
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमा शंकर सिंह, जो उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक थे, का बुधवार को लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे। यह खबर सोशल मीडिया पर एक Reddit पोस्ट के माध्यम से सामने आई है, जिसमें लिखा गया है: “BSP’s lone UP MLA Uma Shankar Singh dies after battle with cancer”।
उमा शंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए थे। पिछले दो वर्षों से उनका दिल्ली और विदेश में इलाज चल रहा था। उनके निधन के बाद 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का कोई प्रतिनिधि नहीं बचा है। अब इस सीट पर उपचुनाव होने तक विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। उमाशंकर सिंह पिछले दो वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे। हाल ही में वे अमेरिका से इलाज कराकर लखनऊ अपने घर लौटे थे। वहां उन्होंने रक्त संबंधी उपचार (blood exchange procedure) करवाया था।
उमा शंकर सिंह पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में बसपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने 2012 में पहली बार बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी तब चुने गए जब राज्य में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया।
2022 के विधानसभा चुनाव में, जब बसपा पूरे प्रदेश में सिमटकर केवल एक सीट जीत सकी, तब भी उमा शंकर सिंह ने रसड़ा सीट बचाए रखी। उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के उम्मीदवार महेंद्र चौहान को 6,583 मतों से हराया था, जबकि भाजपा उम्मीदवार बब्बन राजभर तीसरे स्थान पर रहे थे।
इस समय हम इस खबर को एक संभावित समाचार के रूप में देख रहे हैं, लेकिन पुष्टिकरण के अभाव में इसे पूर्ण रूप से सत्यापित नहीं माना जा सकता। इसलिए, इस लेख में हम उपलब्ध जानकारी के आधार पर एक प्रोफाइल स्टोरी प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें उनके राजनीतिक सफर, पहचान और हालिया घटनाओं का विवरण शामिल है।
उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खनवर गांव में हुआ था। उन्होंने सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया से स्नातक की पढ़ाई की और 1991 में छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए, जिससे उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। 2011 में उन्होंने बसपा की सदस्यता ली और 2012 में पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक बने।
उमाशंकर सिंह को स्थानीय लोग “रॉबिनहुड” के नाम से जानते थे, क्योंकि वे गरीबों की मदद के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने फरवरी 2016 में 351 जोड़ों का सामूहिक विवाह आयोजित किया था, जो एक रिकॉर्ड था। इसके अलावा, जनवरी 2017 से उन्होंने रसड़ा क्षेत्र में 40 मुफ्त वाई-फाई हॉटस्पॉट भी स्थापित किए।
उमाशंकर सिंह की संपत्ति काफी अधिक थी। वर्ष 2022 में उनके शपथ पत्र के अनुसार, उनकी संपत्ति लगभग ₹20.75 करोड़ थी, और उनकी पत्नी की संपत्ति उनसे भी अधिक बताई गई थी। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, उनकी संपत्ति ₹40.19 करोड़ तक पहुंच चुकी थी।
फरवरी 2026 में आयकर विभाग ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ और बलिया सहित सोनभद्र, कौशांबी, मिर्जापुर और प्रयागराज स्थित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान ₹10–11.5 करोड़ नकद, आभूषण और महंगी घड़ियां बरामद की गईं, तथा कई दस्तावेज जब्त किए गए। इस कार्रवाई पर बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और मानवता के खिलाफ है, क्योंकि विधायक उमाशंकर सिंह इस समय गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। वहीं, योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, जो उमाशंकर सिंह के समधी हैं, ने भी इस कार्रवाई के समय (टाइमिंग) पर सवाल उठाए और इसे असंवेदनशील बताया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस कार्रवाई को बदले की कार्रवाई और राजनीतिक रूप से चयनात्मक बताया।
उनकी मौत की खबर से बसपा को करारा झटका लगा है। वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के एकमात्र विधायक थे। उनके निधन से पार्टी का प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्रभाव दोनों प्रभावित होंगे। इसके अलावा, उनके खिलाफ चल रही जांच और संपत्ति विवाद भी नए मोड़ ले सकते हैं।