नोएडा

स्विट्जरलैंड जैसा एहसास और कोहरे की छुट्टी! जेवर एयरपोर्ट की इन 6 खूबियों ने खींचा दुनिया का ध्यान

Noida International Airport: 2001 का प्रस्ताव, 2026 में उड़ान! प्रधानमंत्री आज देश को सौंपेंगे जेवर एयरपोर्ट। स्विट्जरलैंड जैसा फील और कोहरे को मात देने वाली तकनीक से लैस।

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Mar 28, 2026
Noida International Airport

Noida International Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सपना आज 28 मार्च को साकार होने जा रहा है। साल 2001 में प्रस्तावित और 2014 से गति पकड़ने वाली इस परियोजना का लोकार्पण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब यहां से देश के प्रमुख शहरों के लिए हवाई यात्राएं शुरू होंगी। जेवर एयरपोर्ट की 6 बड़ी खूबियां इसे दुनिया का 'सुपर हब' बनाएंगी, जिसमें स्विट्जरलैंड जैसा वर्ल्ड-क्लास फील और आधुनिक CAT-III तकनीक शामिल है, जो घने कोहरे में भी सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करेगी।

इसके साथ ही अब 25 साल पहले देखा गया जेवर एयरपोर्ट का सपना अब पूरा होने को है। साल 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) का प्रस्ताव पेश किया था। इसके दो साल बाद अटल बिहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार ने एयरपोर्ट के लिए बनाई गई तकनीकी व्यवहार्यता की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था।

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13 साल का इंतजार अब खत्म

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सफर 13 साल के लंबे इंतजार और राजनीतिक खींचतान के बाद अब हकीकत में बदल चुका है। कभी हरियाणा तो कभी राजस्थान के बीच झूलती इस परियोजना को असली 'परवाज' साल 2014 में मिली, जब केंद्र की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'हवाई चप्पल वाले को हवाई सफर' कराने का संकल्प लिया। जिस 1334 हेक्टेयर जमीन पर आज रनवे चमक रहे हैं, वहां कभी बुग्गी और ट्रैक्टर चलाने वाले किसानों ने अपनी पुश्तैनी जमीन का त्याग किया है। इन किसानों को उम्मीद है कि उनकी कुर्बानी आने वाली पीढ़ियों के सुनहरे भविष्य और उत्तर प्रदेश की आर्थिक तरक्की का आधार बनेगी। जेवर का यह 'सुपर हब' न केवल विमानों की लैंडिंग कराएगा, बल्कि इस क्षेत्र के विकास को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

पर्यावरण की चिंता

इस एयरपोर्ट की खास बात ये है कि इसके ऊर्जा जरूरतों का 55 प्रतिशत हरित ऊर्जा के माध्यम से पूरा होगा। इसके टाटा पावर के सहयोग से सोलर पैनल लग चुके हैं, जिससे 13 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं पवन ऊर्जा से 10.8 फीसदी ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य है। सभी सुविधाओं के लिए बिजली चालित वाहन व मशीनों का ही इस्तेमाल होगा ताकि कार्बन उत्पाद शून्य किया जा सके।

अल्ट्रा मॉडर्न टेक्निक से होगा लैस

  • जेवर एयरपोर्ट रनवे को रनवे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम जैसी अल्ट्रा मॉडर्न क्षमताओं से लैस किया गया है। घने कोहरे, भारी बारिश और खराब मौसम के दौरान 50 मीटर तक की बहुत कम रनवे दृष्यता की स्थिति में भी विमानों का आवागमन जारी रह सकता है।
  • एयरपोर्ट में सालाना 2.5 मीट्रिक टन क्षमता वाला एक मल्टी-माडल कार्गो हब है। जेवर एयरपोर्ट को एविएशन हब के तौर पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें मेंटेंनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग और एयर कार्गो की सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी।
  • एयरपोर्ट पर 24 कोड-सी (मध्यम आकार के विमान जिनके पंखों की चौड़ाई 24 मीटर से अधिक लेकिन 36 मीटर से कम) और 2 कोड-डी और एफ विमान के लिए पार्किंग स्टैंड बनाए गए हैं।
  • एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग कैटेगरी 9 की हाई सिक्योरिटी कैटेगरी में शामिल किया गया है। जिसमें हवाई अड्डों पर विमान दुर्घटनाओं, आपातकालीन लैंडिंग और आग से संबंधित घटनाओं में बचाव व अग्निशमन कार्य शामिल होते हैं। इसकी वजह से यहां बोइंग 777 जैसे बड़े विमानों का संचालन संभव होगा।

CISF के हाथ सुरक्षा की कमान

जेवर एयरपोर्ट की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के हाथ में है। पहले चरण में सीआईएसएफ के 1047 कर्मी तैनात होंगे।

किन एयरलाइंस ने दी पहले चरण में ऑपरेशंस की सहमति
इंडिगो, अकासा एयर, एयर इंडिया एक्सप्रेस

किन शहरों तक शुरुआती उड़ान

वाराणसी, लखनऊ, अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरू, हैदराबाद, जयपुर, चेन्नई, पटना, कानपुर, श्रीनगर माना जा रहा है कि औसत यहां से शुरुआत में रोजाना 150 उड़ानें संचालित होंगी।

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