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Inflation के दौर में Smart Investment: महंगाई से बचाव के लिए कहां लगाएं पैसा? जानें सही रणनीति

Inflation Investment: महंगाई के बीच सिर्फ बचत करना पर्याप्त नहीं, निवेश की सही रणनीति भी जरूरी है। जानें सोना, इक्विटी, FD, छोटी बचत और REITs को लेकर संतुलित पोर्टफोलियो कैसे बनाया जा सकता है।
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भारत

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MI Zahir

Aug 29, 2026

Smart Investment News.

महंगाई की मार से बचना है तो स्मार्ट निवेश से अपनी दौलत बढ़ाना सीखें। ( फोटो: AI.)

महंगाई यानी Inflation का सीधा असर आम परिवार के बजट पर पड़ता है। समय के साथ सामान और सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं तो आज बचाया गया पैसा भविष्य में उतनी ही चीजें खरीदने में सक्षम नहीं रहता। ऐसे माहौल में निवेश का उद्देश्य केवल पैसा बढ़ाना नहीं, बल्कि उसकी क्रय-शक्ति बनाए रखना भी होना चाहिए। हालांकि, किसी एक निवेश विकल्प को महंगाई का पक्का इलाज मानना सही नहीं है। जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार पोर्टफोलियो में विविधता जरूरी है। SEBI भी निवेशकों को उत्पाद की विशेषताओं और जोखिम को समझकर निवेश करने की सलाह देता है।

सोना दे सकता है पोर्टफोलियो को सहारा

महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोने को पोर्टफोलियो में विविधता लाने वाला विकल्प माना जाता है। World Gold Council की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में इस साल मजबूत बढ़त देखी गई है और निवेश मांग भी महत्वपूर्ण रही है। हालांकि, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है, इसलिए इसे पूरा निवेश केवल सोने में लगाना उचित नहीं माना जाता।

भौतिक सोने के अलावा Gold ETF जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। इनसे निवेशक को सोने की कीमतों में भागीदारी मिलती है, लेकिन बाजार जोखिम और संबंधित शुल्क को समझना जरूरी है।

लंबी अवधि के लिए इक्विटी पर नजर

लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड महंगाई को मात देने की क्षमता रखने वाले विकल्पों में शामिल हैं। हालांकि, इनके रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और बाजार में तेज उतार-चढ़ाव संभव है।

नियमित निवेश के लिए SIP एक उपयोगी तरीका हो सकता है। इसमें एक निश्चित राशि नियमित अंतराल पर निवेश की जाती है। SEBI के निवेशक शिक्षा संसाधनों के अनुसार, SIP नियमित निवेश की आदत बनाने और लंबे समय में पूंजी निर्माण के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा सकता है।


Smart Investment के लिए अपनाएं यह तरीका

निवेश विकल्पकिसके लिए उपयोगीमुख्य जोखिम
सोना/Gold ETFविविधता और अनिश्चितता से बचावकीमतों में उतार-चढ़ाव
इक्विटी/SIPलंबी अवधि के लक्ष्यबाजार जोखिम
FD/छोटी बचतस्थिरता और निकट अवधि के लक्ष्यवास्तविक रिटर्न पर महंगाई का असर
डेट फंडपोर्टफोलियो में आय साधनब्याज दर और क्रेडिट जोखिम
REITरियल एस्टेट में अप्रत्यक्ष निवेशबाजार और ब्याज दर जोखिम

FD और सुरक्षित विकल्पों की भूमिका भी जरूरी

महंगाई के दौरान केवल ऊंचे रिटर्न की तलाश करना भी जोखिमपूर्ण हो सकता है। आपातकालीन जरूरतों और निकट अवधि के लक्ष्यों के लिए FD तथा अन्य अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले साधनों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए Senior Citizens' Savings Scheme यानी SCSS भी एक विकल्प है। सरकार की ओर से छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। इसलिए निवेश करने से पहले मौजूदा ब्याज दर, कर नियम और योजना की शर्तें जरूर जांचनी चाहिए।

REIT और अन्य विकल्पों से बढ़ाएं विविधता

REITs के जरिए निवेशक रियल एस्टेट से जुड़ी परिसंपत्तियों में अप्रत्यक्ष भागीदारी ले सकते हैं। इसी तरह बॉन्ड, डेट फंड और अन्य परिसंपत्तियां पोर्टफोलियो में विविधता बढ़ा सकती हैं। लेकिन हर विकल्प का जोखिम अलग है। डेट फंड को भी पूरी तरह जोखिम-मुक्त समझना सही नहीं है।

विदेशी परिसंपत्तियों में निवेश करने वाले विकल्प पोर्टफोलियो को भौगोलिक विविधता दे सकते हैं, लेकिन इनमें मुद्रा विनिमय, विदेशी बाजार और नियामकीय जोखिम जुड़े होते हैं। इसलिए ऐसे निवेश को भी कुल पोर्टफोलियो के संदर्भ में देखना चाहिए।

निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान

सबसे पहले 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर आपातकालीन फंड रखने पर विचार करें। इसके बाद निवेश को अलग-अलग परिसंपत्तियों में बांटें। निवेश की अवधि छोटी है तो अत्यधिक जोखिम वाले विकल्पों से बचना बेहतर हो सकता है, जबकि लंबी अवधि के लक्ष्यों में बाजार-आधारित निवेश की भूमिका बढ़ सकती है।

SEBI के अनुसार, निवेश का फैसला वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर होना चाहिए। बाजार से जुड़े निवेश में पिछले प्रदर्शन को भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता। जरूरत पड़ने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार की मदद ली जा सकती है।

संतुलित और विविधीकृत पोर्टफोलियो बनाएं

बहरहाल,महंगाई के दौर में बेहतर रणनीति किसी एक निवेश विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित और विविधीकृत पोर्टफोलियो बनाना है। सोना सुरक्षा और विविधता दे सकता है, इक्विटी लंबी अवधि में पूंजी निर्माण का अवसर देती है, जबकि FD और छोटी बचत योजनाएं स्थिरता प्रदान कर सकती हैं। सही अनुपात व्यक्ति की आय, उम्र, लक्ष्य और जोखिम क्षमता पर निर्भर करेगा।