Highlights - स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगी सरकार ने किया काबिले तारीफ कार्य - कोविड-19 के 674 हॉस्पिटल में डेढ़ लाख बिस्तर की व्यवस्था - 42 लाख लोगों को दिया मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
नोएडा. योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Government) ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में चार साल पूरे कर लिए हैं। ऐसे में सरकार की उपलब्धियों और नाकामियों की चर्चा भी जरूर होगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र की बात करें तो योगी सरकार ने पहले की सरकारों के मुकाबले विपरीत परिस्थितियाें के बीच भी शानदार काम किया है। देश के विभिन्न राज्य जहां आज भी कोरोना महामारी (Corona Epidemic) की दूसरी लहर से जूझ रहे हैं। वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने समय रहते स्वास्थ्य के क्षेत्र (Health Sector) में बड़े कदम उठाकर लोगों को हरसंभव लाभ पहुंचाने का कार्य किया है, जिसकी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी तारीफ की थी।
उल्लेखनीय है कि इस बार योगी सरकार के साथ सभी राज्यों की सरकारों के सामने कोरोना की सबसे बड़ी चुनौती थी। हालांकि उत्तर प्रदेश में तो कुछ हद तक इस पर लगाम कसने में कामयाबी मिली है, लेकिन अभी भी कई राज्यों में काेरोना का प्रकोप तेजी बढ़ रहा है। योगी सरकार ने कोरोना काल में जिस तरह हेल्थ स्ट्रक्चर पर कार्य किया है, वह काबिलेतारीफ है। बता दें कि कोरोना महामारी के शुरुआती दौर यानी मार्च 2020 में लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज की लैब में केवल 60 सैंपल प्रतिदिन जांच की क्षमता थी, जो अब बढ़कर दो करोड़ हो गई है। उत्तर प्रदेश ने 3.18 करोड़ से ज्यादा कोरोना की जांंच कर सबसे अधिक जांच का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। यूपी में 2020 में ही 242 नई लैब की स्थापना की गई है। उत्तर प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की मृत्यु दर 1.5 फीसदी से भी नीचे है। इतना ही नहीं कोविड-19 के 674 हॉस्पिटल में डेढ़ लाख बिस्तर की व्यवस्था है।
दो एम्स खोले, एमबीबीएस की सीटें बढ़ाईं
योगी आदित्यनाथ सरकार के चार साल की बात करें तो स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने वाकई अच्छा काम किया है। रायबरेली और गोरखपुर के एम्स में ओपीडी सेवा के साथ ही 2019-20 से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। प्रदेशभर में इन चार वर्षों में एमबीबीएस की 2 हजार 4 सौ 88 सीट बढ़ाई गई हैं। वहीं, पीजी डिप्लोमा की भी 588 सीटें बढ़ाई गई हैं। इसके साथ ही पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से लखनऊ में चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है।
दिमागी बुखार पर पाया काबू
उल्लेखनीय है कि पूर्वांचल में दिमागी बुखार के कारण प्रति वर्ष सैकड़ों बच्चों को जान गंवानी पड़ती थी। 2016 में जेई और एईएस के 442 रोगियों में से 74 की मौत हुई थी। वहीं, बीते चार साल में 16 पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू)के अलावा, 177 इंसेफ्लाइटिस केंद्र और 15 मिनी पीकू की स्थापना की गई, जिसके नतीजे चार साल में मृत्यु दर में 95 फीसद कमी आई है।
42 लाख लोगों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ
उत्तर प्रदेश में 1.18 करोड़ परिवारों के 6.47 करोड़ लोगों को आयुष्मान प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभ मिल रहा है। वहीं, इस योजना में छूटे 42.19 लाख लोगों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा सुपर स्पेशियलिटी सेवा बढ़ाने पर विशेष जाेर दिया जा रहा है। संजय गांधी पीजीआई में प्रथम रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत हो चुकी है। मेरठ, झांसी, प्रयागराज और गोरखपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक स्थापित किए गए हैं।