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जासूसी और जादुई सफेद मुर्गा बच्चों की कहानियां

मुर्गे और दो बच्चों के चित्र को देखकर नन्हें पाठकों ने अपनी रचनात्मकता का उदाहरण पेश किया है। bइन सभी नन्हें पाठकों को बधाई। आप अपनी रचनात्मकता को हमेशा निखारते रहे। पत्रिका का परिवार परिशिष्ट इसमें आपका सहयोग करता रहेगा।

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Jun 03, 2026
मुर्गे और दो बच्चों के चित्र को देखकर नन्हें पाठकों ने अपनी रचनात्मकता का उदाहरण पेश किया है।
मुर्गे और दो बच्चों के चित्र को देखकर नन्हें पाठकों ने अपनी रचनात्मकता का उदाहरण पेश किया है।

चित्र देखो कहानी लिखो-80

इस बार हमें 50 से ज्यादा बच्चों की कहानियां मिली। इनमें से चुनी हुई कहानियों को हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं। मुर्गे और दो बच्चों के चित्र को देखकर नन्हें पाठकों ने अपनी रचनात्मकता का उदाहरण पेश किया है। इन सभी नन्हें पाठकों को बधाई। आप अपनी रचनात्मकता को हमेशा निखारते रहे। पत्रिका का परिवार परिशिष्ट इसमें आपका सहयोग करता रहेगा।

चीकू का जादूई दाना
कान्हा माहेश्वरी, 7 वर्ष

रिया के पास एक चमकीली टोकरी थी। गांव के लोग कहते थे कि उस टोकरी के दाने जो भी खाता है, वह खुश हो जाता है। चिंटू व रिया पहाड़ों की सैर कर रहे थे तभी उन्हें एक भूखी मुर्गी मिली। रिया ने अपनी टोकरी से दाने जमीन पर गिरा दिए। जैसे ही मुर्गी ने दाने खाए, रिया खुशी से उछलने लगी और चिंटू के सामने आकर खड़ी हो गई। चिंटू ने अपनी छड़ी उठाकर उसे सलामी दी।

गोलू और नए दोस्त
नमन सखरानी, 11 वर्ष
गर्मी की छुट्टियों में गोलू अपने नानी के गांव आया था। गांव में हरियाली, पहाड़ और खुली हवा देखकर उसका मन खुश हो गया। एक दिन वो टोपी पहनकर, कंधे पर बैग टांगकर पहाड़ी पर घूमने निकल पड़ा। रास्ते में उसने देखा कि एक लड़की मुर्गी को दाना खिला रही थी। लड़की का नाम पिंकी था। गोलू ने दूर से हाथ हिलाकर हैलो कहा। पिंकी ने मुस्कुराकर उसे पास बुलाया और कहा— ये मुर्गी मेरी सबसे अच्छी दोस्त है, इसका नाम चंदा है। चंदा गोलू को देखकर कुकडूं-कूं करने लगी। गोलू को बड़ा मज़ा आया। पिंकी ने बताया कि चंदा रोज़ सुबह उसे जगाती है और उसके पीछे-पीछे खेत तक जाती है। गोलू ने अपने बैग से बिस्किट निकालकर चंदा को दिया। तब से तीनों दोस्त बन गए।

