
Rajyog : वैदिक ज्योतिष में धन-वैभव, भौतिक सुख-सुविधाओं, कला और प्रेम के कारक माने जाते शुक्र की चाल बदल रही है। वे सितंबर में राशि परिवर्तन करेंगे। 2 सितंबर को शुक्र अपनी स्वयं की राशि तुला में प्रवेश करेंगे। इससे पंच महापुरुष योगों में से एक-मालव्य राजयोग का निर्माण होगा। शुक्र के इस गोचर का अनेक जातकों को खासा लाभ होगा। कुंडली में अच्छे स्थान पर होने से आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ही सुख-सुविधाओं में भी वृद्धि हो सकती है। अच्छा शुक्र करियर में भी प्रगति कराएगा। मालव्य राजयोग का पूर्ण लाभ उठाने के लिए इस अवधि में शुक्र की प्रसन्नता के उपाय करें।
स्वराशि, उच्च राशि या मूल त्रिकोण राशि में केंद्र भाव में स्थित होते हैं तब मालव्य राजयोग का निर्माण
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र जब अपनी स्वराशि, उच्च राशि या मूल त्रिकोण राशि में केंद्र भाव में स्थित होते हैं तब मालव्य राजयोग का निर्माण होता है। शुक्र के राशि परिवर्तन से सितंबर 2026 में गोचर में यह राजयोग बन रहा है। 2 सितंबर को दोपहर वे 1.45 बजे अपनी स्वराशि तुला में प्रवेश करेंगे। शुक्र यहां 6 नवंबर तक रहेंगे।
शुक्र के गोचर से बननेवाले मालव्य राजयोग का शुभ असर सभी जातकों पर पड़ेगा। कुछ लोगों के लिए यह बेहद लाभकारी हो सकता है। ज्योतिष ग्रंथों में मालव्य राजयोग को पंच महापुरुष राजयोगों में से एक कहा गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि शुक्र का यह योग जिनकी कुंडली में हो वह जातक धन ऐश्वर्य आकर्षण से पूर्ण होता है। उसे सभी भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं और सामाजिक रूप से भी सम्मानित होता है।
गोचर में बन रहे मालव्य योग का लाभ उठाने के लिए शुक्र देव के उपाय करना चाहिए। जातक की कुंडली में शुक्र की स्थिति, महादशा अंतरदशाओं आदि के प्रभाव पर भी इस राजयोग का वास्तविक फल निर्भर करता है।
राजयोग का ऐसे उठाएं लाभ
रोज सुबह शुक्रदेव के बीज मंत्र 'ॐ द्रां द्रौं सः शुक्राय नमः' का कम से कम 108 बार जाप करें।
लक्ष्मीजी की विधि-विधान से पूजा करें।
शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को लाल गुलाब व इत्र अर्पित करें।
शुक्रवार को दूध, दही, चावल या सफेद मिठाई का दान करें।
पत्नी, महिलाओं और कन्याओं का सम्मान करें।