ओखला बर्ड सैंक्चुरी में अक्टूबर से शातकालीन प्रवासी पक्षियों के लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सैंक्चुरी के अधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर से पहले ही पक्षियों की कुछ प्रजातियां आ चुकी हैं। उन्हें पार्क में देखा भी गया है। इनमें पलास का गल, व्हिस्कर्ड और मार्श हैरियर प्रजाति शामिल है।
नोएडा की ओखला बर्ड सैंक्चुरी (Okhla Bird Sanctuary) नए पक्षियों की प्रजाति का स्वागत करने के लिए तैयार है। अगले महीने अक्टूबर में शातकालीन प्रवासी पक्षियों के लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में विभाग की टीम ने तालाबों से जलकुंभी को साफ करना और पक्षियों के घोंसले में पानी रखने के लिए प्लेटफॉर्म बनाने का काम शुरू कर दिया है। दरअसल मॉनसून के जाने के साथ ही यहां नए पक्षियों की प्रजाति आएगी। बर्ड सैंक्चुरी के अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश प्रवासी पक्षी जल निकाय के बीच इन टीलों और प्लेटफॉर्मों पर रहना पसंद करते हैं। इसलिए इन्हें बनाने का काम अभी से शुरू किया गया है। क्योंकि प्लेटफॉर्म बनाने में ही सिर्फ दो महीने का समय लगता है।
अक्टूबर महीने से पहले ही पक्षियों की कुछ प्रजातियां आ चुकी
अधिकारियों के मुताबिक, बर्ड सैंक्चुरी में अक्टूबर महीने से पहले ही पक्षियों की कुछ प्रजातियां आ चुकी हैं। उन्हें पार्क में देखा भी गया है। इनमें पलास का गल, ब्लैक-बेल्ड टर्न, व्हिस्कर्ड और मार्श हैरियर प्रजाति शामिल है। विभागीय वन अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि पार्क की सैंक्चुरी में पार्क की सफाई का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। अब पेंटिंग और मरम्मत का काम किया जा रहा है। इसके अलावा जलकुंभी के अगले 10 दिनों में साफ होने की उम्मीद है, जबकि बाकी आवास विकास कार्य अक्टूबर महीने के बीच तक पूरा कर लिया जाएगा।
पर्यटकों के लिए साइकिल और गोल्फ कार्ट की व्यवस्था
अधिकारी के मुताबिक, सैंक्चुरी में एक से सात अक्टूबर के बीच वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। इससे पहले ही ज्यादातर काम पूरा कर लिया जाएगा। वहीं यहां आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रकृति की पगडंडियों, बेंचों और रास्तों को भी अच्छी तरह से साफ कर दिया गया है। यहां पर पर्यटकों के लिए साइकिल और गोल्फ कार्ट किराए पर लेने की भी व्यवस्था की गई है। बता दें कि ओखला बर्ड सैंक्चुरी यमुना तट के साथ 400 हेक्टेयर में फैला हुई है। वन अधिकारियों का दावा है कि 70 से अधिक प्रजातियों से संबंधित लगभग 20,000 पक्षी हर साल अभयारण्य में आते हैं।