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दयालु बच्चे और भूखी मुर्गी
शाल्वी झंवर, 8 वर्ष
रवि और चिंकी की गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं। इसीलिए वे परिवार के साथ पहाड़ों पर घूमने जा रहे थे। रास्ते का स?र लंबा था, जिससे वे बहुत थक गए। थकान मिटाने के लिए वे पास के एक होटल में रुके। वहां उन्होंने कुछ खाया-पीया और विश्राम किया। तरोताजा होने के बाद वे फिर से कार में बैठ गए और अपनी मंजिल की ओर ब? चले। वहां पहुंचने पर चिंकी की न?र एक मुर्गी पर प?ी जो भूख से त?प रही थी। मुर्गी की यह हालत देखकर चिंकी का दिल पिघल गया और उसे उस पर बहुत दया आई। चिंकी ने तुरंत रवि से कहा कि वह अपने बैग में से अनाज के कुछ दाने निकाल दे। रवि ने ऐसा ही किया। फिर चिंकी और रवि ने ब?ी खुशी के साथ वे दाने भूखी मुर्गी के आगे डाल दिए। दाने खाकर मुर्गी की भूख शांत हुई और वह ?ुश हो गई। उन्हें देखकर रवि और चिंकी के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई। उस दिन दोनों बच्चों को एक बहुत ब?ी सीख मिली कि किसी भूखे जीव की मदद करना दुनिया की सबसे असली और सच्ची खुशी है।
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प्रकृति का प्यार
नित्या तिवारी, 7 वर्ष
एक गांव में रोहन और रोहिणी नाम के भाई-बहन रहते थे। दोनों मासूम और नेक दिल के थे। उनकी मां बहुत बीमार थी। वैद्य जी ने कहा कि अब कोई चमत्कार ही उन्हें ठीक कर सकता है। रोहन और रोहिणी उदास होने पर पे?-पौधे नदी आदि के पास बैठते। वह अपना हर दुख-सुख प्रकृति से बांटते थे। प्रकृति उनकी सच्ची दोस्त थी। एक रात मां की हालत देखकर दोनों रोते-रोते सो गए। सपने में प्रकृति देवी प्रकट हुईं। उन्होंने कहा— तुम मेरा बहुत ख्याल रखते हो। गांव से दूर जादुई जंगल है। वहां सच्चे दिल वालों की इच्छा पूरी होती है। अब कल अपनी मां के लिए संजीवनी बूटी ले आना। अगले दिन दोनों जंगल गए। वहां एक कमजोर, भूखा मुर्गा दिखा। रोहिणी ने अपनी जेब से कुछ दाने निकाले। मुर्गा पहले डरा, फिर प्यार देखकर दाने खा गया। दाना खाते ही उसमें जान आ गई। तभी चमत्कार हुआ। दया देखकर प्रकृति देवी प्रकट हुईं। उनके हाथ में जादुई बूटी थी। प्रकृति ने कहा— तुमने भूखे मुर्गे की मदद की। जो जीवों पर दया करता है, मैं उसकी मदद करती हूं। यह लो बूटी। बूटी पीते ही मां ठीक हो गईं और उन्हें गले लगा लिया। रोहन, रोहिणी और प्रकृति के प्यार ने मां की जान बचा ली।
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अनोखा मित्र
हैरी पॉटर, 10 वर्ष
पहाड़ के पास एक सुंदर सा गांव था। वहां पर आरव और रिया नाम के दो दोस्त रहते थे। आरव को स्काउट की तरह पहाड़ों में नई-नई जगह की खोज करना बहुत पसंद था। वह घर से निकलते समय अपने सिर पर पसंदीदा पीली टोपी और हाथ में एक मजबूत छड़ी लेकर साथ चलता था। वहीं रिया एक भोली और दयालु लड़की थी। वह पशु पक्षियों से बहुत प्रेम करती थी। एक दिन जब वह दोनों अपने गांव की पहाडय़िों में घूमने गए वहां उन्हें रास्ते में एक मुर्गा दिखाई दिया। वह मुर्गा बहुत ही गोल—मटोल और निडर था। रिया ने उसे देखते ही प्यार से उसका नाम भोलू रख दिया भोलू भी निडरता से उनके सामने आकर गर्दन हिलाने लगा, तो रिया ने उसकी थैली में से दाने निकालकर उसके आगे डाल दिए और वह उन्हें खाने लगा। आरव यह सब देखकर हैरान था और धूप से बचने के लिए उसने अपने सिर पर हाथ लगा रखा था और बहुत प्यार से उन्हें देख रहा था। आरव को भोलू का दोस्ताना अंदाज बहुत ही अच्छा लगा। कुछ ही देर में आरव रिया और भोलू अच्छे दोस्त बन गए। भोलू उन दोनों को पहाड़ों की एक सुंदर सी फूलों की घाटी पर ले गया। इसके बारे गांव में कोई नहीं जानता। इस तरह एक छोटे से जीव ने उन्हें प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार दिया।
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साहसी मुर्गी
स्वाति अग्रवाल, 12 वर्ष
एक गांव में राहुल और रानी नाम के दो बच्चे रहते थे। एक दिन वे दोनों खेतों की ओर घूमने गए। रास्ते में उन्हें एक सफेद मुर्गी दिखाई दी। रानी ने अपने हाथ से मुर्गी को दाने खिलाने शुरू किए। मुर्गी खुशी से दाने चुगने लगी। तभी वहां एक बिल्ली आ गई। बिल्ली मुर्गी को पकडऩा चाहती थी। मुर्गी बहुत चालाक थी। उसने जोर-जोर से अपने पंख फडफ़ड़ाने शुरू किए और इधर-उधर भागने लगी। बिल्ली उसका पीछा करने लगी। इसी बीच मुर्गी धीरे-से अपने चूजों को झाडय़िों में छिपा आई। राहुल और रानी यह सब देख रहे थे। राहुल ने एक लकड़ी उठाकर बिल्ली को डराया। बिल्ली डरकर वहा से भाग गई। अब मुर्गी और उसके चूजे सुरक्षित थे।
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लालची बच्चे
हर्षवी व्यास, 10 वर्ष
एक बार एक लड़की थी उसका नाम हरशु था और एक लड़का था जिसका नाम अभिषेक था, वह दोनों हर रोज एक मुर्गी को खाना खिलाने के लिए जाते थे। फिर एक दिन मुर्गी ने सोने का अंडा दिया। वह दोनों उसे चुपचाप चुरा कर ले गए। मुर्गी ने उन्हें श्राप दिया कि वह कभी भी अच्छा खाना नहीं खा पाएंगे, फिर वह भिखारी बनकर रोने लगे।
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भूखी मुर्गी
एक दिन मोनू और चिंकी पिकनिक मनाने के लिए जंगल गए। जंगल में उन्हें एक मुर्गी दिखाई दी, जो बहुत भूखी और प्यासी थी। मुर्गी को भूखा देखकर चिंकी को मम्मी की कही बातें याद आ गईं कि हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए तथा भूखे और प्यासे को खाना खिलाना चाहिए। चिंकी ने अपनी जेब से चना निकालकर मुर्गी को खिलाया। चना खाकर मुर्गी का पेट भर गया और वह बहुत खुश हो गई। इतने में मोनू बोला— मेरे पापा भी कहते हैं कि हमें जानवरों और पक्षियों के प्रति प्रेम और सद्भावना रखनी चाहिए।
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मुर्गी और दो बच्चे
कपिल गुर्जर, 12 वर्ष
एक दिन एक लड़का और एक लड़की घूमने के लिए पहाड़ी पर गए। उनके पास खाने के लिए कुछ दाने थे। तभी उन्हें एक सफेद मुर्गी दिखाई दी।
लड़की ने प्यार से मुर्गी को दाने खिलाने शुरू कर दिए। मुर्गी खुशी-खुशी दाने चुगने लगी। लड़का यह सब देखकर मुस्कुरा रहा था। मुर्गी ने दाने खाकर बच्चों का धन्यवाद किया। बच्चों को बहुत खुशी हुई कि उन्होंने एक भूखे जीव की मदद की।

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भाई बहन और शैतान मुर्गी
हनी सोनी, 10 वर्ष
हनी और धीरेन भाई—बहन थे। दोनों एक जंगल में जाते हैं। जंगल में खेलते हुए उन्हें एक मुर्गी दिखती है। दोनों खेल खेलने लगते हैं कि मुर्गी को कौन खाना खिलाता है। दोनों को खेल—खेल में समय का पता ही नहीं चला। मुर्गी अपने रास्ते चल दी और दोनों अपने घर।
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लालची रोहन और जादुई मुर्गी
याशिका धनावत, 7 साल
रोहन और उसकी बहन घूमने गए। रास्ते में उनको एक मुर्गी दिखाई दी। दोनों उसके पास जाते हैं तो मुर्गी उनसे कहती है कि वो जादुई मुर्गी है। रोहन कहता है— अगर तुम जादुई मुर्गी हो तो साबित करो। मुर्गी रोहन को कुछ मांगने को कहती है, तब रोहन एक खिलौना मांगता है। उसके सामने खिलौना आ जाता है। ये सब देखने के बाद दोनों मुर्गी को घर ले आते हैं। प्रतिदिन रोहन उससे कुछ न कुछ मांगता रहता। रोहन को बहन मुर्गी से बोलती है कि मेरे पास एक तरकीब है, जिससे रोहन का लालच छूट जाएगा। एक दिन रोहन मुर्गी से कुछ मांगता है और मुर्गी उसे कुछ नहीं देती। ऐसा लगातार होने के बाद रोहन को समझ आ जाता है कि ये सब उसके लालच के कारण हुआ। उसे अपनी गलती का अहसास होता है।

