न्यूनतम समर्थन मूल्य: सुधार-संतुलन जरूरी नई दिल्ली. केंद्र सरकार और किसानों के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर आने वाले कुछ दिनों में एक बार फिर बातचीत का दौर शुरू हो सकता है। इसी बीच, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के तहत नेशनल इंस्टीट््यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी रिसर्च (एनआइएपी) की रिपोर्ट ‘कृषि […]
न्यूनतम समर्थन मूल्य: सुधार-संतुलन जरूरी
नई दिल्ली. केंद्र सरकार और किसानों के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर आने वाले कुछ दिनों में एक बार फिर बातचीत का दौर शुरू हो सकता है। इसी बीच, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के तहत नेशनल इंस्टीट््यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी रिसर्च (एनआइएपी) की रिपोर्ट ‘कृषि मूल्य नीति सुधार की दुविधा: खाद्य सुरक्षा, किसानों के हित और प्राकृतिक संसाधनों की स्थिरता में संतुलन’ में यह खुलासा हुआ है कि एमएसपी नीति से अधिकतर लाभ केवल बड़े किसानों को मिल रहा है, किसानों की आय में वृद्धि तो होती है पर समान रूप से नहीं।
छोटे और सीमांत किसान इससे अपेक्षित लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सरकार यदि एमएसपी खरीद में छोटे और सीमांत किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सुधार लाए, तो इससे कृषि क्षेत्र में अधिक संतुलन बनाया जा सकता है। प्राइस डेफिशियंसी पेमेंट स्कीम (मूल्य अंतर भुगतान योजना) को बढ़ावा देकर छोटे किसानों की स्थिति मजबूत की जा सकती है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
-15% धान व 9.6% गेहूं उत्पादक किसानों को ही एमएसपी का लाभ
-धान किसान उपज का केवल 24% और गेहूं किसान उपज का केवल 21% एमएसपी पर बेच पाते हैं
-31.3% धान उत्पादक 37.8% धान और 23.5% गेहूं उत्पादक 29.8% गेहूं एमएसपी प्रणाली के तहत बेचते हैं।
-छोटे किसानों में केवल 10.5% धान व 4.5% गेहूं उत्पादक एमएसपी प्रणाली से जुड़े हैं। ये उपज का सिर्फ 12.6% धान और 7.3% गेहूं एमएसपी पर बेच पाते हैं।
-एमएसपी आधारित खरीद प्रणाली से धान की खेती से आय में 23.2% और गेहूं की खेती से आय में 9.6% वृद्धि होती है।
....टेबल....
सीमित लाभः मूल्य, उत्पादन व आय में वृद्धि पर एमएसपी का असर
वृद्धि (प्रतिशत में) - धान - गेहूं
कीमत में - 13.2 - 3.45
पैदावार में - 13.47 - 5.04
कुल आय में - 23.22 - 9.64
(स्रोत: आइसीएआर-एनआईएपी पॉलिसी पेपर)