नोएडा

Noida News:टेक सपोर्ट के जाल में फंसे विदेशी, यहीं से ऑपरेट हो रहा था पूरा नेटवर्क

Cyber Fraud:नोएडा में अवैध कॉल सेंटर का खुलासा करते हुए पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह टेक सपोर्ट के नाम पर विदेशी नागरिकों को झांसा देकर स्क्रीन एक्सेस हासिल करता और उनकी बैंकिंग जानकारी चुराकर डॉलर में ठगी करता था।

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Apr 08, 2026

नोएडा। तकनीक के नाम पर भरोसा जीतकर विदेशियों को ठगने वाले एक शातिर गिरोह का साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सेक्टर-76 में चल रहे अवैध कॉल सेंटर से संचालित इस गिरोह ने अमेरिका और यूरोप के सैकड़ों नागरिकों को अपना शिकार बनाया। पुलिस ने मंगलवार शाम को कार्रवाई करते हुए सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन और ठगी से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं।

डीसीपी साइबर शैव्या गोयल के अनुसार, टीम को लगातार मिल रही गोपनीय सूचनाओं के आधार पर छापेमारी की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महेंद्र पार्क दिल्ली निवासी मोहम्मद बिलाल (28), आदर्श नगर निवासी देव कपाही (25), राजस्थान के अलवर तिजारा निवासी अभिषेक मुखेजा (27) और रोहिणी निवासी कुशाग्र निम्बेकर (24) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, बिलाल ही इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है, जो लंबे समय से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था।

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पूछताछ में सामने आया कि आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘टेक सपोर्ट’ के नाम से पेड विज्ञापन चलाते थे। इन विज्ञापनों में दिए गए टोल-फ्री नंबर पर जब विदेशी नागरिक सहायता के लिए कॉल करते, तो गिरोह के सदस्य खुद को नामी कंपनियों का टेक्निकल स्टाफ बताकर भरोसा जीत लेते। इसके बाद वे पीड़ितों को यह कहकर डराते कि उनका कंप्यूटर या मोबाइल हैक हो चुका है।

घबराए पीड़ितों को ‘समस्या समाधान’ के नाम पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड कराया जाता। जैसे ही एक्सेस मिलता, आरोपी कंप्यूटर स्क्रीन ब्लैक कर देते, जिससे पीड़ित पूरी तरह असहाय महसूस करता। इसी दौरान वे चालाकी से बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते और खाते में मौजूद रकम का अंदाजा लगाते।पुलिस के मुताबिक, यदि खाते में कम रकम होती तो 350 से 2000 अमेरिकी डॉलर तक वसूले जाते, जबकि ज्यादा रकम होने पर कॉल को तथाकथित ‘सीनियर एजेंट’ को ट्रांसफर कर बड़े स्तर की ठगी को अंजाम दिया जाता। अब तक यह गिरोह करीब ढाई सौ से अधिक विदेशी नागरिकों को निशाना बना चुका है।

फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है और अनजान कॉल या लिंक से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

Published on:
08 Apr 2026 06:30 am
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