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चीकू और पिंकी की अनोखी खोज
शौर्यवर्धन सिंह राठौड़, 7 वर्ष
एक सुंदर पहाड़ी गांव में चीकू और पिंकी नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। चीकू को पहाड़ों में घूमना और नई जगहों की खोज करना बहुत पसंद था, इसलिए वह हमेशा एक खोजी की पोशाक पहनकर और हाथ में एक मजबूत लाठी लेकर निकलता था। वहीं पिंकी स्वभाव से बहुत दयालु थी और उसे जीव-जंतुओं से गहरा लगाव था। दोनों दोस्त गांव के पास वाले हरे-भरे मैदान की तरफ सैर करने निकले। तभी उन्हें झाडय़िों के पीछे से एक अनोखी आवाज सुनाई दी। जब वे करीब गए, तो उन्होंने देखा कि वहां एक बहुत ही सुंदर, सफेद रंग की मुर्गी खड़ी थी। उस मुर्गी की कलगी लाल और चमकदार थी। वह दोनों को देखकर बिल्कुल भी डरी नहीं, बल्कि अपनी मीठी आवाज में कुछ कहने की कोशिश कर रही थी।
पिंकी ने अपनी टोकरी से कुछ सुनहरे दाने निकाले और प्यार से मुर्गी के आगे डाल दिए। मुर्गी ने बड़े चाव से दाने चुगने शुरू कर दिए और खुशी से अपने पंख फडफ़ड़ाने लगी। चीकू और पिंकी समझ गए कि यह बेजुबान पक्षी रास्ता भटक गया है। दोनों ने मिलकर तय किया कि वे इस प्यारी मुर्गी को सुरक्षित उसके घर पहुंचाएंगे। इस तरह एक नई दोस्ती की शुरुआत हुई और उनका वह दिन एक यादगार और मजेदार साहसिक यात्रा में बदल गया।
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नई दोस्त
चारवी मेहरा, 11 वर्ष
रियांश और अवधि जंगल कैम्प में जाते हैं, तभी उन्हें एक मुर्गी दिखी। उन्हें ऐसा लगा जैसे उसे मुर्गी को जोरों से भूख लग रही है, तो उनके पास जो दाने थे उन्होंने उसे खिला दिए। वह जितने दिन वहां रुके, वह रोज आती दाने खाती और चली जाती। कुछ दिन ऐसे ही बीते फिर जब उनकी जाने की बारी आई, तो मुर्गी बहुत दुखी हुई।
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अनोखी दोस्ती
गुर्वंश मेहरा, 10 वर्ष
रोहन गर्मियों की छुट्टियों में नाना—नानी के घर गया। वहां उसे मोहिनी दिखाई, जो मुर्गी को दाना खिला रही थी। तब रोहन ने कहा— मुर्गी से दोस्ती और जोर-जोर से हंसने लगा तभी हवा से उसकी टोपी उड़ कर झाडय़िां में गिर गई। रोहन रोने लगा तभी मोहिनी की मुर्गी जाकर रोहन की टोपी लेकर आई। रोहन ने टोपी पहनी और बहुत खुश हो गया फिर रोहन ने मोहिनी से माफी मांगी और वह भी मुर्गी को दाना खिलाने लगा। रोहन और मोहिनी बहुत अच्छे दोस्त बन गए और मुर्गी को साथ रखने लगे।

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बात करने वाला मुर्गा
रूद्रप्रिया शुक्ला, 8 वर्ष
एक बार चिंकी और टिंकू जंगल घूमने गए। घूमते-घूमते उन्हें वहां आवाज सुनाई दी। दोनों झाडय़िों की ओर गए, उन्होंने वहां एक मुर्गे को देखा। मुर्गे ने उनसे कहा कि मुझे बड़ी जोर की भूख लगी है। चिंकी और टिंकू हैरान रह गए क्योंकि उन्होंने कभी किसी मुर्गे को बात करते हुए नहीं देखा था। चिंकी के पास कुछ मकई के दाने थे। उसने वह दाने मुर्गे को दे दिए। अब शाम होने लगी थी। चिंकी और टिंकू दोनों घर की ओर चलने लगे पर वे रास्ता भटक गए। तभी उन्हें वह मुर्गा फिर से मिल गया। मुर्गे ने उन्हें घर जाने का रास्ता बताया और वह दोनों खुशी-खुशी अपने घर चले गए।

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मुर्गे की समझदारी
योजित नागर, 9 वर्ष
एक दिन राहुल और रानी पहाड़ों की सैर पर निकले। राहुल ने टोपी पहनी थी और कंधे पर बैग टांगा था। रानी अपनी छोटी टोकरी लेकर साथ चल रही थी। रास्ते में उन्हें एक सफेद मुर्गा दिखाई दिया। मुर्गा बहुत सुंदर था और जोर-जोर से बांग दे रहा था।
अचानक राहुल ने देखा कि पास की झाडय़िों में एक लोमड़ी छिपी हुई थी। वह मुर्गे को पकडऩे की कोशिश कर रही थी। मुर्गा बच्चों को सावधान कर रहा था। राहुल ने तुरंत अपनी लाठी उठाई और जोर से जमीन पर पटकी। रानी ने भी जोर-जोर से आवाज लगाई। शोर सुनकर लोमड़ी डर गई और भाग गई। मुर्गा सुरक्षित बच गया। वह बच्चों के पास आकर शांत खड़ा हो गया, जैसे— उनका धन्यवाद कर रहा हो।

