
Karnataka Cabinet Blueprint: कर्नाटक की सियासत में आखिरकार वह बड़ा बदलाव हो ही गया है, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। राज्य में सत्ता परिवर्तन के तय फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया ने अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके ठीक बाद, मनोनीत मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सिर ताज सजाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक में नए मंत्रिमंडल के चेहरे और आगामी राज्यसभा चुनाव के रणनीतिक ब्लूप्रिंट को अंतिम रूप दे दिया गया है।
देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस मुख्यालय और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बैठकों का लंबा दौर चला। इस हाई-प्रोफाइल बैठक की अध्यक्षता खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की। बैठक में कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों मौजूद रहे। इस मंथन का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक के नए मंत्रिमंडल की संरचना को इस तरह से तैयार करना है जिससे सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।
नए मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह 3 जून को बेंगलुरु के लोक भवन में शाम 4 बजे आयोजित किया जाएगा। शपथ लेने से ठीक पहले शिवकुमार ने दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे के घर जाकर उनसे व्यक्तिगत मुलाकात की। इस दौरान नए मंत्रियों की लिस्ट, उपमुख्यमंत्री पद की संख्या और कर्नाटक कांग्रेस संगठन में होने वाले फेरबदल को लेकर आखिरी मुहर लगाई गई।
इस राजनीतिक बदलाव के बीच कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल भी दिल्ली के मंथन में शामिल रहे। दूसरी तरफ, पार्टी के युवा और मुखर नेता प्रियंक खरगे की भूमिका को लेकर भी अटकलें तेज हैं। प्रियंक खरगे ने भी दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि नए मंत्रिमंडल में कुछ पुराने चेहरों को बरकरार रखते हुए कई नए और युवा विधायकों को मौका दिया जा सकता है, ताकि राज्य में पार्टी की पकड़ और मजबूत की जा सके।
दरअसल, यह पूरा बदलाव कांग्रेस आलाकमान द्वारा सरकार गठन के समय तय किए गए 'पावर शेयरिंग फॉर्मूले' का हिस्सा है। सिद्धारमैया ने गरिमा के साथ अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद कमान शिवकुमार को सौंप दी है। अब चुनौती यह है कि नए मंत्रिमंडल में सभी गुटों को संतुष्ट किया जाए। इस बैठक के आधिकारिक प्रस्तावों के बाहर आते ही मंत्रियों के नामों की अंतिम सूची भी साफ हो जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी खेमे भाजपा का कहना है कि कर्नाटक की जनता ने विकास के लिए जनादेश दिया था, लेकिन कांग्रेस केवल 'कुर्सी-कुर्सी' के खेल में व्यस्त है। वहीं कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि यह बदलाव पार्टी के भीतर अनुशासन और वादे को निभाने की मिसाल है, जिससे कर्नाटक में विकास को नई गति मिलेगी।
अब सबकी नजरें 3 जून को बेंगलुरु के लोक भवन पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि डीके शिवकुमार के साथ कौन-कौन से विधायक मंत्री पद की शपथ लेते हैं। क्या राज्य में एक से ज्यादा उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे? इसके साथ ही सिद्धारमैया की नई भूमिका संगठन में क्या होगी, यह देखना भी दिलचस्प होगा।
इस बदलाव का सीधा असर आगामी राज्यसभा चुनावों पर पड़ने वाला है। दिल्ली की बैठक में सिर्फ मंत्रियों के नाम ही तय नहीं हुए, बल्कि राज्यसभा की सीटों के लिए उम्मीदवारों की स्क्रूटनी भी की गई है। शिवकुमार के सीएम बनते ही वो कौन से समीकरण होंगे जो राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को फायदा पहुंचाएंगे, यह इस कहानी का एक बड़ा इनसाइड ट्रैक है। (इनपुट:ANI)