- श्रीगंगानगर का एकमात्र वार्ड जहां बारिश में भूजल को किया जाता है रिचार्ज वार्ड 34 में नवाचार : यहां पानी की कमी नहीं, बटन दबाओ और जी भर पानी पाओ
श्रीगंगानगर. जल संकट को लेकर जिले के किसान सडक़ों पर आ गए हैं, वहीं जिला मुख्यालय पर कई कॉलोनियों और गांवों में पानी की किल्लत का सामना आमजन को करना पड़ रहा है। इसके विपरीत जिला मुख्यालय पर एजुकेशन हब बन चुका वार्ड 34 शहर का ऐसा वार्ड बन गया है, जहां पानी की कमी नहीं है। बटन दबाते ही पानी बहने लगता है। जितना पानी चाहिए उतना इस्तेमाल कर सकते हैं। न जलदाय विभाग से कनेक्शन लेने का झंझट और न पानी के लिए किसी की मिन्नत की जरूरत। इस वार्ड में पानी का संकट वर्षा जल से भूजल को रिचार्ज करने से मिटा है।एच ब्लॉक एरिया के इस वार्ड में करीब बीस साल पहले भूजल स्तर को ऊंचा उठाने के लिए वार्डवासियों ने देसी तरीका अपनाया और वह कारगर रहा। इसके परिणाम अब सामने आने लगे हैं। नेहरू पार्क इसी वार्ड में है, जो करीब छह बीघा भूमि पर बना हुआ है। इस पार्क में हर किस्म के पेड़ पौधे हैं, जिनके लिए नियमित पानी की जरूरत पड़ती है। वाटर वर्क्स के एक कनेक्शन से पार नहीं पड़ी तो पूर्व पार्षद डॉ. भरतपाल मय्यर ने इस पार्क की चारदीवारी में कुछ छेद करवा दिए ताकि बरसात होने के बाद जैसे ही सडक़ें जलमग्न हो जाए तो पानी सीधे पार्क में आ जाए। बीस साल से लगातार पानी इस पार्क में आने का असर यह हुआ कि आसपास के इलाके का जलस्तर बढ़ गया। पहले पानी खारा था वह अब मीठे में तब्दील हो गया।
भगतसिंह चौक के पास नगर परिषद के अग्निशमन सेवा केन्द्र की फायर बिग्रेड की गाडिय़ों में अब जंग नहीं लगती। पहले दमकल की गाडिय़ो में पानी भरने के लिए वाटर वर्क्स की डिग्गी या अन्य कहीं से पानी का जुगाड़ करना पड़ता था। अब इसी कैम्पस में सबमर्सिबल पंप से हजारों लीटर पानी निकाला जा रहा हैं। इस पंप को चालू करते ही चंद मिनटों में गाड़ी का टैंक भर जाता है।
पूर्व पार्षद मय्यर ने बताया कि बरसात होने के बाद दो दिन तक किसी भी पार्क में पानी एकत्र होने से परेशानी आती हैं। जैसे-जैसे घास के माध्यम से भूगर्भ में पानी पहुंचता है तो वहां का वाटर लेवल ऊंचा हो जाता है। डॉ. मय्यर का दावा है कि प्राकृतिक रूप से मिले बरसाती पानी की सार-संभाल करते हुए उसे सहेजा जाए तो कहीं पर भी पानी की किल्लत नहीं होगी। भूजल नहरी पानी की तुलना में शुद्ध तो है ही, साथ ही इसमें वे सभी तत्व मिलेंगे जिनकी शरीर को जरूरत होती है।
डॉ. मय्यर ने बताया कि वह रोजाना शाम को बैडमिंटन और टेनिस खेलने स्टेडियम जाते हैं। बीस साल पहले खूब बरसात हुई तो स्टेडियम पानी से लबालब हो गया। अगले दिन स्टेडियम में पानी नहीं था। पड़ताल करने पर पता चला कि बरसाती पानी यहां लगी घास के माध्यम से धरती में समा गया। डॉ. मय्यर ने यही तरीका नेहरू पार्क में अपनाया। इस पार्क के चारों ओर सडक़ों का लेवल पार्क से ऊंचा रखा और उसकी ढलान पार्क की ओर से कराई। बरसात होने पर वार्ड का ज्यादातर पानी पार्क में आकर धरती में समाने लगा। इससे कुछ ही सालों में इलाके का भूजल स्तर बढ़ गया और खारा पानी मीठे में तब्दील हो गया। पार्क में सबमर्सिबल पंप लगाने के बाद पेड़-पौधों को नियमित पानी मिलने लगा है।