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बंटी, बबली और चीकू
अनय पांडे, 12 वर्ष
गांव में बंटी और बबली नाम के दो भाई-बहन रहते थे। बंटी को पहाड़ों पर घूमना बहुत पसंद था, इस लिए वह हमेशा कैप और डंडे के साथ घूमने को तैयार रहता था। वहीं बबली जानवरों और पक्षियों से बहुत प्यार थी। एक सुहावने मौसम में दोनों पहाड़ी की सैर पर निकले। बंटी हाथ से छांव बनाकर दूर के रास्तों को देख ही रहा था कि अचानक झाडय़िों से निकलकर एक सुंदर सफेद मुर्गा उनके सामने आ गया। उसके सिर पर लाल रंग की बड़ी ही खूबसूरत कलगी थी। वह थोड़ा घबराया हुआ लग रहा था।
बबली उसके पास गई उसे लगा कि मुर्गे को भूख लगी है। उसने मुस्कुराते हुए अपनी छोटी टोकरी से कुछ दाने निकाले और प्यार से हाथ आगे बढ़ाकर मुर्गे को खिलाने लगी। बंटी और बबली ने उसका नाम चीकू रखा। दाना खाने के बाद चीकू उन दोनों का दोस्त बन गया। शाम से पहले चीकू ने उन्हें वापस घर का सुरक्षित रास्ता भी दिखाया। उस दिन से बंटी बबली और चीकू की दोस्ती पूरे गांव में मशहूर हो गई।

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नेक काम का आनंद
अयान बेनीवाल, 8 वर्ष
एक दिन दो बच्चे खेलते-खेलते जंगल पहुंच गए। वहां उन्होंने देखा कि एक पक्षी मुसीबत में फंसा हुआ है। बच्चों ने बिना देर किए उसकी सहायता की। उन्होंने उसके पैरों से बंधी चीज हटाई और उसे सुरक्षित जगह पर बैठाया। थोड़ी देर बाद पक्षी उड़ गया। बच्चों के चेहरे खुशी से चमक उठे। उन्होंने महसूस किया कि दूसरों की मदद करने से सबसे अधिक आनंद मिलता है।
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नन्हे खोजी और जादुई मुर्गी
यतींद्र, 9 वर्ष
एक सुंदर पहाड़ी गांव में आर्यन और चुटकी नाम के दो भाई-बहन रहते थे। एक सुबह दोनों गांव के पास वाले घने जंगल में घूमने निकले। चलते-चलते उन्हें झाडय़िों के पीछे से एक अजीब सी चमक दिखाई दी। जब उन्होंने करीब जाकर देखा, तो वे हैरान रह गए। वहां एक विशाल, सफ़ेद रंग की मुर्गी ख?ी थी, जो साधारण मुर्गियों से बिल्कुल अलग थी। वह मुर्गी जमीन पर चोंच मारकर कुछ ढूंढ रही थी। जैसे ही आर्यन ने अपनी दूरबीन से देखा, उसे समझ आया कि यह कोई मामूली मुर्गी नहीं, बल्कि सुनहरे दाने खोजने वाली जादुई मुर्गी है। चुटकी खुशी से ताली बजाने लगी और मुर्गी के पास जाकर उससे दोस्ती करने की कोशिश करने लगी। मुर्गी भी बहुत दयालु थी। उसने बच्चों को डराने के बजाय अपनी गर्दन झुकाकर उनका स्वागत किया। आर्यन और चुटकी ने तय किया कि वे इस जादुई मुर्गी की रक्षा करेंगे और किसी को इसके बारे में नहीं बताएंगे। उस दिन से, वे रोज जंगल आते और अपनी नई दोस्त के साथ ढेर सारी मस्ती करते। इस मुलाकात ने उनके साधारण से जीवन को एक रोमांचक साहसिक यात्रा में बदल दिया था।
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दयालु बच्चे और मुर्गे की दोस्ती
अर्हम, 10 वर्ष
छुट्टियों में राहुल और उसकी छोटी बहन रानी गांव घूमने गए। दोनों खेतों और पहाड़ों को देखते हुए आगे बढ़ रहे थे। तभी उन्हें एक सफेद मुर्गा दिखाई दिया। मुर्गा बहुत सुंदर था और जोर-जोर से बांग दे रहा था। रानी को मुर्गा बहुत प्यारा लगा। वह धीरे-धीरे उसके पास गई और उसे दाना खिलाने लगी। मुर्गा भी डरने के बजाय उनके पास आ गया। राहुल दूर खड़े होकर यह दृश्य देख रहा था और मुस्कुरा रहा था। दोनों बच्चों ने मुर्गे के साथ खूब खेला। उन्होंने उसकी तस्वीरें भी खींचीं और उसे प्यार से सहलाया। कुछ देर बाद मुर्गा अपने दड़बे की ओर चला गया। राहुल और रानी भी खुशी-खुशी घर लौट आए। इस तरह दोनों बच्चों का दिन बहुत मजेदार और यादगार बन गया।
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नागरिकों में जागरूकता
आयुष विजय, 13 वर्ष
सन 2020 में एक बर्ड फ्लू नाम का वायरस बड़ी तेजी से फैल रहा था। इस वायरस के कारण कई पशु-पक्षियों की जान जा चुकी थी। एक गांव में दो भाई-बहन रहते थे, जिनका नाम राम और रिया था। वे दोनों पक्षियों का हित चाहते थे। इसलिए वे रोज अपने गांव के पक्षियों को अनाज में दवाइयां मिलाकर देते थे। इन दोनों भाई-बहन को देखकर गांव के सभी लोग प्रेरित हुए और पशु-पक्षियों का हित चाहने लगे।

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मुर्गी और बच्चे
पहल पारीक, उम्र 12
एक दिन राहुल और रीना घूमने गए। रास्ते में उन्हें एक सफेद मुर्गी दिखाई दी। रीना ने अपने हाथ से मुर्गी को दाने खिलाए। मुर्गी आराम से दाने खाने लगी। राहुल और रीना बहुत खुश हुए। राहुल ने कहा— हमें पशु-पक्षियों से प्यार करना चाहिए। दोनों बच्चों ने मुर्गी को पानी भी दिया। मुर्गी उनके आसपास घूमने लगी। कुछ देर बाद बच्चे अपने घर लौट गए। उन्होंने उस दिन सीखा कि जानवरों के साथ हमेशा प्यार और दया से व्यवहार करना चाहिए।
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समझदार लड़की
अनन्या, 9 वर्ष
एक लड़का मुर्गी को परेशान कर रहा था। तभी एक लड़की आई और बोली इनका जीवन नष्ट क्यों कर रहे हो। यह हमें अंडे देते हैं। अगर तुम इनका जीवन नष्ट कर दोगी तुम अंडे कहां से आएंगे।

