कर्नाटक की निशानेबाज मेघना सज्जनार ने नई दिल्ली में चल रही एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप (Asian Shooting Championship 2026) में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में एक व्यक्तिगत कांस्य और टीम स्वर्ण पदक जीता। आठ महीने की गर्भवती मेघना ने रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपने शानदार प्रदर्शन से भारतीय खेल जगत के साथ समाज को भी सोच के स्तर पर एक नया आयाम दिया है।
कर्नाटक की वरिष्ठ निशानेबाज Meghna Sajjanar ने रविवार को राजधानी में जारी एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप (Asian Shooting Championship 2026) में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में व्यक्तिगत कांस्य पदक और टीम स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 32 वर्षीय मेघना आठ महीने की गर्भवती हैं और उन्होंने यह उपलब्धि हासिल कर भारतीय खेल जगत में महिलाओं की हिस्सेदारी का एक सुनहरा अध्याय लिखा है।
व्यक्तिगत स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में मेघना ने पांचवें स्थान पर रहते हुए 628.6 का स्कोर किया और फाइनल में 229.5 के स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। टीम स्पर्धा में उन्होंने एलावेनिल वलारिवन और आर्या बोर्से के साथ मिलकर महिला 10 मीटर एयर राइफल के फाइनल में 1892.6 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता।
कंप्यूटर साइंस इंजीनियर मेघना ने 2008 में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शुरुआत की थी। 12 साल की उम्र में भाई मानस सज्जनार को शूटिंग रेंज में देखकर उन्हें इस खेल से प्यार हो गया। 2012 जूनियर चैंपियनशिप में उन्होंने बिना किसी कोच के सीनियर्स की मदद से तैयारी कर रजत और कांस्य पदक जीते। करियर में आगे चलकर उन्होंने बेंगलुरु के पादुकोण रैपिड स्पोर्ट्स सेंटर में कोच राकेश मानपत के साथ प्रशिक्षण लेना शुरु किया, जिन्हें वे अपनी सफलता का श्रेय देती हैं। मेघना के करियर की प्रमुख उप्लब्धियां इस प्रकार हैं-
- दिसंबर 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक
- नीदरलैंड के इंटरशूट में तीन व्यक्तिगत और एक टीम स्वर्ण पदक
- 2017 में गबाला विश्व कप में चौथा स्थान
- 2022 काहिरा विश्व चैंपियनशिप में टीम कांस्य पदक
- 2026 एशियाई चैंपियनशिप में व्यक्तिगत कांस्य और टीम स्वर्ण
टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी सेरेना विलियम्स मेघना के लिए प्रेरणा का स्रोत रही हैं। सेरेना ने 2017 में ऑस्ट्रेलियन ओपन आठ सप्ताह की गर्भवती होने के बावजूद जीता था। मेघना बताती हैं कि उनकी किताब पढ़कर उनकी कहानी से वे प्रेरित हुईं और सोचा कि अगर सेरेना टेनिस खेल सकती हैं तो शूटिंग क्यों नहीं? टेनिस शूटिंग की तुलना में बहुत अधिक शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण खेल है। मेघना का मानना है कि गर्भावस्था जीवन का हिस्सा है, यह कोई बीमारी या विकलांगता नहीं है।
पिछले साल निंगबो में उन्होंने अपना पहला विश्व कप पदक जीता था जब वह पांच महीने की गर्भवती थीं। जीत के बाद दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने टूर्नामेंट का एक खूबसूरत पल साझा करते हुए बताया कि क्वालिफिकेशन राउंड के दौरान जब वे नर्वस थीं तब गर्भस्थ बच्चा भी हलचल करने लगा। उन्होंने धीरे-धीरे शांत होने की कोशिश की तो बच्चा भी शांत होने लगा। इस प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए वे बच्चे से बात करती रहीं और इसने उन्हें भी फोकस बरकरार रखने में मदद मिली, जो एक अलग एहसास था। उनकी कुछ बातें भारतीय समाज और खेल जगत से कुछ अनकहे सवाल भी पूछती हैं। बतौर मेघना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमने देखा है कि महिलाएं गर्भावस्था के दौरान ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करती हैं। लेकिन भारत में अभी भी यह धारणा है कि गर्भवती महिलाएं खेलों में भाग नहीं लेतीं और उनसे इस दौरान ब्रेक लेने की उम्मीद की जाती है।
मेघना की इस बात की पुष्टि खेल इतिहास से होती है। Olympics के इतिहास में कई गर्भवती महिलाओं ने प्रतिस्पर्धा की है। 1952 में अमेरिकी डाइवर जूनो स्टोवर-इरविन ने साढ़े तीन महीने की गर्भावस्था में कांस्य पदक जीता, 2012 में मलेशिया की नूर सूर्यानी बिंती मोहम्मद तैबी ने आठ महीने की गर्भावस्था में शूटिंग में भाग लिया, और 2024 पेरिस ओलंपिक में मिस्र की फेंसर नाडा हाफेज ने सात महीने की गर्भावस्था में प्रतिस्पर्धा की। हालांकि, भारत में निकट भविष्य में इस तरह के उदाहरण दुर्लभ हैं। 1989 में धावक शाइनी अब्राहम गर्भवती रहते हुए 800 मीटर दौड़ में दूसरे स्थान पर आई थीं, उसके बाद मेघना की यह उपलब्धि भारतीय खेलों में एक नई लीक की शुरुआत का प्रतीक है।