प्रदेश की तंग गलियों और छोटे-छोटे कमरों में पढ़ रहे नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए अच्छी खबर है।
बूंदी. प्रदेश की तंग गलियों और छोटे-छोटे कमरों में पढ़ रहे नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने किराए के भवनों में चल रहे हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों को पास के सरकारी स्कूलों में शिफ्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे आंगनबाड़ी में शाला पूर्व शिक्षा लेने वाले बच्चों को आगे उसी स्कूल प्रवेश दिया जाएगा। इससे स्कूल प्रबंधन की मॉनिटरिंग भी हो सकेगी। वहीं बच्चों को स्कूल जैसा माहौल भी मिलेगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य बेहतर बुनियादी ढांचा, खेल के मैदान, सुरक्षित वातावरण और बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से जोडऩा है। प्रदेश में करीब 63 हजार अधिक आंगनबाड़ी केंद्र में से 10 हजार केंद्र किराए के भवन में संचालित हो रहे है। हालांकि विभाग ने शिफ्टिंग के लिए कड़े मानक तय किए हैं। विभाग ने इस दिशा कवायद शुरू कर दी है। ऐसे में जो केंद्र स्कूलों में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे, उनकी पास के स्कूलों से मैपिंग की जाएगी।
ऐसे करेंगे दूरी का निर्धारण
विभाग ने शिफ्टिंग के लिए मानक तय किए हैं। इसमें शहरी क्षेत्रों में 1 किलोमीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में महज 500 मीटर के दायरे में आने वाले सरकारी स्कूलों को चिन्हित किया गया है। हालांकि जो केंद्र किसी कारणवश स्कूल परिसर के अंदर शिफ्ट नहीं हो पाएंगे, उनको पास के स्कूलों से मैपिंग की जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा नन्हे बच्चों को होगा, जिन्हें आंगनबाड़ी में ’शाला पूर्व शिक्षा’ पूरी करने के बाद सीधे उसी स्कूल में एडमिशन मिल जाएगा।
जिले में 247 भवन किराए में संचालित
बूंदी जिले में 1205 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। 337 भवन विभागीय भवन में चल रहे है। जबकि 247 केेंद्र किराए के भवन में संचालित हो रहे, जिनको विभाग ने मापदंड के अनुसार नजदीक सरकारी स्कूलों में शिफ्ट करने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं अन्य सरकारी भवन में 621 भवनों आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे है।
पहल का उद्देश्य
< किराए के छोटे कमरों के बजाय आंगनबाड़ी अब सरकारी स्कूलों के खाली कमरों में चलेंगी, जहां पानी, शौचालय और खेल के मैदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
< आंगनबाड़ी में शाला पूर्व शिक्षा लेने वाले बच्चों के लिए आगे की कक्षा 1 में उसी स्कूल में प्रवेश सुगम हो जाएगा, जो कि बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ेगा।
< स्कूलों में शिफ्ट होने से बच्चों की सुरक्षा और पोषण (पोषण 2.0) का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
विभाग के आदेश पर इस पर कवायद शुरू कर दी गई है। जिले में 247 केंद्र किराए के भवनों में संचालित हो रहे है। तय मानदंडों के अनुसार इनको नजदीक के स्कूल में शिफ्ट किए जाएंगे। इससे बच्चों को स्कूल जैसे पढ़ने का माहौल दिखेगा। वहीं आंगनबाड़ी में शाला पूर्व शिक्षा लेने वाले बच्चों को आगे उसी स्कूल प्रवेश दिया जाएगा।
ऋचा चतुर्वेदी, उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, बूंदी