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जादुई मुर्गी
आराध्या सिंह हाडा, 11 वर्ष
एक समय की बात है। दो बच्चे थे। एक का नाम चिया और दूसरे का नाम विशु था। वह दोनों गर्मी की छुट्टियों में पहाडय़िों पर घूमने गए। उन्हें बीच रास्ते पर एक मुर्गी दिखाई दी। वह बोली में भूखी हूं, मुझे कुछ खाने को दो। यह सुनकर विशु और चिया हैरान हो गए। उन दोनों ने पहली बार बोलने वाली मुर्गी देखी थी। चिया के पास एक ब्रेड का टुकड़ा था। उसने उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर मुर्गी को खिला दिया। मुर्गी उन ब्रेड के टुकड़ों को खाकर एक सुंदर सी परी बन गई। उसने दोनों बच्चों को धन्यवाद दिया और एक वरदान मांगने को कहा। दोनों बच्चों ने कहा कि हमें ऐसी दुनिया चाहिए जहां पर सब खुश हों और कोई दुखी ना हो। परी ने छड़ी घुमाई और उनकी इच्छा पूरी कर दी।

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जादुई मुर्गा और उसके दोस्त
दिवित शर्मा, 7 वर्ष
मोनू नाम का मुर्गा पहाडय़िों में रहता था। एक दिन वह टहलने निकला। उसे दो बच्चे मिले। उसने दोनों के नाम पूछे। यह सुनकर बच्चे हैरान हो गए कि मुर्गा बोल सकता है। फिर मोनू ने बताया कि एक साधु बाबा ने वरदान दिया है कि वो अच्छे बच्चों के साथ बात कर सकता है। यह सुनकर बच्चे बहुत खुश हो गए। उन्होंने अपना नाम गौरव और गौरी बताया। तीनों अच्छे दोस्त बन गए।

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पहाड़ी पर नया दोस्त
आरव कुमार, 12 वर्ष
छोटू और गुडय़िा दोनों भाई-बहन गर्मियों की छुट्टियों में नाना-नानी के गांव आए थे। नाना ने कहा— बच्चों, आज पहाड़ी पर घूमने चलोगे? छोटू तो तुरंत तैयार हो गया। उसने अपनी स्काउट वाली टोपी पहनी, कंधे पर बैग टांगा और हाथ में लाठी पकड़ ली। गुडय़िा ने भी गुलाबी फ्रॉक पहनी और अपनी पीली टोकरी में चिडय़िों के लिए दाने भर लिए। दोनों पहाड़ी की तरफ चढऩे लगे। तभी पीछे से कुकड़ू-कू की आवाज आई। मुड़कर देखा तो एक बड़ा सफेद मुर्गा उनके पास खड़ा था। शायद उसे भी भूख लगी थी। गुडय़िा ने टोकरी से थोड़े दाने निकाले और धीरे से मुर्गे की तरफ बढ़ाए। मुर्गा पहले डरा, फिर पास आया और चोंच मार-मारकर दाने खाने लगा।
छोटू हंसते हुए बोला— इसे भी हमारी कंपनी अच्छी लग रही है। शाम होने पर दोनों नीचे उतरे। घर आकर उन्होंने नानी को पूरी बात बताई। नानी ने कहा— तुमने आज न सिर्फ पहाड़ी देखी, बल्कि एक नया दोस्त भी बनाया।
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साहसी भाई-बहन और जादुई मुर्गा
प्रतिष्ठा सिंह पंवार, 7 वर्ष
कुश और सोनू भाई-बहन थे। उन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और प्रकृति को करीब से देखना बहुत पसंद था। एक रविवार के दिन दोनों ने पास के घने जंगल की सैर करने का फैसला किया। कुश ने अपने सिर पर खोजी टोपी पहनी, हाथ में एक मजबूत छड़ी ली और अपनी जासूसी दूरबीन लेकर निकल पड़ा। सोनू ने भी अपने बैग में खाने-पीने का कुछ सामान रख लिया। जंगल में रंग-बिरंगे फूल और सुंदर तितलियां देखते-देखते दोनों बहुत दूर निकल आए। जब शाम ढलने लगी, तो उन्हें अहसास हुआ कि वे एक अनजान जगह पर आ गए हैं और अपना रास्ता भूल चुके हैं। कुश ने अपना हाथ सिर पर रखकर दूर तक रास्ता खोजने की कोशिश की, लेकिन चारों तरफ सिर्फ पेड़ ही पेड़ थे। दोनों थोड़े घबरा गए। तभी झाडय़िों में से एक बड़ा और सुंदर सफेद मुर्गा बाहर आया। उसकी लाल कलगी चमक रही थी। सोनु ने बिना डरे अपने बैग से खाने के कुछ दाने निकाले और प्यार से उस मुर्गे के आगे डाल दिए। भूखे मुर्गे ने खुशी-खुशी दाने चुग लिए।
तभी एक चमत्कार हुआ! दाने खाने के बाद मुर्गे ने कुश और सोनु की तरफ देखा और अपनी गर्दन से एक पगडंडी की तरफ इशारा किया। वह आगे-आगे चलने लगा। कुश और सोनु समझ गए कि यह दयालु मुर्गा उन्हें रास्ता दिखा रहा है। मुर्गे के पीछे-पीछे चलकर वे जल्दी ही सुरक्षित अपने घर के बाहर पहुंच गए।

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मुर्गे ने की मदद
कृष्णा, 13 वर्ष
चिंटू ओर मिंकी बहुत अच्छे दोस्त थे। उन्होंने छुट्टी के दिन घूमने का प्लान बनाया और दोनों अपने बैग में कुछ खाने का सामान लेकर, पानी की बॉटल लेकर निकल गए। पहाड़ी रास्ता होने की वजह से दोनों दोस्त रास्ता भटक गए और परेशान हो गए तभी उन्हें रास्ते में एक मुर्गा दिखा। तभी मिंकी ने मुर्गे से मदद मांगी और मुर्गे ने भी खुशी से उन्हें सही रास्ता बताकर उनकी मदद की। दोनों दोस्तों ने मुर्गे को कुछ खाने को दिया और धन्यवाद भी किया।

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सफेद मुर्गे की कहानी
लविथ विजय, 10 वर्ष
एक दिन राहुल और उसकी बहन रीना घूमने गए। वहां उन्हें एक सफेद मुर्गा दिखाई दिया। रीना के हाथ में दाने थे। उसने प्यार से मुर्गे को दाने खिलाए। मुर्गा खुशी से दाने खाने लगा। तभी एक किसान वहां आया। उसने कहा कि यह मेरा मुर्गा है, जो रास्ता भटक गया था। किसान ने बच्चों को धन्यवाद दिया। राहुल और रीना बहुत खुश हुए और घर लौट गए। इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें जानवरों और पक्षियों के साथ दया का व्यवहार करना चाहिए।

