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हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में साथ आएंगे भारत और ऑस्ट्रेलिया, सैन्य सहयोग बढ़ाने पर सबसे ज्यादा जोर

India-Australia के बीच नई दिल्ली में 10वीं रक्षा नीति वार्ता हुई। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री सहयोग, सैन्य अभ्यास और रक्षा साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई।

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भारत

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Ankit Sai

May 10, 2026

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 10वीं रक्षा वार्ता

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 10वीं रक्षा वार्ता (ANI PHOTO)

India Australia Defence Talks: इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) में बदलते सुरक्षा हालात के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने का फैसला किया है। नई दिल्ली में 10वीं ऑस्ट्रेलिया-भारत डिफेंस पॉलिसी टॉक्स में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, सैन्य सहयोग और रक्षा उद्योग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक भरोसे का बड़ा संकेत माना जा रहा है। बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद ने किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया की ओर से फर्स्ट असिस्टेंट सेक्रेटरी इंटरनेशनल पॉलिसी बर्नार्ड फिलिप मौजूद रहे।

समुद्री सुरक्षा और सैन्य सहयोग पर जोर

इस बैठक में समुद्री सुरक्षा और सैन्य सहयोग बढ़ाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने माना कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा साझेदारी जरूरी है। दोनों देशों ने कहा कि साल 2025 में शुरू हुई ऑस्ट्रेलिया-भारत रक्षा मंत्रियों की वार्ता से आपसी भरोसा और सहयोग बढ़ा है। साथ ही सैन्य अभ्यासों को और बड़ा और मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी। भारत पहली बार में एक्सरसाइज टैलिस्मन सेबर (Exercise Talisman Sabre) और Exercise Puk-Puk में हिस्सा लेगा।

नौसेना सहयोग को मिलेगा और विस्तार

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने समुद्री सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। दोनों देशों ने एक-दूसरे की इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यूज में नौसेना की भागीदारी बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा एक्सरसाइज मिलन (Exercise Milan) और एक्सरसाइज काकाडू (Exercise Kakadu) जैसे बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में सहयोग जारी रखने का फैसला लिया गया। अधिकारियों का मानना है कि इससे हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत होगी।

रक्षा उद्योग में भी बढ़ेगी साझेदारी

बैठक में रक्षा उद्योग को लेकर भी अहम चर्चा हुई। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने माना कि रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग भविष्य में दोनों देशों की साझेदारी का बड़ा आधार बन सकता है। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग में सहयोग और भागीदारी के रणनीतिक महत्व को स्वीकार किया। साथ ही साल 2025 में सिडनी में होने वाली पहली ऑस्ट्रेलिया-भारत डिफेंस इंडस्ट्री राउंडटेबल और नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग के दौरान आयोजित ऑस्ट्रेलिया की पहली रक्षा उद्योग रणनीतिक बैठक का भी स्वागत किया गया।

नई रक्षा रणनीति पर भी हुई चर्चा

ऑस्ट्रेलिया-भारत वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन के नतीजों की समीक्षा करते हुए दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग से जुड़े संयुक्त घोषणा पत्र को और मजबूत बनाने की योजना पर चर्चा की। इसके साथ ही संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप तैयार करने पर भी सहमति बनी। दोनों पक्षों ने सभी क्षेत्रों में आपसी तालमेल बढ़ाने और क्षेत्रीय साझेदार देशों के साथ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इंडो-पैसिफिक में बढ़ती साझेदारी का संकेत

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है। पिछले कुछ सालों में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया लगातार अपने रणनीतिक रिश्तों को मजबूत कर रहे हैं। नई दिल्ली में हुई यह बैठक उसी दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है।