विशिष्ट न्यायालय एससी-एसटी अत्याचार निवारण प्रकरण हनुमानगढ़ ने सुनाया फैसला, वर्ष 2018 का तलवाड़ा झील थाने का मामला, एक आरोपी की हो चुकी मौत तो कार्रवाई निरस्त
हनुमानगढ़. जीप चढ़ाकर दलित युवक की हत्या के मामले में विशिष्ट न्यायालय एससी-एसटी अत्याचार निवारण प्रकरण हनुमानगढ़ ने चार जनों को दोषी करार दिया। उनको आजीवन कारावास तथा जुर्माने की सजा सुनाई। राज्य की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक पवन श्रीवास्तव ने पैरवी की।
प्रकरण के अनुसार 21 मई 2018 को हाकमराम पुत्र पाबूदान नायक निवासी मिर्जावाली मेर ने तलवाड़ा झील थाने में हत्या का मामला दर्ज कराया था। उसने पुलिस को रिपोर्ट दी थी कि वह और उसका भाई महेन्द्र नायक एक ही घर में रहते हैं। 20 मई की रात करीब आठ बजे सफेद रंग की बोलेरो जीप में सवार होकर ललित उर्फ धोलु भादू पुत्र रामप्रताप, उसका भाई नरेश भादू दोनों निवासी मिर्जावाली मेर, मैनपाल पुत्र मदनलाल निवासी डबलीकलां 5 एमजेडडब्ल्यू, भीमराज पुत्र बलराम जाखड़ निवासी भोमपुरा, सोनू पुत्र कृष्णलाल निवासी मिर्जावाली मेर सहित कई अन्य उनके घर के आगे आए। ललकार मारकर महेन्द्र को बुलाया और लाठी, रॉड आदि से मारपीट करने लगे। परिवादी, महेन्द्र की पत्नी सुमन आदि ने बीच-बचाव का प्रयास किया तो उनसे भी मारपीट की तथा ललित उर्फ धोलू ने पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। आरोपी पीटते हुए महेन्द्र को गाड़ी में डालकर ले गए। गांव के सरकारी अस्पताल के सामने महेन्द्र को सडक़ पर पटक कर उस पर जीप चढ़ाकर मार डाला। इसके बाद पिस्तौल हवा में लहराते हुए गाड़ी लेकर फरार हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पांच जनों के खिलाफ चालान पेश किया। विचारण के दौरान सोनू पुत्र कृष्णलाल की मौत हो गई। उसके खिलाफ कार्यवाही 17 सितम्बर 2021 को निरस्त कर दी गई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने ललित उर्फ धोलु, उसके भाई नरेश तथा मैनपाल व भीमराज को दोषी करार दिया।
विशिष्ट लोक अभियोजक पवन श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार को चारों जनों को आईपीसी की धारा 449/149, 364/149, 302/149 तथा धारा 3(2) (वी) एससी/एसटी एक्ट में दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। जबकि आईपीसी की धारा 148 में तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है। ललित उर्फ धोलू को धारा 3/25(1-बी)(ए) आम्र्स एक्ट में दोषी करार देकर साल की सजा सुनाई गई है।