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टाटा संस से एन. चंद्रशेखरन का इस्तीफा, चेयरमैन पद की रेस में ये नाम आगे

Race for new Tata Sons Chairman: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा, नोएल टाटा से विवाद बनी वजह, जानें चेयरमैन पद की रेस में कौन-कौन से नाम हैं आगे।
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Aug 13, 2026
N. Chandrasekaran
एन.चंद्रशेखरन (फोटो- ANI)

N. Chandrasekaran Tata Sons resignation: टाटा संस के चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका लगभग एक दशक लंबा कार्यकाल अचानक खत्म हो गया है। हालांकि 63 साल के चंद्रशेखरन फरवरी, 2027 तक चेयरमैन के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे। चंद्रशेखरन का यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली सालाना बैठक (एजीएम) और टाटा संस में 66त्न हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के वोटिंग के तरीके को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आया है। इस बैठक में चंद्रशेखरन की निदेशक के रूप में दोबारा नियुक्ति पर शेयरधारकों को मतदान करना था। चंद्रशेखरन को 2017 में टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था। यह पहला मौका था जब टाटा परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 2022 में उन्हें दूसरा कार्यकाल दिया गया था।

यह वजह- एक सदस्य का नहीं था समर्थन

इस साल फरवरी में चंद्रशेखरन को तीसरी बार टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव पर फैसला होना था। लेकिन, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया था। नोएल टाटा ने समूह के नए बिजनेस के परफॉर्मेंस पर सवाल उठाए थे। इस पर चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति का फैसला टाल दिया था। यह प्रस्ताव छह महीने से लंबित था। चंद्रशेखरन ने इस्तीफे के बाद लिखी चि_ी से संकेत मिलता है कि उन्हें तीसरी बार कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का भरोसा नहीं था। उन्होंने कहा, तीसरी बार मेरी नियुक्ति के प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो सका, बोर्ड के एक सदस्य का समर्थन प्रस्ताव को हासिल नहीं था। इसलिए उन्होंने एजीएम से पहले इस्तीफा देने का फैसला किया।

यह थी परेशानी

टाटा संस के अंदर एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए बिजनेस के परफॉर्मेंस और कैपिटल एलोकेशन को लेकर टेंशन सामने आई थी। नोएल टाटा ने घाटे में चल रहे बिजनेस के परफॉर्मेंस पर चंद्रशेखरन से अधिक क्लैरिटी मांगी थी, क्योंकि ये टाटा संस को उधार लेने और उसे एनबीएफसी-यूएल के तौर पर क्वालिफाई करने के लिए मजबूर कर सकते हैं और इससे टाटा संस को लिस्ट करना पड़ सकता है। नोएल टाटा टाटा संस की लिस्टिंग के विरोध में हैं। सूत्रों के मुताबिक इसमें उन्हें चंद्रशेखरन का साथ नहीं मिला था।

टाटा परिवार की चिंता

अगर आरबीआइ टाटा संस का आइपीओ लाने पर जोर देता है, तो चिंता यह है कि लिस्टिंग से टाटा संस धीरे-धीरे टाटा ट्रस्ट्स से ज्यादा इंडिपेंडेंट हो सकता है, भले ही उनकी बड़ी शेयरहोल्डिंग हो। टाटा परिवार खुद ट्रस्ट्स के जरिए ग्रुप के फैसलों पर असर डालता है। टाटा संस लिस्टिंग के लिए जाता है, तो टाटा परिवार टाटा इकोसिस्टम के लिए बेमतलब हो जाएगा। इससे टाटा संस के बोर्ड को फिर से बनाने और चेयरमैन पद संभालने की कोशिश नोएल टाटा कर सकते हैं, ताकि 170 अरब डॉलर के ग्रुप पर टाटा परिवार के असर को बचाया जाए। लिस्टेड टाटा संस पब्लिक शेयरहोल्डर्स, ज्यादा डिस्क्लोजर और रेगुलेटरी स्क्रूटनी लाएगा।

ऐसे होगा नए चेयरमैन का चुनाव

टाटा संस का बोर्ड अपने स्तर पर नया चेयरमैन नहीं चुन सकता। कंपनी के एसोसिएशन के आर्टिकल्स में चेयरमैन के चयन के लिए विशेष व्यवस्था है। इसके तहत टाटा ट्रस्ट्स की अहम भूमिका होती है। टाटा संस के आर्टिकल 118 के तहत चेयरमैन की नियुक्ति के लिए एक चयन समिति का गठन जरूरी है। हालांकि अंतिम नियुक्ति टाटा संस का बोर्ड करता है। इस प्रक्रिया में सबसे चुनौतीपूर्ण काम टाटा ट्रस्ट्स के सभी ट्रस्टियों के बीच सहमति बनाना है। टाटा ट्रस्ट्स के बीच शासन व्यवस्था, ट्रस्टियों की नियुक्ति, कार्यकाल और टाटा संस के बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर अभी मतभेद चल रहे हैं। इनमें से कुछ विवाद महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष चल रही कार्यवाही तक भी पहुंचे हैं।

ये हो सकते हैं चेयरमैन पद के दावेदार

  1. सौरव अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक, टाटा संस
  2. शैलेष चंद्र, एमडी-सीईओ, टाटा मोटर्स
  3. टीवी नरेंद्रन, सीईओ-एमडी, टाटा स्टील
  4. आरती सुब्रमण्यम, प्रेसिडेंट, टीसीएस
  5. गिरीश वाघ, सीईओ, टाटा मोटर्स कमर्शियल
  6. अजय चावला, एमडी, टाइटन कंपनी
  7. सुनील डिसूजा, सीईओ, टाटा कंज्यूमर
  8. आर. मुकुदन, एमडी, टाटा केमिकल्स
  9. के. कीर्तिवासन, सीईओ-एमडी, टीसीएस
  10. पुनीत चटवाल, एमडी, इंडियन होटल्स
Updated on:
13 Aug 2026 09:22 am
Published on:
13 Aug 2026 09:22 am