
Neha Bora AISA President: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान भूख हड़ताल करने पर चर्चाओं में आई नेहा बोरा इन दिनों राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ इंडिया गठबंधन के मार्च के दौरान नेहा बोरा साथ नजर आई थी। यह पहली बार नहीं है, जब नेहा बोरा राहुल गांधी के साथ नजर आई थी। सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान भूख हड़ताल खत्म होने के बाद नेहा बोरा ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी। नेहा बोरा और उनके साथियों ने 25 जुलाई को राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। राहुल गांधी द्वारा नेहा बोरा को लगातार तवज्जो देने के बाद सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या नेहा बोरा कांग्रेस में शामिल होंगी? इसके अलावा एक अटकल यह भी लगाई जा रही है क्या वह पार्टी में कन्हैया कुमार की जगह ले सकती हैं?
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पीएचडी शोधार्थी की छात्रा हैं। उत्तराखंड में पली-बढ़ीं नेहा ने दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई की और छात्र आंदोलनों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठने के बाद नेहा बोरा चर्चा में आईं। इसके बाद बेरोजगारी, छात्र अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर उनके भाषणों को सोशल मीडिया पर व्यापक ध्यान मिला। सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के खिलाफ बयान काफी वायरल है। इसके अलावा वह छात्रों और आम जन के मुद्दें भी उठाती हुई नजर आती है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव किया है। दरअसल, इस समय राहुल गांधी जेन-जी और महिला वोटरों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस सांसद लगातार छात्रों और महिलाओं के मुद्दों को उठा रहे हैं। जेन-जी से जुड़ने के लिए राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भारी संख्या में छात्र इकट्ठा होते है।
राहुल गांधी द्वारा नेहा बोरा को आगे करने की एक वजह यह भी है कि वह तेज तर्रा हैं, अच्छी वक्ता हैं, जुझारू है और बेहद मुखर है। मोदी सरकार के खिलाफ अपनी बात को बेबाकी से रखती है। इसी बीच उन्होंने अपने तौर-तरीकों से हर किसी को हैरान किया है।नेहा बोरा AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जो कि CPI-ML का छात्र संगठन है। इंडिया गठबंधन में CPI-ML सहयोगी दल है। एक वजह यह भी है कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी सभी विपक्षी दलों को एक साथ लाना चाहते हैं।
वहीं नेहा बोरा की पहचान छात्र अधिकारों, परीक्षा संबंधी विवादों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आंदोलन करने वाली नेता की है। कांग्रेस के लिए ऐसे नेताओं के साथ मंच साझा करना युवाओं की समस्याओं को व्यापक विपक्षी विमर्श से जोड़ने का एक तरीका हो सकता है।
बता दें कि कांग्रेस के पास अपना छात्र संगठन NSUI और युवा संगठन यूथ कांग्रेस है। इसके बाद भी वामपंथी छात्र राजनीति से उभरे कुछ नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी पहचान बनाई है। जिसमें कन्हैया कुमार का नाम भी शामिल है। कन्हैया इस समय कांग्रेस में है।
नेहा की लोकप्रियता और आंदोलनकारी छवि के बीच कांग्रेस नेतृत्व की नजदीकी इस बहस को फिर सामने लाती है कि पार्टी अपने भीतर ऐसे नए चेहरे कितनी प्रभावी तरह तैयार कर पा रही है।
राहुल गांधी द्वारा तवज्जो देने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है क्या कन्हैया कुमार की जगह नेहा बोरा लेगी। क्योंकि दोनों की पहचान छात्र राजनीति से है। इसके अलावा दोनों की विचारधारा भी वामपंथी से जुडी हुई है। दोनों ही नेताओं ने विश्वविद्यालय परिसर से बाहर निकलकर राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई है।
कन्हैया जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से अध्यक्ष रह चुके हैं और अब CPI से कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। फिलहाल पार्टी के छात्र संगठन NSUI के प्रभारी हैं।
माना जा रहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में मिली हार के बाद कन्हैया कुमार से राहुल गांधी नाराज चल रहे हैं। ऐसे में अटकलें लगाई जा रहा है कि यदि नेहा बोरा कांग्रेस में शामिल होती है तो कन्हैया कुमार को साइडलाइन किया जा सकता है। हालांकि अभी तक इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नेहा को कन्हैया के विकल्प के तौर पर तैयार किया जा रहा है। राहुल गांधी के साथ उनकी नजदीकी से यह सवाल जरूर उठा है, लेकिन राजनीतिक समानता और संगठनात्मक उत्तराधिकार दो अलग बातें हैं।