
नोएडा। मौसम में बदलाव अाने के साथ ही सब्जियों के रेट आसमान छूने लगे हैं, लेकिन इसका कारण किसान नहीं हैं। उन्हें तो सर्दी हो या गर्मी, वहीं रेट मिलता है। सब्जी महंगी होने की वजह उसे मार्केट तक पहुंचाने वाली व्यापारियों की चेन है। यही कारण है कि किसान से 20 रुपये किलो में आने वाले टमाटर भी मार्केट में आते-आते लोगों को 70-80 रुपये किलो तक पहुंच रहे हैं। एेसे में महिलाआें को रसोर्इ घर चलाने में तीन से चार गुना महंगार्इ की मार लगी है।
मौसम का बदलाव आैर कोहरा भी है वजह
सब्जियों के दाम बढ़ने की एक वजह मौसम में बदलाव आैर कोहरा भी है। आपको बता दें कि नासिक और कर्नाटक में बारिश की वजह से फसलों की आवक कम हो गई है। वहीं, कोहरे की वजह से गाड़ियां भी लेट पहुंच रही हैं। इस वजह से मंडी में डिमांड के अनुसार माल की कमी है। यही वजह है कि सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। आलम यह है कि सब्जी मंडी में ही दो रेटों पर लोगों को सब्जियां मिल रही हैं।
इस वजह से अधिक दामों पर मिल रही हैं सब्जियां
फूल मंडी के पदाधिकारी अजय कुमार के मुताबिक, किसान से टमाटर को 20-30 रुपए किलो खरीदा जा रहा है। थोक बाजार में पहुंचते-पहुंचते किराया भाड़ा और मंडी शुल्क देखते हुए यह 50 से 60 रुपए किलो हो जाता है। वहीं, रिटेल मंडी तक पहुंचते-पहुंचते टमाटर 70 से 80 रुपये प्रति किलो हो जाता है। ऐसे ही बड़ी मंडी में मिलने वाला 10-15 रुपये प्रति किलो आलू रिटेल में 20-25 रुपये में बिकते हैं। जबकि बड़ी मंडी में 20-25 रुपये में मिलने वाला प्याज 35-40 रुपये में लोगों तक पहुंचता है। एेसे में किचन पर सीधी महंगार्इ की मार लगती है। हालांकि, जानकारों के अनुसार जनवरी-फरवरी माह में सब्जी के दाम कम हो सकते हैं।
जनवरी से सस्ता होगा टमाटर और प्याज
फेज दो स्थित फूल मंडी के पदाधिकारी ने बताया कि जनवरी और फरवरी से टमाटर और प्याज के दामों में गिरावट आने की संभावना है। टमाटर में मुर्रा रोग लगने की वजह से फसलें खराब हो गई हैं। इसकी वजह से रेट बढ़ा है। जनवरी और फरवरी में टमाटर और प्याज की नई फसल आने के बाद ही रेट डाउन होंगे। बाकी हरी सब्जियों के रेट दिसंबर तक सस्ते हो जाएंगे।