कई हादसों ने तो सरकार की कार्यक्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु को रेल मंत्री के पद से हाथ धोना पड़ा था।
मुजफ्फरनगर । उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक लगातार रेल हादसों का सिलसिला जारी है। बुधवार सुबह रायबरेली जिले में एक बड़े रेल हादसे ने एक बार फिर यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां न्यू फरक्का एक्सप्रेस की 6 बोगियां पटरी से उतर गईं। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की खबर है। साथ ही 21 लोग घायल हो गए हैं। यह इस वर्ष अब तक का सबसे बड़ा रेल हादसा माना जा रहा है।
हादसे के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद रेलवे मंडल द्वारा हैल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। पी एंड टी नंबर- 1072, रेलवे का नंबर- 2101 है। आपको बता दे कि अगस्त 2017 में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन मुजफ्फरनगर के खतौली रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतर गई थी।
ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतरकर अगल-बगल के घरों और एक स्कूल में घुस गए थे। इस हादसे में 23 लोगों की मौत हुई थी। खतौली रेल हादसे के 5 दिन के अंदर कानपुर और इटावा के बीच औरैया जिले में एक और हादसा हुआ था। दुर्घटना की वजह से ट्रेन के इंजन सहित 10 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। हालांकि देशभर में पिछले कुछ समय में रेल हादसों में कमी आई है। लेकिन यूपी में सालभर के अंदर कई हादसे हुए हैं।
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जो प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। मोदी सरकार के बाद देश में लगातार रेल हादसों की झड़ी लग गई थी। कई हादसों ने तो सरकार की कार्यक्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु को रेल मंत्री के पद से हाथ धोना पड़ा था। सरकार ने सुरेश प्रभु की जगह सितंबर 2017 में पीयूष गोयल को रेल मंत्री का जिम्मा सौंपा गया। गोयल के रेलमंत्री बनने के बाद देशभर में रेल हादसों में कमी जरूर आई लेकिन अब यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हुई है।