
Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने यूक्रेन की NATO सदस्यता को लेकर अपना रुख साफ किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि फिलहाल यूक्रेन का NATO में शामिल होना विचाराधीन नहीं है और अमेरिका का पूरा ध्यान युद्ध को खत्म कराने पर है। इसी बीच यूक्रेन ने अक्टूबर के अंत तक रूस और अमेरिका के साथ तकनीकी स्तर की त्रिपक्षीय बैठक के लिए तैयार होने की बात कही है। वहीं, यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भारत की शांति पहल का जिक्र करते हुए इसे मौजूदा प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके पास शांतिपूर्ण समाधान के लिए 'अच्छे विचार' होने की बात कही।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से जल्द फोन पर बातचीत करेंगे। दोनों नेताओं के बीच रूस में न्यूमोनिक प्लेग को लेकर चर्चा होगी। यह फैसला रूस के इर्कुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट में 28 वर्षीय कर्मचारी दार्या शिपिलोवा की अज्ञात कारणों से हुए निमोनिया के बाद मौत के बीच लिया गया है। ट्रंप ने बीमारी को गंभीर बताते हुए रूस को मदद देने की पेशकश भी की है।
यूक्रेन की लंबे समय से चली आ रही NATO सदस्यता की मांग पर बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी नए देश को शामिल करने के लिए सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति बेहद जरूरी होती है। फिलहाल ऐसे हालात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी सैन्य संघर्ष को विराम देना है, ताकि और अधिक मासूम जिंदगियों को बचाया जा सके। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति अभी काफी गंभीर है, फिर भी अमेरिका बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति का रास्ता तलाशने की पूरी कोशिश कर रहा है।
युद्ध के मैदान में जारी तनाव के बीच कूटनीति के मोर्चे पर एक राहत भरी खबर भी सामने आ रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि अमेरिकी बातचीत टीम ने अक्टूबर के अंत तक यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच एक खास त्रिपक्षीय बैठक करने का प्रस्ताव दिया है। जेलेंस्की ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि उनका देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) या किसी भी अन्य तटस्थ स्थान पर इस वार्ता के लिए पूरी तरह तैयार है।
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कई मुद्दों पर समझौते हुए। मैं चाहता हूं कि वह पुतिन के साथ समझौता करें और मैं चाहता हूं कि पुतिन उसके साथ समझौता करें। पिछले महीने 25,000 लोग मारे गए। उससे पहले के महीनों में 32,000 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर सैनिक थे… यह कितने दुख की बात है।
इस पूरे घटनाक्रम में भारत का रुख काफी असरदार साबित हो रहा है। परंपरागत कूटनीति से आगे बढ़ते हुए भारत ने मॉस्को और कीव के बीच सुलह कराने के लिए एक विस्तृत 'शांति प्रस्ताव' पेश किया है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने खुद पुष्टि की है कि कीव के पास फिलहाल चार देशों (तुर्की, मिस्र, अमेरिका और भारत) के प्रस्ताव विचाराधीन हैं, जिनमें से भारत का शांति प्लान सबसे व्यापक और व्यावहारिक है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा है कि भारतीय नेतृत्व के पास इस संघर्ष को सुलझाने के लिए बेहद दूरदर्शी और व्यावहारिक विचार हैं।