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इडली पकाने में प्लास्टिक शीट के इस्तेमाल के मामलेे में FSSAI ने राज्य इकाई को दिए जांच के निर्देश

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कर्नाटक के राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग को कुछ स्थानीय रेस्तराओं में इडली पकाने की प्रक्रिया में प्लास्टिक शीट के इस्तेमाल की रिपोर्ट की जांच करने का निर्देश दिया है।

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बेंगलूरु. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कर्नाटक के राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग को कुछ स्थानीय रेस्तराओं में इडली पकाने की प्रक्रिया में प्लास्टिक शीट के इस्तेमाल की रिपोर्ट की जांच करने का निर्देश दिया है।

यह कदम खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी चिंताओं के जवाब में उठाया गया है, जिसमें एफएसएसएआई ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

एफएसएसएआई ने एक बयान में कहा कि राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग को इस मुद्दे पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने और खाद्य व्यवसाय संचालकों या होटलों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया गया है, जो भोजन तैयार करने में प्लास्टिक का इस्तेमाल करते पाए जाते हैं।

स्थिति पर बारीकी से नजऱ रख रही एफएसएसएआई ने कहा कि प्लास्टिक शीट के इस्तेमाल की प्रथा खाद्य सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण चिंताओं को जन्म देती है, क्योंकि प्लास्टिक से हानिकारक रसायनों के भोजन में मिलने की संभावना है।

एफएसएसएआई की सीईओ जी कमला वर्धन राव ने कहा, खाद्य तैयार करने में कम गुणवत्ता वाले या गैर-खाद्य ग्रेड प्लास्टिक का इस्तेमाल, खास तौर पर उच्च तापमान पर, गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। उन्होंने कहा कि ये निम्न-श्रेणी के प्लास्टिक उच्च ताप के संपर्क में आने पर बिस्फेनॉल ए (बीपीए), फथलेट्स और अन्य रसायनों जैसे विषैले पदार्थ छोड़ सकते हैं और खाद्य पदार्थों में घुलकर संभावित रूप से प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभाव पैदा कर सकते हैं।

एफएसएसएआई राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर मामले की गहन जांच कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

एफएसएसएआई इस बात पर जोर देता है कि खाद्य-ग्रेड सामग्री और स्वच्छता प्रथाओं का उपयोग भोजन तैयार करने में महत्वपूर्ण है। इडली को भाप में पकाने की प्रक्रिया परंपरा या स्वीकृत खाद्य-ग्रेड सामग्री के अनुसार की जानी चाहिए जो रासायनिक संदूषण का जोखिम पैदा नहीं करती है।

Published on:
01 Mar 2025 10:50 pm
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