अफगानी नागरिक वली सालेक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बताई उस दिन की कहानी जब वह अपने घर में थे और अमेरिकी विमान से उनकी छत पर दो अफगानी गिरे ताे तेज धमाके जैसी आवाज हुई।
नोएडा. ''मैं काबुल में चल रहे हालातों की सोशल मीडिया पर वीडियो देख रहा था। तभी छत पर तेज आवाज हुई। पत्नी और मैं ऊपर गए ताे छत के हालात देखकर सन्न रह गए छत पर दो अफगानी नागरिक पड़े हुए थे''
यह घटना 16 अगस्त वाले उसी वीडियो से जुड़ी है जाे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। दरअसल जब काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी एयरफोर्स का प्लेन लोगों को रेस्क्यू करने के लिए पहुंचा, कुछ लोग इसी प्लेन पर चढ़ गए थे। प्लेन के उड़ने के बाद इनमें दो युवा अफगानियों को लोगों ने आसमान से गिरते हुए देखा गया था. यह दोनों अफगानी व्यक्ति थे जो काबुल में रहने वाले वली सालेक की छत पर गिरे थे। विमान से गिरने के बाद इन दोनों की मौत हो गई थी.
हमने वली सालेक से बात की और जाना कि उस दिन आखिर क्या हुआ था ? दरअसल वली सालेक के चचेरे भाई सापूर ज़राफ़ी दिल्ली में रहते हैं। उन्ही के माध्यम से हमने वली सालेक से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की। वीडियो कॉल पर वाली सालेक फारसी में बात कर रहे थे। उनकी ट्रांसलेशन सापूर ज़राफ़ी ने की। वली सालेक ने बताया कि 'जिस वक्त यह घटना हुई उस समय वह अपने घर पर लेटे हुए फेसबुक पर अफगानिस्तान में चल रहे हालत की तस्वीरे देख रहे थे. उसी दौरान उन्हे लगा की उनकी छ्त पर जैसे कोई टायर फटा हो. जब उन्होंने अपनी पत्नी के साथ जाकर छत पर देखा तो दो युवक मरे पड़े थे. उनके पड़ोसियों ने बताया कि उन्होंने इन दोनों युवकों को जहाज से गिरते हुए देखा है.
वली सालेक ( wali salek ) ने बताया कि दोनों युवकों की हालत देख उनकी पत्नी बेहोश हो गई. मरने वाले दोनों की शिनाख्त के लिए जब उनके जेब की तलाशी ली गई. उनसे मिले कागजात से उनकी पहचान हुई एक का नाम शफीउल्ला के रूप में हुई, जो एक पेशे से डॉक्टर था जबकि विमान से गिरने वाला दूसरा शख्स जकी अनवरी था। इसकी पहचान बाद में अफगानिस्तान के एक फुटबॉल प्लेयर के रूप में हुई। यह दोनों तालिबान की तरफ से अफगानिस्तान को छोड़कर भागना चाहते थे.
वली सालेक ने बताया कि दोनों युवक इतनी जोर से गिरे कि उनकी छत को भी अच्छा खासा नुकसान हुआ था. घर की छत दीवारों पर दरार आ गई उन्होंने मृतक युवक की वीडियो और अपने घर की तस्वीर भी हमारे साथ साझा की। काबुल के हालात के बारे में बताते हुए वली सालेक कहते हैं कि यहां की सड़कें खाली हैं मानो कर्फ्यू लगा है। जो लोग हैं वह तालिबान के अफगानिस्तान को छोड़कर दूसरे देशों में जाना चाहते हैं. यह कहानी बताती है कि लोग अफगानिस्तान से निकलने के लिए किस कदर बेताब है।