
उद्घाटन के दो हफ्ते के भीतर ही कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की हालत खराब हो जाने के बाद केंद्र सरकार, खास कर सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की भारी किरकिरी हो रही है। 'डैमेज कंट्रोल' के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को एनएचएआई की नीलामी में हिस्सा लेने से रोकने की प्रक्रिया शुरू की है और कुछ अपने अफसरों पर भी कार्रवाई की है। लेकिन, मामले की तह में जाने पर पता चलता है कि कंपनी का रिकॉर्ड पहले से दागदार रहा है। इसके मद्देनजर एनएचएआई की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है, जिसने न तो पीएनसी के काम पर सही तरीके से नजर रखा और न ही हैंडओवर लेते वक्त सही से ज़िम्मेदारी निभाई। इससे लगता है कि कंपनी पर एनएचएआई की कार्रवाई महज दिखावा है।
6 अगस्त को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल था:
14 जुलाई को हुआ था उद्घाटन
सरकार को पहले से पता था कि काम के अंत में अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और बाकी जरूरी क्लीयरेंस लेने के लिए पीएनसी इंफ्राटेक का घूस देने का रिकॉर्ड रहा है।
पीएनसी इंफ्राटेक के निदेशकों योगेश जैन और टीआर राव सहित चार कर्मचारियों के खिलाफ 8 जून, 2024 को नई दिल्ली में सीबीआई ने केस दर्ज किया था। इन पर एनएचएआई के अफसरों को एनओसी आदि लेने के लिए घूस देने का आरोप था। इसके बाद 18 अक्तूबर, 2024 को सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने कंपनी को एक साल के लिए बैन कर दिया। इसके खिलाफ कंपनी कोर्ट गई थी, लेकिन 29 अक्तूबर, 2024 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी।
इस घटनाक्रम के बाद भी सरकार ने न तो पीएनसी के काम की गुणवत्ता जांचने का पैमाना सख्त किया और न ही अपने तंत्र को मजबूत किया। इसी का नतीजा रहा कि कंपनी ने घटिया एक्सप्रेसवे बना कर सौंप दिया, जो एक महीना भी सही से नहीं चल सका। ऐसा तब है, जब इसे बनाने की लागत सामान्य से कहीं ज्यादा (करीब 67 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर) बताई जा रही है और इसमें हाइटेक तरीके का भी इस्तेमाल किए जाने का दावा है।
नितिन गडकरी ने 2025 में लोक सभा को बताया था कि एनएचएआई ने लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए जीपीएस से लैस मोटर ग्रेडर, इंटेलिजेंट कॉम्पैक्टर और स्ट्रिंगलेस पेवर जैसी स्मार्ट तकनीक वाली मशीनें इस्तेमाल किया है। इनके इस्तेमाल के फायदे गिनाते हुए उन्होंने कहा था कि इनके इस्तेमाल से गुणवत्ता से समझौता किए बिना प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, रियल टाइम डिजिटल डॉक्युमेंटेशन और मॉनिटरिंग हो जाती है, गुणवत्ता मानकों (जैसे समतल आदि) का पालन आसान हो जाता है।
2024 में केंद्र सरकार द्वारा एक साल का बैन लगाने के बावजूद पीएनसी को राज्यों से ठेके मिलते रहे। 2025 में ही महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) से 4630 करोड़ के ठेके मिले। पिछले महीने एनएचएआई से भी पीएनसी इंफ्राटेक को ठेका मिलने की खबर है।
कंपनी की वैबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक उसने करीब 25 साल में सड़क बनाने के 70 प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। इनमें से करीब 50 उत्तर प्रदेश में हैं। बाकी मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार में हैं।
पीएनसी इन्फ्राटेक ने यूपी में कई हाईवे व एक्सप्रेसवे का निर्माण किया है। कंपनी का दावा है कि उसने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (पैकेज 1) तय समय से 109 दिन पहले, पूर्वाञ्चल एक्सप्रेसवे (पैकेज 5) 132 दिन पहले और पैकेज 6 समय से 97 दिन पहले पूरा कर दिया था। इसके लिए उसे एनएचएआई और यूपीईआईडीए से करोड़ों रुपये का बोनस भी मिला था। उसने कई अन्य प्रोजेक्ट्स भी समय से पहले पूरा कर बोनस लेने की बात बताई है।
बता दें कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे भी एक साल के भीतर ही धंस गया था। ऐसे में यह जांच का विषय बनता है कि क्या पीएनसी गलत तरीके से एनओसी लेकर बोनस के रूप में पैसे लेने के लिए समय से पहले काम पूरा करने का दावा तो नहीं करती रही है? इस तरह वह घोटाले तो नहीं कर रही है?
पीएनसी इंफ्राटेक के मालिक प्रदीप कुमार जैन हैं, जो कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) हैं। इन्होंने 1999 में पीएनसी कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड शुरू की और 2001 में ही उत्तर प्रदेश में आगरा-ग्वालियर एनएच 3 को चार लेन का करने का एनएचएआई का पहला प्रोजेक्ट पूरा किया।
प्रदीप जैन राजनीति में भी दिलचस्पी रखते हैं। 2017 में उन्होंने आगरा में बतौर निर्दलीय उम्मीदार मेयर का चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने 608 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी। उनसे पांच साल छोटे उनके भाई नवीन कुमार जैन भी उस चुनाव में बीजेपी के टिकट पर उम्मीदवार थे। उनकी संपत्ति तब 409 करोड़ रुपये की थी। नवीन जैन अभी यूपी से भाजपा के राज्य सभा सांसद हैं। 2024 में उन्होंने अपनी संपत्ति 441 करोड़ घोषित की थी।
दोनों भाई रियल एस्टेट के कारोबार में साथ ही थे। नवीन जैन कई साल पीएनसी इंफ्राटेक में डायरेक्टर भी रहे। हालांकि, अभी कंपनी के बोर्ड मेंबर में उनका नाम नहीं है।