7 अगस्त 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Indore news: पेट्रोल पंप संचालक को भारी पड़ा ’10 करोड़’ का लोन, हो गई 65 लाख की ठगी

​​Fraud with Petrol pump operator: पेट्रोल पंप संचालक को 10 करोड़ का लोन दिलाने का झांसा देकर इंदौर के दो आरोपियों ने करीब 65 लाख रुपये ठगे। दो साल तक प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम वसूली।
2 min read
Google source verification
Money ​​Fraud: 65 लाख की ठगी (Photo Source - Patrika)

Money ​​Fraud: 65 लाख की ठगी (Photo Source - Patrika)

indore news: एमपी में ब्यावरा के एक पेट्रोल पंप संचालक को 10 करोड़ रुपए का लोन दिलाने का झांसा देकर इंदौर के दो लोगों ने करीब 65 लाख रुपए की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को बड़े वित्तीय संस्थानों से जुड़ा बताते हुए कम समय में लोन स्वीकृत कराने का भरोसा दिलाया। इसके बाद करीब दो सालों तक प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किस्तों में लाखों रुपए वसूलते रहे। जब लंबे समय तक लोन स्वीकृत नहीं हुआ और आरोपी रकम लौटाने से भी बचने लगे तब पाड़ित को धोखाधड़ी का अहसास हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सिटी थाना पुलिस के अनुसार बस स्टैंड के सामने स्थित एचपी पेट्रोल पंप के संचालक गोविंद गुप्ता ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि नवंबर 2023 में एक परिचित के माध्यम से उनकी मुलाकात इंदौर निवासी योगेश अटोले उर्फ योगेश पाटिल और मनीष कटियार से हुई थी। दोनों ने दावा किया कि उनके बड़े वित्तीय संस्थानों से संपर्क हैं और वे कम समय में 10 करोड़ रुपए का लोन स्वीकृत करा सकते हैं। इस भरोसे में आकर फरियादी ने आरोपियों की मांग के अनुसार अलग-अलग समय पर रकम देना शुरू कर दिया।

भरोसा दिलाने के लिए दिया लेटरहेड

पाड़ित ने बताया कि विश्वास कायम रखने के लिए आरोपियों ने लेटरहेड, चेक और अन्य दस्तावेज भी दिए। वहीं व्यवसाय से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट, आयकर रिटर्न (आइटीआर), बैंक स्टेटमेंट, आधार कार्ड, पेन कार्ड और फर्म से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने पास रख लिए। इतना ही नहीं सुरक्षा और औपचारिकता का हवाला देकर कई खाली चेकों और दस्तावेजों पर भी हस्ताक्षर करा लिए।जब लंबे समय तक लोन स्वीकृत नहीं हुआ और आरोपियों ने रकम तथा दस्तावेज लौटाने से भी इनकार कर दिया, तब फरियादी ने पुलिस की शरण ली। पुलिस ने आवेदन, बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड, चेक और उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दो साल तक वसूली

शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने सबसे पहले भोपाल बुलाकर दो प्रतिशत प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 20 लाख रुपए नकद लिए। इसके बाद मार्डगेज, फाइल प्रोसेसिंग, दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर लगातार रुपए मांगते रहे। जनवरी 2025 में फरियादी ने इंदौर स्थित एमपी एसोसिएट्स के खाते में 10 लाख रुपए आरटीजीएस के माध्यम से जमा कराए। इसके अलावा 22 लाख और 13 लाख रुपए भी नकद दिए गए। इस तरह कुल करीब 65 लाख रुपए आरोपियों ने वसूल लिए।