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Hantavirus And Organ Failure : हंता वायरस के शुरुआती लक्षण मामूली, पर ऑर्गन फेलियर का रहता है रिस्क

Hantavirus And Organ Failure: Science Direct Journal के अनुसार, इस बीमारी के शुरुआती लक्षण बिल्कुल आम फ्लू या बुखार जैसे लगते हैं, लेकिन यह बहुत तेजी से शरीर के मुख्य अंगों (फेफड़ों और किडनी) पर हमला करता है।

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May 10, 2026
Hantavirus And Organ Failure (Image- gemini)

Hantavirus And Organ Failure: हंता वायरस आजकल पूरी दुनिया को डरा रहा है। Science Direct Journal के एक शोध के अनुसार, यह वायरस हमारी रक्त वाहिकाओं की दीवारों को कमजोर कर देता है। किडनी में सूजन पैदा कर देता है। आइए जानते हैं कि आखिर यह वायरस कैसे इतना खतरनाक है और इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना क्यों जरूरी है।

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शुरूआती लक्षण क्या होते हैं?

हंता वायरस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण किसी को भी धोखा दे सकते हैं। संक्रमण होने के 1 से 8 हफ्ते बाद ये लक्षण दिखते हैं। ये लक्षण बिल्कुल डेंगू या इन्फ्लुएंजा (Flu) जैसे लगते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

  • हल्का बुखार और बहुत ज्यादा थकान।
  • मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द।
  • उल्टी होना।
  • पेट में बेचैनी।

फेफड़ों और किडनी पर कैसे होता है हमला?

जैसे-जैसे वायरस शरीर में फैलता है, यह अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। फेफड़ों के टिशू में पानी भरने लगता है, जिससे खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। मरीज को सूखी खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगती है। किडनी में सूजन आने की वजह से पेशाब कम आने लगता है, ब्लड प्रेशर लो हो जाता है और शरीर में खून बहने (Internal Bleeding) का खतरा बढ़ जाता है।

फेफड़ों में पानी भरने की समस्या

इसमें पल्मोनरी का मतलब होता है फेफड़ों से जुड़ा हुआ। यह हंता वायरस का सबसे खतरनाक रूप है। यह सीधे आपके फेफड़ों पर असर डालता है। वायरस की वजह से फेफड़ों की नसों से पानी (लिक्‍विड) रिसने लगता है और फेफड़ों के अंदर भर जाता है। फेफड़ों में पानी भरने से मरीज को सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होती है, जैसे कि वह डूब रहा हो। शरीर में ऑक्सीजन कम हो जाती है और यह जानलेवा साबित हो सकता है।

किडनी फेलियर का खतरा

इसमें रीनल का मतलब होता है किडनी (गुर्दा) से जुड़ा हुआ और हेमरेजिक का मतलब होता है खून का बहना। यह मुख्य रूप से आपकी किडनी पर असर डालता है। इसमें मरीज को तेज बुखार के साथ-साथ अंदरूनी ब्लीडिंग (Internal Bleeding) हो सकती है। इसके कारण ब्लड प्रेशर अचानक बहुत कम हो जाता है। किडनी अचानक काम करना बंद कर देती है (Kidney Failure)। इसकी वजह से शरीर का कचरा बाहर नहीं निकल पाता और मरीज को डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है।

क्यों है यह खतरनाक?

फेफड़ों से जुड़े मामलों में मृत्यु दर 38% तक हो सकती है। यानी समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित होता है। फिलहाल इस वायरस का कोई पक्का एंटीवायरल इलाज या टीका नहीं है। अस्पतालों में मरीज को ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और डायलिसिस की मदद से सहारा दिया जाता है ताकि उसका शरीर इस वायरस से लड़ सके।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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