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रास्ता भटके राजू—चिंकी
वेदांशी मीना, 7 वर्ष
एक बार राजू और चिंकी जंगल में घूमने जाते हैं जंगल में घूमते घूमते वह रास्ता भटक जाते हैं तो उन्हें कुछ देर बाद एक सफेद मुर्गा दिखाई दिया जाता है, जो जादुई था। वह इंसानों की भाषा समझता और बोलता था। उन्होंने मुर्गे से जंगल से बाहर जाने का रास्ता पूछा तो मुर्गे ने उनकी मदद की और उन्हें जंगल से सुरक्षित बाहर जाने का रास्ता बता दिया। राजू और चिंकी सुरक्षित जंगल से बाहर निकल गए दोनों खुशी-खुशी घर पहुंचे। उन्होंने मुर्गे को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया।
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खजाने की खोज
गौरी पाराशर, 12 वर्ष
देव और साक्षी बहुत अच्छे दोस्त थे। एक दिन देव को एक पुराने कागज़ पर खजाने का नक्शा मिला। वह नक्शा देखकर वह बहुत उत्साहित हो गया और उसने साक्षी को भी इसके बारे में बताया। दोनों ने मिलकर तय किया कि वे उस खजाने को ढूंढने के लिए निकलेंगे। अगले दिन वे नक्शे के अनुसार जंगल की ओर चल पड़े। शुरुआत में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन धीरे-धीरे वे रास्ता भटक गए। चारों तरफ पेड़ ही पेड़ थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब कहां जाएं। दोनों थोड़ा घबरा गए।
तभी उन्हें एक मुर्गी दिखाई दी। मुर्गी ने उनसे कहा कि अगर तुम मेरे खोए हुए अंडे ढूंढऩे में मेरी मदद करोगे, तो मैं तुम्हें खजाने तक पहुंचने का रास्ता बता दूंगी। देव और साक्षी ने तुरंत उसकी मदद करने का फैसला किया। दोनों ने मिलकर जंगल में खोजबीन शुरू की और थोड़ी मेहनत के बाद उन्हें मुर्गी के सारे अंडे मिल गए। मुर्गी बहुत खुश हुई और उसने वादा निभाते हुए उन्हें खजाने तक पहुंचने का सही रास्ता बताया। देव और साक्षी खजाने तक पहुंच गए। इसके बाद मुर्गी ने उन्हें सुरक्षित घर लौटने का रास्ता भी बता दिया। इस तरह दोनों दोस्त खुशी-खुशी अपने घर वापस आ गए।

