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समझिए एनालॉग पनीर क्या है? घर की रसोई में खुल जाएगा असली नकली का फर्क

Analogue Original paneer: मध्य प्रदेश के सीए डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को एनालॉग पनीर को बैन करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अगर आप सोच रहे हैं कि यह पनीर जहरीला या पूरी तरह से हानिकारक था, अब पनीर नहीं खाएंगे, तो पहले समझिए एनालॉग और ऑरिजनल पनीर का फर्क, आप खुद रहेंगे सतर्क
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 13, 2026

analogue original paneer difference kitchen hacks

analogue original paneer difference kitchen hacks (AI क्रिएटिव)

difference between analogue or original paneer: बाजार में सफेद, मुलायम और एक जैसा दिखने वाला पनीर देखकर यह तय करना आसान नहीं कि वह वास्तव में दूध से बना है या किसी दूसरे वसा और प्रोटीन से तैयार किया गया उत्पाद है। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के बाद पनीर को लेकर उपभोक्ताओं की जिज्ञासा बढ़ना स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को राज्य में एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध और प्राकृतिक दूध से बने उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है, एनालॉग पनीर और मिलावटी पनीर एक ही चीज नहीं हैं। एनालॉग ऐसा उत्पाद हो सकता है जिसमें दूध के घटकों की जगह या उनके साथ गैर-दूध वाली सामग्री इस्तेमाल की गई हो। एफएसएसएआई (FSSAI) के मुताबिक अगर दूध की वसा या प्रोटीन का कुछ हिस्सा गैर-दूध स्रोत, जैसे वनस्पति वसा या वनस्पति प्रोटीन से बदला गया है, तो उसकी सही जानकारी लेबल पर देना जरूरी है।

असली पनीर आखिर होता कैसा है?

FSSAI के मानक के मुताबिक पनीर दूध या दूध के ठोस पदार्थों को अनुमत अम्लीय पदार्थों की मदद से जमाकर बनाया जाता है। यानी असली पनीर की बुनियाद दूध है। मानक पनीर में नमी की अधिकतम सीमा 60 प्रतिशत है और सामान्य पनीर के लिए सूखे पदार्थ के आधार पर दूध वसा कम से कम 50 प्रतिशत निर्धारित है। यही बात उपभोक्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, सिर्फ पनीर का सफेद होना, मुलायम होना या महंगा होना उसकी शुद्धता का प्रमाण नहीं है।

घर पर पहला संकेत, पनीर को दबाकर देखें

ताजा दूध से बना अच्छा पनीर आमतौर पर दबाने पर हल्का नरम और लचीला महसूस होता है। बहुत ज्यादा रबर जैसा, असामान्य रूप से कठोर या जरूरत से ज्यादा चिकना टुकड़ा संदेह पैदा कर सकता है। लेकिन ध्यान रखें, सिर्फ बनावट देखकर पनीर को नकली घोषित नहीं किया जा सकता। तापमान, पानी की मात्रा, दूध का प्रकार और बनाने की प्रक्रिया से भी पनीर की बनावट बदल सकती है।

असली खेल खुल सकता है आयोडीन से

FSSAI की घरेलू जांच संबंधी सामग्री में पनीर समेत दूध से बने कुछ उत्पादों में स्टार्च की मिलावट जांचने का तरीका दिया गया है। इसके लिए नमूने को पानी के साथ गर्म करके ठंडा किया जाता है और आयोडीन की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यदि नीला रंग बनता है तो स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिलता है।

यह तरीका रोचक जरूर है, लेकिन यहां एक बड़ी सावधानी है। आयोडीन परीक्षण केवल स्टार्च की मौजूदगी का संकेत देता है। इससे यह साबित नहीं होता कि पूरा पनीर नकली है या वह सुरक्षित है। यानी घर का परीक्षण आपको सवाल उठाने में मदद कर सकता है, अंतिम फैसला नहीं।

सबसे बड़ा भ्रम, पानी में डालकर असली-नकली पता चल जाएगा?

बाजार और इंटरनेट पर कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं। पनीर को पानी में डालना, गर्म करना, दबाना या भूनना। इनके आधार पर पनीर को शत-प्रतिशत असली या नकली घोषित करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। मसलन, पकाने पर पनीर का सिकुड़ना या रबर जैसा होना कई कारणों से हो सकता है। इसलिए एक घरेलू प्रयोग को अंतिम प्रमाण मानना ठीक नहीं।

फिर उपभोक्ता क्या करे?

