
फोटो में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (सोर्स- ANI)
Ukraine NATO Membership: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने यूक्रेन की नाटो (NATO) सदस्यता को लेकर बड़ा संकेत दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि फिलहाल यूक्रेन का NATO में शामिल होना एजेंडे में नहीं है। अमेरिका की प्राथमिकता अभी युद्ध को खत्म करना है। आइसलैंड के विदेश मंत्री के साथ प्रेस ब्रीफिंग में रुबियो ने कहा कि NATO में नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी देशों की सहमति जरूरी होती है। यूक्रेन की सदस्यता फिलहाल इस प्रक्रिया के तहत टेबल पर नहीं है।
रुबियो ने आगे कहा कि अमेरिका युद्ध रोकने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने माना कि इस युद्ध में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। ऐसे में लड़ाई खत्म करना सबसे जरूरी है।
रुबियो ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात तेजी से शांति की ओर बढ़ते नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिका जमीन पर हो रहे घटनाक्रम और युद्ध की दिशा पर नजर रख रहा है। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका की एक नई पहल की जानकारी दी। उनके मुताबिक, अमेरिकी वार्ताकार रूस और यूक्रेन के बीच तकनीकी स्तर पर त्रिपक्षीय बैठक का प्रस्ताव दे रहे हैं।
बता दें यह बैठक अक्टूबर के आखिर तक हो सकती है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के लिए संयुक्त अरब अमीरात या अमेरिका की ओर से सुझाए गए किसी अन्य देश को चुना जा सकता है। अब नजर रूस के जवाब पर है। यूक्रेन ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की कोशिशों में भारत की भूमिका भी चर्चा में है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने बताया कि भारत संघर्ष के समाधान में मदद के लिए आगे आया है। कीव कई अंतरराष्ट्रीय शांति प्रस्तावों पर विचार कर रहा है। इनमें तुर्की, मिस्र और अमेरिका के प्रस्ताव शामिल हैं। भारत के प्रस्ताव को भी यूक्रेन गंभीरता से देख रहा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की है। पुतिन ने कहा है कि मोदी के पास शांतिपूर्ण समाधान को लेकर अच्छे विचार हैं। इस बीच, रूस के हमले भी जारी हैं। यूक्रेन में महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं। इन हमलों में नुकसान और लोगों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में अमेरिका का संदेश साफ है। फिलहाल NATO विस्तार से ज्यादा प्राथमिकता युद्ध को रोकने और बातचीत का रास्ता तलाशने पर है।
Updated on:
07 Oct 2026 08:16 am
Published on:
07 Oct 2026 07:18 am
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