
Who Is Noida DM Medha Rupam: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी मेधा रूपम को बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत रद्द की गई थी और डीएम पर कड़ी टिप्पणियां करते हुए उनके वेतन से 5 लाख रुपये मुआवजा वसूलने का निर्देश दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय की 25 वर्षीय इतिहास स्नातक छात्रा आकृति चौधरी की याचिका पर फैसला सुनाया था। अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान आकृति को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। हाईकोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने हिरासत आदेश को रद्द करते हुए कहा कि यह बिना दिमाग लगाए पारित किया गया था। कोर्ट ने डीएम मेधा रूपम के आचरण की कड़ी आलोचना की और कहा कि लापरवाह नौकरशाही का मनमाना रवैया उत्तर प्रदेश को ‘निरंकुश’ शासन में बदल सकता है। साथ ही 5 लाख रुपये मुआवजा डीएम और अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूलने का आदेश दिया गया।
मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 27 से 33 (जिनमें आलोचना और मुआवजे का निर्देश था) पर रोक लगा दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की मेरिट पर सुनवाई नहीं होती, तब तक हाईकोर्ट का आदेश लागू नहीं रहेगा। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई है।
मेधा रूपम आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात हैं। उन्होंने आकृति चौधरी के खिलाफ NSA हिरासत का आदेश पारित किया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उनकी ओर से दलील दी कि बिना नोटिस दिए सख्त टिप्पणियां और जुर्माना लगाना अनुचित है।
सुप्रीम कोर्ट की इस राहत से डीएम मेधा रूपम को फिलहाल वेतन से कटौती और सेवा रिकॉर्ड में नकारात्मक टिप्पणी से राहत मिली है। मामला अब विस्तार से सुनवाई के लिए लंबित है।