सबसे सुरक्षित तरीका है कि पैक्ड पनीर खरीदते समय लेबल, निर्माता का नाम, खाद्य सुरक्षा लाइसेंस और सामग्री देखें। जिस उत्पाद में दूध की जगह या उसके साथ वनस्पति वसा अथवा अन्य गैर-दूध घटक इस्तेमाल हुए हों, उसकी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। FSSAI ने 2026 में चीज एनालॉग के सही नाम और लेबलिंग को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं और 'पनीर' के नाम से चीज एनालॉग बेचना नियमों का उल्लंघन बताया है। खुले पनीर के मामले में भरोसेमंद विक्रेता से खरीदना, बिल लेना और असामान्य गंध, रंग या बनावट वाले उत्पाद से बचना बेहतर है।

शक हो तो जांच जरूरी

किसी पनीर में मिलावट का वास्तविक प्रमाण प्रयोगशाला जांच से ही मिल सकता है। मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूने लेकर कार्रवाई करता रहा है। विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक राज्य में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों सहित उच्च जोखिम वाले खाद्य पदार्थों के लिए विशेष जांच अभियान भी चलाए जाते हैं।

एमपी में बैन क्यों?

12 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध के निर्देश दिए। सरकार ने प्राकृतिक दूध से बने उत्पादों को बढ़ावा देने और उपभोक्ताओं को वास्तविक दूध आधारित उत्पाद उपलब्ध कराने को इसका उद्देश्य बताया है। वहीं FSSAI के मानकों में पनीर दूध से बनने वाला उत्पाद है। इसके विपरीत एनालॉग में दूध के घटकों को आंशिक या पूरी तरह गैर-दूध वाले घटकों से बदला जा सकता है।

कहना होगा कि छत्तीसगढ़ से शुरू हुआ एनालॉग पनीर पर राज्यों का शिकंजा, 12 दिन में पांच राज्यों तक पहुंचा और अब एमपी भी इस सूची में शामिल हो चुका है।

सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?

  1. प्रोटीन और कैल्शियम का फायदा कम हो सकता है

दूध से बने पनीर में प्राकृतिक दूध प्रोटीन और खनिज मिलते हैं। एनालॉग पनीर की संरचना अलग होने के कारण उसका पोषण प्रोफाइल भी अलग होता है। इसलिए उसे असली पनीर के बराबर पोषण वाला मानना सही नहीं है।

  1. वनस्पति वसा की मात्रा महत्वपूर्ण है

कुछ एनालॉग पनीर में पाम ऑयल या अन्य वनस्पति वसा का इस्तेमाल होता है। इन उत्पादों का स्वास्थ्य प्रभाव उनकी वास्तविक सामग्री और मात्रा पर निर्भर करता है। एफएसएसएआई ने भी एनालॉग उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले गैर-दूध घटकों की स्पष्ट घोषणा पर जोर दिया है।

  1. ट्रांस फैट हो तो ज्यादा चिंता

यह कहना सही नहीं कि हर एनालॉग पनीर में ट्रांस फैट होता है। लेकिन यदि किसी उत्पाद में औद्योगिक ट्रांस फैट मौजूद है, तो उसका नियमित सेवन नुकसानदायक है। FSSAI के अनुसार ट्रांस फैट खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को घटा सकता है, जिससे हृदय रोग का जोखिम बढ़ता है।

  1. असली खतरा गलत नाम से बेचने में भी है

अगर कोई गैर-दुग्ध एनालॉग उत्पाद ग्राहक को सामान्य दूध वाला पनीर बताकर बेचा जाता है तो, ग्राहक को यह पता ही नहीं चलता कि वह क्या खा रहा है। FSSAI के अनुसार डेयरी एनालॉग को दूध और दूध उत्पादों की संज्ञा से नहीं बेचा जाना चाहिए तथा लेबल पर उसकी प्रकृति स्पष्ट होनी चाहिए।

एनालॉग पनीर सेहत के लिए क्यों चिंता का विषय?

  • दूध के बजाय इसमें वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य गैर-दूध घटक हो सकते हैं।
  • इसका पोषण प्रोफाइल असली दूध वाले पनीर से अलग होता है।
  • हर एनालॉग पनीर में ट्रांस फैट होता है, यह कहना गलत है; लेकिन मौजूद होने पर ट्रांस फैट हृदय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
  • सबसे बड़ी समस्या तब है जब एनालॉग को असली दूध वाला पनीर बताकर बेचा जाए।
  • इसलिए खरीदते समय पैक का लेबल और सामग्री जरूर देखें।

यही कारण है कि FSSAI ने पूरे देश में एनालॉग पनीर पर ब्लैंकेट बैन नहीं लगाया है। अप्रैल 2026 में FSSAI ने स्पष्ट किया था कि किसी एनालॉग उत्पाद को सामान्य पनीर के रूप में बेचना या परोसना उपभोक्ता को गुमराह करने वाला हो सकता है और उसकी सही प्रकृति बताना जरूरी है।

इसलिए पनीर खरीदते समय सबसे जरूरी बात यह नहीं कि वह कितना सफेद या कितना मुलायम है। असली सवाल है, वह बना किससे है और उसकी पहचान क्या बताई गई है? मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के बाद यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब उपभोक्ता को सिर्फ 'नकली पनीर' शब्द से नहीं, बल्कि मिलावट और एनालॉग उत्पाद के बीच के फर्क को भी समझना होगा।

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