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चतुर चूजू और दो दोस्त
रूद्रिका सिंह, 7 वर्ष
एक सुंदर पहाड़ी गांव में राहुल और पिंकी नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। राहुल को पहाड़ों की सैर करना बहुत पसंद था, इसलिए वह हमेशा एक स्काउट बॉय की तरह सिर पर टोपी पहनकर और हाथ में लकड़ी लेकर तैयार रहता था। वहीं, पिंकी बहुत दयालु थी और उसे जानवरों से गहरा लगाव था। एक दिन, राहुल अपनी पीठ पर बस्ता टांगकर सैर के लिए निकला। रास्ते में उसे पिंकी मिली, जो अपने फ्रॉक की जेब में मुर्गियों के लिए दाना लेकर आई थी। तभी उन्हें रास्ते में एक सुंदर, सफेद रंग का मुर्गा दिखाई दिया, जिसकी कलगी बिल्कुल लाल और चमकदार थी। राहुल ने दूर से हाथ से ओट बनाकर देखते हुए कहा, पिंकी, देखो! यह मुर्गा कितना समझदार लग रहा है। ऐसा लगता है जैसे यह हमसे कुछ कहना चाहता है। पिंकी मुस्कुराई और उसने आगे बढ़कर अपने हाथ से दाने जमीन पर गिरा दिए। उसने प्यार से कहा, आओ चूजू, दाना चुग लो! मुर्गा बिना डरे उनके पास आया और खुशी-खुशी दाना चुगने लगा। वह अपनी गर्दन हिलाकर दोनों दोस्तों का शुक्रिया अदा कर रहा था। राहुल और पिंकी को समझ आ गया कि अगर हम जानवरों से प्यार करेंगे, तो वे भी हमारे सच्चे दोस्त बन जाएंगे। दोनों ने तय किया कि वे हर रोज इस पहाड़ी पर आएंगे और अपने इस नए दोस्त चूजू से मिलेंगे।
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जादुई बीज और पहाड़ की सैर
सिद्धांत जांगिड़, वर्ष 10
एक समय की बात है, एक शांत और सुंदर गांव में चिंटू और पिंकी नाम के दो भाई-बहन रहते थे। चिंटू को नए-नए रास्तों पर जाना और ट्रेकिंग करना बहुत पसंद था, जबकि पिंकी स्वभाव से बेहद मासूम और जानवरों से प्यार करने वाली बच्ची थी। एक दिन चिंटू ने पहाड़ पर चढऩे की योजना बनाई। उसने अपनी पीठ पर एक झोला टांगा, सिर पर पीली टोपी लगाई और हाथ में एक मजबूत छड़ी ले ली। पिंकी ने जब भाई को तैयार होते देखा, तो उसने भी साथ चलने की जिद पकड़ ली। चिंटू मान गया, लेकिन पिंकी अकेले नहीं आई। वह अपने साथ अपनी सबसे प्यारी सफेद मुर्गी 'लाली' को भी ले आई। पहाड़ की चढ़ाई करते हुए तीनों को बड़ा मजा आ रहा था। लाली कभी चिंटू के आगे दौड़ती, तो कभी पिंकी के पैरों के पास आकर कुड़कुड़ाने लगती। चारों तरफ हरी-भरी घास और पहाड़ों का नजारा बेहद खूबसूरत था। तभी अचानक लाली एक जगह रुककर ज़मीन को कुरेदने लगी। पिंकी ने पास जाकर देखा तो वहां जमीन पर सोने जैसे चमकते हुए कुछ अनोखे दाने बिखरे थे। पिंकी खुशी से उछल पड़ी और हाथ से इशारा करते हुए बोली, भैया, देखो! लाली को क्या मिला! चिंटू ने पास आकर दानों को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, पिंकी, ये तो पहाड़ के दुर्लभ जादुई बीज हैं। दोनों भाई-बहन ने उन सुंदर बीजों को समेटा और लाली को शाबाशी दी। पहाड़ की चोटी पर बैठकर उन्होंने नाश्ता किया, ठंडी हवा का आनंद लिया और शाम होने से पहले ढेर सारी यादें और जादुई बीज लेकर खुशी-खुशी अपने घर लौट आए।
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बोलने वाली मुर्गी
रिशिता टहलयानी, 10 वर्ष
चारु और बंटी दोनों दोस्त थे। एक दिन जब दोस्तों के साथ ट्रैकिंग करते हुए चारु और बंटी अपने समूह से अलग हो गए। चलते—चलते उन्हें सामने एक मुर्गी दिखी। उन्हें आश्चर्य हुआ कि पहाड़ों में मुर्गी क्या कर रही है। चारु ने उसे कुछ दाने खिलाए। जैसे ही मुर्गी ने दाने खाए तो वह बोलने लगी। उन्होंने मुर्गी से आगे चलने का रास्ता और अपने समूह के बारे में पूछा और फिर मुर्गी ने उन्हें सही रास्ता बताया। जिससे वह अपने मित्रों से फिर से मिल गए और वह अपनी ट्रैकिंग पर चले गए।
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दयालु बच्चों की सीख
देवांश सिंह, 7 वर्ष
एक दिन सोनू और मोनू पहाड़ी रास्ते से होकर जंगल की ओर घूमने जा रहे थे। मौसम बहुत सुहावना था और चारों ओर हरियाली फैली हुई थी। चलते-चलते उनकी नजर एक सफेद मुर्गी पर पड़ी। मुर्गी बहुत कमजोर और भूखी लग रही थी। वह जमीन पर इधर-उधर दाना खोज रही थी, लेकिन उसे कुछ भी खाने को नहीं मिल रहा था।
लड़की को मुर्गी पर दया आ गई। उसने तुरंत अपने खाने के डिब्बे से कुछ दाने निकाले और मुर्गी के सामने डाल दिए। मुर्गी खुशी-खुशी दाने खाने लगी। लड़के ने पास से पानी लाकर मुर्गी को पिलाया। दोनों बच्चों ने प्यार से उसकी देखभाल की। थोड़ी देर में मुर्गी स्वस्थ और खुश दिखाई देने लगी।
मुर्गी बच्चों के आसपास घूमने लगी, मानो वह उनका धन्यवाद कर रही हो। यह देखकर दोनों भाई-बहन बहुत खुश हुए। उन्होंने सोचा कि जानवर और पक्षी भी हमारी तरह भूख और प्यास महसूस करते हैं, इसलिए हमें उनकी मदद करनी चाहिए।
उस दिन से दोनों रोज़ अपने घर के बाहर पक्षियों और जानवरों के लिए दाना और पानी रखने लगे। गांव के लोग भी उनकी इस अच्छी आदत की प्रशंसा करने लगे।
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मुन्नी ने की मदद
आश्चर्य संगम, 7 वर्ष
पहा? के पास वाले गांव में मुन्नी रहती थी। शाम का समय था और वह अपने सफेद मुर्गे को दाना दे रही थी। चि?ियां गाना गाती हुई अपने घर जा रही थीं। तभी मुन्नी ने देखा कि सामने से कोई बच्चा आ रहा है, जो शायद टूरिस्ट था और पहा? पर च?ने वाला था। मुन्नी ने उससे पूछा कि वह कहां से आ रहा है और कैसे भटक गया है। बच्चे ने रोते हुए बताया कि वह अपने मम्मी-पापा के साथ पहा? घूमने आया था और रास्ता भटक गया। मुन्नी ने उससे कहा कि शाम हो गई है और वह उसके साथ उसके घर चले। वह बच्चे को अपने घर ले गई और पुलिस को फोन किया। पुलिस आई और बच्चे को ले गई। बाद में पुलिस स्टेशन में बच्चे को उसके मम्मी-पापा मिल गए, जिससे मुन्नी बहुत खुश हुई।

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मुर्गी और दयालु बच्चे
आराध्या गुप्ता, 10 वर्ष
एक गांव में राहुल और रानी नाम के दो बच्चे रहते थे। दोनों बहुत दयालु थे। एक दिन वे सुबह-सुबह खेतों की ओर घूमने निकले। राहुल ने टोपी पहन रखी थी और उसके हाथ में एक छोटी लकड़ी थी। रानी अपने साथ थोड़ा दाना लेकर आई थी।
रास्ते में उन्हें एक सफेद मुर्गी दिखाई दी। मुर्गी इधर-उधर घूम रही थी और भूखी लग रही थी। रानी ने प्यार से मुर्गी के सामने दाना डाल दिया और मुर्गी खुशी से दाना चुगने लगी। मुर्गी को चुगते हुए देखकर दोनों बहुत खुश हुए।
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मदद की सीख
प्रसून पारीक, 9 वर्ष
जैकी को दूर हरे-भरे मैदान में एक लड़की दिखाई दी जो मुर्गी को दाना खिला रही थी। उसके पास जाकर जैकी ने अपनी यात्रा और कैंप से रास्ता खोने की बात बताई। लड़की ने बताया कि वह और उसकी दोस्त मीनू मुर्गी पास ही अपने परिवार के साथ रहती हैं। वह जैकी को अपने घर ले आई। उसकी मम्मी ने सबको खाना खिलाया। सब बातें करते करते सो गए। सुबह जैकी को उसके कैंप का रास्ता बताकर विदा किया। जैकी भी उन्हें धन्यवाद देकर रवाना हुआ।

