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Rajasthan: मेवाड़ की तेज धूप और अरावली के रिफ्लेक्शन से बढ़ा स्किन कैंसर का खतरा, समय रहते बचाव ही एकमात्र उपाय

स्किन कैंसर जागरूकता माह के तहत उदयपुर के विशेषज्ञों ने मेवाड़ में तेज धूप और हाई यूवी इंडेक्स को बड़ा खतरा बताया। डॉक्टरों ने SPF 30 सनस्क्रीन, फुल कपड़े, टोपी और नियमित जांच अपनाने की सलाह दी। समय रहते पहचान और बचाव से स्किन कैंसर का खतरा काफी हद तक टाला जा सकता है।

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Rajasthan Heat Alert

मेवाड़ में तेज धूप बनी खतरा (फोटो पत्रिका)

उदयपुर: तेज धूप, उच्च यूवी इंडेक्स और बदलती जीवनशैली से हमारी त्वचा पर असर डाल रही है। मेवाड़ की भौगोलिक स्थिति, खासकर अरावली क्षेत्र में सूर्य किरणों के परावर्तन से जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में समय पर जागरूकता और जांच बेहद जरूरी है।

बता दें कि मई की महीना स्किन कैंसर जागरूकता माह है। स्किन कैंसर का मुख्य कारण सूर्य से आने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें हैं। ये त्वचा की गहराई में जाकर डीएनए को नुकसान पहुंचाती हैं और समय से पहले बुढ़ापा लाती हैं। यूवीबी किरणें सनबर्न और कैंसर का कारण बनती हैं। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, गोरी स्किन और रसायन जोखिम बढ़ाते हैं।

तीन अलग खतरे

स्किन कैंसर तीन प्रकार का होता है। बेसल सेल कार्सिनोमा सबसे सामान्य है, जो स्किन की निचली परत से शुरू होकर धीरे-धीरे बढ़ता है। इसके लक्षणों में चमकदार उभार या लंबे समय तक न भरने वाला घाव शामिल है।

दूसरा स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा है, जो स्किन की ऊपरी परत को प्रभावित करता है, ज्यादा आक्रामक है। यह अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है। सबसे खतरनाक प्रकार मेलानोमा है, जो तेजी से फैलता है। इसके लिए एबीसीडीई नियम असमान आकार, अनियमित किनारे, रंग में बदलाव, 6 मिमी से बड़ा आकार और समय के साथ परिवर्तन महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं।

समय पर जांच से संभव बचाव

रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र राठौड़ के अनुसार, स्किन कैंसर को शुरुआती अवस्था में आसानी से पहचाना जा सकता है। डर्मेटोस्कोपी, स्किन बायोप्सी और पीईटी सिटी जांचें की जाती हैं। समय रहते पहचान हो जाए तो इसका उपचार पूरी तरह संभव है।

बचाव ही सबसे कारगर उपाय

  • तेज धूप से बचें, खासकर दोपहर के समय
  • कम से कम एसपीएफ 30 वाला सनस्क्रीन लगाएं
  • फुल आस्तीन के कपड़े, टोपी और चश्मे का उपयोग करें
  • 'छाया नियम' अपनाएं-छोटी परछाई मतलब तेज धूप

एबीसीडीई नियम से पहचानें संदिग्ध तिल

त्वचा पर मौजूद किसी संदिग्ध तिल या मस्से की पहचान के लिए एबीसीडीई नियम जरूरी है।

  • ए (असिमेट्री) में तिल का एक हिस्सा दूसरे से अलग दिखता है।
  • बी (बॉर्डर) में किनारे अनियमित या धुंधले होते हैं।
  • सी (कलर) में एक ही तिल में अलग-अलग रंग दिखना संभव।
  • डी (डायमीटर) अनुसार 6 मिमी से बड़ा तिल जोखिम का संकेत।
  • ई (इवॉल्विंग) में समय के साथ तिल के आकार, रंग या रूप में बदलाव देखा जाता है।

आरएनटी मेडिकल कॉलेज में इतने केस ((जनवरी से अप्रैल))

  • साल 2021 में 68
  • साल 2022 में 115
  • साल 2023 में 195
  • साल 2024 में 136
  • साल 2025 में 126
  • साल 2026 में 47

मेवाड़ की परंपरा में में साफा और पगड़ी केवल सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि धूप से बचाव का प्रभावी माध्यम भी हैं, लेकिन बदलते समय के साथ इन्हीं परंपराओं को आधुनिक सुरक्षा उपायों जैसे सनस्क्रीन और नियमित जांच के साथ जोड़ना जरूरी हो गया है, क्योंकि स्किन कैंसर एक ऐसा रोग है जिसे शुरुआती अवस्था में हम खुद भी पहचान सकते हैं बस जरूरत है जागरूकता और समय पर सही कदम उठाने की।
-डॉ. नरेंद्र राठौड़, प्रोफेसर, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग