रा भारतीयों में ज्यादा होती है। यह दिल की बीमारियों के लिए ज्यादा घातक है। जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल लेवल कम बढ़ा हुआ होता है। उन्हें डाइट से इसे कंट्रोल करना जरूरी है। एक बार बढ़ गया जो समस्याएं बढ़ेगी।
-डॉ. किसलय श्रीवस्तव, कार्डियोलॉजिस्ट, भोपाल