
चेन्नई. केंद्र सरकार द्वारा संसद के मानसून सत्र में संशोधित परिसीमन विधेयक लाए जाने की संभावनाओं के बीच तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सांसदों की एक विशेष परामर्श बैठक आयोजित की। चेन्नई स्थित कलैवाणर अरंगम में शनिवार को मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में परिसीमन विधेयक को केंद्र सरकार द्वारा तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। बहरहाल, बैठक का प्रमुख द्रविड़ दलों डीएमके, एआइएडीएमके के अलावा पीएमके, डीएमडीके और एमएनएम ने बहिष्कार किया जिनकी संख्या 37 थी।
संसद के वर्तमान सत्र के दौरान परिसीमन से जुड़े संभावित बदलावों और राज्य के प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा के लिए यह बैठक बुलाई गई थी।
विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद सत्ता पक्ष टीवीके गठबंधन में शामिल दलों के 19 सांसदों ने बैठक में भाग लिया। लगभग दो घंटे तक चली इस बैठक में तमिलनाडु सरकार की ओर से मुख्यमंत्री विजय के साथ मंत्री आनंद, आधव अर्जुन, राजमोहन और निर्मल कुमार मौजूद रहे।
बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में मंत्री निर्मल कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के अधिकारों को प्रभावित करने वाले परिसीमन विधेयक को पारित करने का प्रयास कर रही है, जिसके खिलाफ बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है।
लोस सीटों की संख्या रहे अपरिवर्तित
वीसीके प्रमुख और सांसद तिरुमावलवन ने कहा कि वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम सहित सभी दलों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। बैठक में यह फैसला लिया गया कि लोकसभा में कुल सीटों की संख्या 543 और तमिलनाडु के लिए निर्धारित 39 सीटों का कोटा यथावत रखा जाना चाहिए। सीटों की संख्या बढ़ाने से संसदीय कार्यवाही की प्रभावशीलता प्रभावित होगी। वहीं कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि लोकसभा सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 850 करने से सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं मिलेगा, इसलिए तमिलनाडु के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और हितों की हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए।