
जयपुर एयरपोर्ट पर खड़ा विमान (फोटो पत्रिका)
Jaipur Flight Emergency Landing : जयपुर। जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट AI 2030 की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उड़ान के दौरान विमान में बम होने या हाईजैक की आशंका जताई गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को अलर्ट किया गया। दिल्ली में एहतियाती सुरक्षा प्रोटोकॉल और नजदीकी सुरक्षित रनवे को ध्यान में रखते हुए विमान को जयपुर डायवर्ट किया गया। इसके बाद जयपुर एयरपोर्ट पर विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।
एविएशन (हवाई यात्रा) की दुनिया में इस्तेमाल होने वाला 'स्क्वॉक' शब्द असल में फ्लाइट क्रू द्वारा चुने गए ट्रांसपोंडर कोड के लिए उपयोग में लाया जाता है। स्क्वॉक कोड चार अंकों का एक खास नंबर होता है, जिसे एयरक्राफ्ट के ट्रांसपोंडर में दर्ज किया जाता है। इस कोड को तैयार करने में 0 से 7 तक के अंकों का इस्तेमाल होता है, जिनकी मदद से कुल 4,096 अलग-अलग कॉम्बिनेशन (संयोजन) बनाए जा सकते हैं। एयर नेविगेशन की सुरक्षा के लिए यूरोपीय संगठन 'यूरोकंट्रोल' के अनुसार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) इन कोड का उपयोग एयरक्राफ्ट की पहचान करने और उसे ट्रैक करने के लिए करता है। एयरक्राफ्ट का ट्रांसपोंडर रडार को वापस सिग्नल भेजता है, जिसकी मदद से एयर ट्रैफिक कंट्रोलर विमान की पहचान कर उसे आसानी से ट्रैक कर पाते हैं। ATC सिस्टम पर यह स्क्वॉक कोड हर एयरक्राफ्ट के लिए एक यूनिक पहचान नंबर की तरह काम करता है।
फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म फ्लाइटरडार24 के अनुसार, स्क्वॉक 7500 का अर्थ 'गैरकानूनी हस्तक्षेप' है। यह शब्द आमतौर पर विमान हाईजैक से जुड़ा होता है। इंटरनेशनल नागरिक उड्डयन संगठन भी इस कोड का इस्तेमाल एयर ट्रैफिक कंट्रोल को यह संकेत देने के लिए करता है कि विमान गैरकानूनी हस्तक्षेप का सामना कर सकता है। यह कोड चालक दल को रेडियो पर स्थिति की खुलकर घोषणा किए बिना संबंधित अधिकारियों को सतर्क करने का एक गोपनीय तरीका उपलब्ध कराता है।
यूरोकंट्रोल के दिशानिर्देशों के अनुसार, विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले तीन प्रमुख आपातकालीन कोड हैं
जब किसी विमान का ट्रांसपोंडर 7500 कोड प्रसारित करता है, तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल और विमानन अधिकारी इसे गंभीर संकेत मानते हैं। इसके बाद अधिकारी विमान की पहचान कर उचित कार्रवाई के लिए समन्वय कर सकते हैं। इस दौरान विमानन और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया जा सकता है। विमान की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जाती है, उसे प्राथमिकता के आधार पर संचालन की सुविधा दी जा सकती है और गंतव्य या डायवर्ट किए जाने वाले एयरपोर्ट के साथ तालमेल बिठाया जा सकता है। इमरजेंसी कर्मियों को भी तैयार रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर सैन्य विमानों को रोकने या सुरक्षा के लिए साथ उड़ान भरने के लिए भेजा जा सकता है। इसी कारण 7500 कोड सामने आने पर लड़ाकू विमानों को भी रवाना किया जा सकता है।
फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI-2030 के जयपुर डायवर्ट होने के बाद Squawk 7500 कोड चर्चा में आ गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विमान में बम होने की अफवाह और हाईजैक की आशंका से हड़कंप मच गया। विमान में संदिग्ध होने और हाईजैक थ्रेट की बात भी सामने आई। यह भी बताया जा रहा है कि पायलट द्वारा पैनिक में 'हाईजैक बटन' दबा दिया हो सकता है। हालांकि, इन संभावनाओं की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
Updated on:
14 Oct 2026 12:48 pm
Published on:
14 Oct 2026 12:45 pm
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