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सीक्रेट एजेंट रोनी और जासूस मुर्गा
याशिका हाड़ा, 8 वर्ष
गांव में रहने वाले रोनी और रिया खुद को 'सीक्रेट जासूस' समझते थे। रोनी हमेशा स्काउट्स वाली पीली टोपी और बैंगनी स्कार्फ पहनकर घूमता था, और रिया का दावा था कि वह जानवरों की भाषा समझती है। एक सुबह दोनों पहाड़ों पर 'खजाने की खोज' वाले मिशन पर निकले। रोनी हाथ में लाठी लेकर आगे-आगे रास्ता ढूंढ रहा था, तभी अचानक एक अजीब सा सफेद मुर्गा उनके सामने आकर खड़ा हो गया। उसकी लाल कलगी और नखरे किसी राजा जैसे थे। रुको रिया! सामने कोई संदिग्ध कैरेक्टर है। रोनी ने जासूसी अंदाज में अपनी आंखें सिकोड़कर कहा। मुर्गे ने रोनी को ऐसे घूरा जैसे कह रहा हो— बेटा, ये मेरा इलाका है! रिया हंस पड़ी। उसने अपनी पोटली से कुछ दाने निकाले और मुर्गे की तरफ हाथ बढ़ाकर कहा— अरे रोनी, यह हमारा नया पार्टनर है। इसका नाम 'चीकू' रखेंगे। चीकू मुर्गे ने दाने गपागप खा लिए। लेकिन जैसे ही रोनी ने आगे कदम बढ़ाया, चीकू पंख फडफ़ड़ाकर रास्ता रोकने लगा और अपने पंजों से बाईं तरफ इशारा करने लगा। रिया, चीकू हमें रास्ता बदलने को कह रहा है— रोनी ने कहा। दोनों चीकू के पीछे-पीछे बाईं तरफ चल पड़े। थोड़ी दूर जाकर उन्हें समझ आया कि चीकू ने उनकी जान बचाई थी! जिस सीधे रास्ते पर वे जा रहे थे, वहां आगे झाडय़िों से छुपा एक गहरा गड्ढा था। चीकू की होशियारी से वे सुरक्षित पहाड़ की चोटी पर पहुंच गए। रोनी ने चीकू को सैल्यूट किया और कहा— आज से तुम हमारी जासूस टीम के कैप्टन हो!
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दयालुता का ईनाम
आरव राजपुरोहित, 9 वर्ष
एक सुंदर गांव में चिंटू और मिंकी नाम के भाई-बहन रहते थे। चिंटू बहुत खोजी स्वभाव का था और हमेशा अपनी पसंदीदा टोपी पहनकर रखता था। वहीं मिंकी को पशु-पक्षियों से गहरा लगाव था। एक शाम दोनों गांव के पास वाले मैदान में खेल रहे थे। तभी उन्हें हरी घास के बीच एक अकेली सफेद मुर्गी बैठी दिखाई दी। उसके सिर पर लाल रंग की कलगी थी और वह बहुत भूखी लग रही थी। चिंटू ने तुरंत अपने बैग से पानी की बोतल निकाली और उसे पानी पिलाया। मिंकी ने अपने पास रखे अनाज के कुछ दाने उसे खाने के लिए दिए। दोनों बच्चों के इस प्यार और दयालुता को देखकर मुर्गी बहुत खुश हुई। उसने खुशी से अपने पंख फडफ़ड़ाए और घास पर दो सुंदर, रंग-बिरंगे जादुई अंडे दे दिए। चिंटू और मिंकी उन अनोखे अंडों को देखकर हैरान रह गए। उन्हें समझ आ गया कि निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करने का फल हमेशा मीठा और जादुई होता है। वे मुस्कुराते हुए मुर्गी और उन अंडों को अपने साथ घर ले आए।

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मुर्गे की बांग
धृति खन्ना, 7 वर्ष
टीना और मोनू गर्मी की छुट्टियों में अपनी नानी के गांव गए। वहां पर घास का मैदान व पहाडय़िां देखकर दोनों बहुत खुश थे। मोनू ने धूप से बचने के लिए हैट लगा लिया और पानी की बोतल व खाने पीने के सामान का बैग भी ले लिया। दोनों घूमने निकल पड़े। रास्ते में उन्हें एक मुर्गा मिला। उसके सिर पर बहुत ही सुंदर कलगी थी। टीना उसे कॉर्न खिलाने लगी। टीना ने मोनू को बताया कि गांव में अभी भी लोग सुबह इसी मुर्गे की बांग की आवाज से उठ जाते हैं और अपने कामों में लग जाते हैं। मुर्गा गांव की अलार्म घड़ी होता है। मोनू यह सुनकर बहुत खुश हुआ और मुर्गे को सैल्यूट करने लगा।

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सच्चे मित्र
लक्षिता कंवर, 9 वर्ष
मीना और राजू मित्र थे। वह पहाड़ों पर घूमने के लिए गए और उन्हें वहां एक मुर्गी मिली जो जाले में बंद थी। उन दोनों ने उसे जाले से निकाला और खाना खिलाया। तीनों की मित्रता हो गई। सूर्यास्त के समय वह दोनों पहाड़ों से शहर कर वापस लौटे और खुशी-खुशी घर आ गए।
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परी की मदद
लक्षिता कुमावत, 11 साल
एक बार बिट्टू और गुड्डू नामक दो भाई-बहन पहाड़ी पर घूमने गए थे। तभी उन्हें वहा पर एक भूखी मुर्गी दिखाई दी। गुड्डू ने उसे अपने हाथों से खाना खिलाया। वह मुर्गी खुश होकर बोली कि मैं एक जादुई परी हूं, जिसे एक बुरे जादूगर ने मुर्गी बना दिया था। अब तुम दोनों भाई-बहन मुझसे एक इच्छा मांगों मैं उसे पूरी करूंगी। उन्होंने कहा कि तुम फिर से परी बन जाओ और हमेशा खुश रहना। इसके बाद जब भी कभी उन दोनों भाई-बहन पर कोई मुसीबत आती तो वो परी उनकी मदद करती थी।
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मदद करने से खुशी मिलती है
स्तुति गुप्ता, 12 वर्ष
गर्मी की छुट्टियों की बात है। एक दिन सुबह चंदू और पिंकी घूमने के लिए जंगल की ओर निकले। उनके बैग में पक्षियों के लिए दाना व चीटियों के लिए आटा भी था। रास्ते में जाते वक्त उन्हें एक मुर्गा मिला। पिंकी ने मुर्गे को अपने हाथों से दाना खिलाया। दाना खाकर मुर्गे की आंखों में चमक आ गई। चंदू और पिंकी यह सब देखकर बहुत खुश हुए। चंदू और पिंकी को अहसास हुआ कि वास्तव में सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने

Published on:
03 Jun 2026 01:06 pm