भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जनजातीय आबादी वाले ग्रामों के एकीकृत विकास के लिए बुनियादी सेवाओं एवं सुविधाओं में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत संसाधनों के द्वारा ग्रामों के रूप में विकसित करने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता से 'प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना शुरू की है। आबादी वाले जनजातीय ग्रामों में एकीकृत समाजिक, आर्थिक विकास करना है। चयनित ग्रामों में प्राथमिकता क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण, पेयजल एवं स्वच्छता, शिक्षा, सडक, दूरसंचार एवं मोबाईल कनेक्टिविटी में नवीन अधोसंरचना विकास उपलब्ध अधोसंरचनाओं में विस्तार किया जाना है। इसके लिए ग्राम विकास योजना में कौशल विकास योजनाऐं, सामुदायिक वन विकास, वन धन कार्यक्रम एवं वनों से उदगमित बारहमासी नदियों एवं जल स्रोतों के संरक्षण की योजनाओं पर काम किया जाना है।
कई माह से चल रही पहल, बैठक तक ही समिति औपचारिकता
कटनी. आदिवासियों के उत्थान के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन ग्राम पंचायतों की मनमानी, जनपद व जिला स्तर के अधिकारियों की बेपरवाही के कारण महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ उनतक समय से नहीं पहुंच पा रहा। कई गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और उनका जीवन स्तर आजतक नहीं उठ पाया। जिले के ७६ गांवों में सर्वाधिक संख्या के साथ बसने वाले आदिवासियों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए वहां पर विशेष योजनाओं पर काम होना है। २०२३ से सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना शुरू की गई है। आपको जानकर ताज्जूब होगा कि लगातार बैठक व समीक्षा की जा रही है, लेकिन अबतक सिर्फ ४१ गांवों से ही विलेज डेव्हलपमेंट प्लान आया है, जबकि ३५ लोगों ने अबतक शामिह ही नहीं किया।
भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जनजातीय आबादी वाले ग्रामों के एकीकृत विकास के लिए बुनियादी सेवाओं एवं सुविधाओं में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत संसाधनों के द्वारा ग्रामों के रूप में विकसित करने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता से 'प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना शुरू की है। आबादी वाले जनजातीय ग्रामों में एकीकृत समाजिक, आर्थिक विकास करना है। चयनित ग्रामों में प्राथमिकता क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण, पेयजल एवं स्वच्छता, शिक्षा, सडक, दूरसंचार एवं मोबाईल कनेक्टिविटी में नवीन अधोसंरचना विकास उपलब्ध अधोसंरचनाओं में विस्तार किया जाना है। इसके लिए ग्राम विकास योजना में कौशल विकास योजनाऐं, सामुदायिक वन विकास, वन धन कार्यक्रम एवं वनों से उदगमित बारहमासी नदियों एवं जल स्रोतों के संरक्षण की योजनाओं पर काम किया जाना है।
इन बिंदुओं पर होना है काम- प्रधानमंत्री आदिवासी आदर्श ग्राम योजना के तहत पहले फेज में १० बिंदुओं पर काम होना है। यहां पर सुव्यवस्थित आंगनवाड़ी, उचित मूल्य की दुकान, स्कूल, टेलीकॉम कनेक्टिविटी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल सुविधा, सड़क, ड्रेनेज एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कौशल विकास, सामुदायिक वन विकास, वन धन योजना एवं जल संसाधनों का संरक्षण आदि पर काम किया जाना है।
इन गांवों में होना है काम-
बड़वारा ब्लॉक के १० गांव योजना में शामिल हैं। इसमें सुतरी, बड़गांव, उमरिया, बरमानी, मिड़रा, बंजर बरेला, बरगवां, पथवारी, बनेहरा, मिढ़की, भादावर, भगनवारा, गब्दी निपनिया, बगदरा, सेझा गांव शामिल हैं। बहोरीबंद ब्लॉक के गौरहा, सलैया खुर्द, बरही, पटीकला, खड़रा, कछारगांव, झुरही, डोगरिया, हरद्वारा, धनवाही, किवलरहा, विजयराघवगढ़ के बम्होरी, मझगवां, बरहटी, धौरा, चोरा कनेरा, सलैया पहरहाई, घुघरी, कर्रेहा, नड़ेरी, पड़रेही, जमुआनी खुर्द शामिल हैं।
ढीमरखेड़ा ब्लॉक के सर्वाधिक गांव- इसी प्रकार ढीमरखेड़ा ब्लॉक के सर्वाधिक गांव शामिल किए गए हैं। इसमें कोठी, बिचुआ, हलका, धूली, सैलारपुर, दादर सिहुंड़ी, दिवासी, जिर्री, मढ़ाना, कटरा, सगौना, डिहरी, बसेहड़ा, कुदवारी, चपोहला, कनौजा, सिंघनपुरी, कुदरा, भनुपराकला, सहलावन, हर्रई, सलैया, सरई, बिजइयां, बिजौरी, खंदवारा गांव शामिल हैं। इसी प्रकार कटनी ब्लॉक के खमतरा, पिपरहटा, ठरका व रीठी ब्लॉक के बूढ़ा, घुड़हर, चिरुहला, बसुधा, चरगवां, जालासुर, नौआपट्टी गांव शामिल हैं।
योजना को लेकर खास-खास
२०११ में हुई जनगणना के आधार पर ५०० से अधिक व ५० प्रतिशत से अधिक आबादी वाले गांव किए गए हैं शामिल।
भारत सरकार द्वारा इस योजना में कुल ७३०७ गांव किए गए हैं, शामिल जिसमें कटनी के ७६ गांव हैं शामिल।
२०.३८ लाख रुपए से इस योजना में प्रतिग्राम निर्धारित की गई है, राशि, कराया जाना है विकास कार्य।
ठ्जिला स्तरीय समिति में कलेक्टर, जिपं सीइओ, परियोजना अधिकारी होंगे अध्यक्ष, सदस्य भी किए जाने हैं शामिल।
७३ गांवों में से मात्र ४१ की ही तैयार हो पाई है वीडीपी, ३५ ग्राम पंचायतों ने अबतक नहीं दिया ध्यान।
जनपद स्तर पर ग्राम पंचायत से विलेज डेव्हलपमेंट प्लान मंगाया गया है। विभाग में ७६ गांव में से ४१ के प्लान आ चुके हैं। शायद शेष प्लान जिला पंचायत में जमा हो गए हैं, उनका पता लगाया जा रहा है। शीघ्र ही प्लान बनाकर मुख्यालय भेजा जाएगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी। कुछ दिनों पहले अपर संचालक द्वारा भी निरीक्षण किया गया है। अगले सप्ताह योजना को लेकर बैठक लेते हुए योजना को गति दी जाएगी।
पूजा द्विवेदी, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग।