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पोल अकाउंट: बदहाल पार्क, सिकुड़ते मैदान

शहर की सुबह और शाम, दोनों की अपनी एक रौनक होती है। सुबह मैदान की ओर जाती बच्चे की टोली होती है, पार्क के रास्‍ते पर बुजुर्गों की धीमी चाल और सैर के बाद कुछ देर बैठती महिलाएं।
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Aug 31, 2026
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बदहाल पार्क। पत्रिका फाइल फोटो

शहर की सुबह और शाम, दोनों की अपनी एक रौनक होती है। सुबह मैदान की ओर जाती बच्चे की टोली होती है, पार्क के रास्‍ते पर बुजुर्गों की धीमी चाल और सैर के बाद कुछ देर बैठती महिलाएं। शाम होते ही वही मैदान बच्चों की आवाजों से भर उठता है, पार्क की बेंचों पर दिनभर की थकान उतारते बुजुर्ग दिखते हैं और परिवार साथ बैठने के लिए कुछ पल चुरा लेते हैं। ये सिर्फ रोजमर्रा के दृश्य नहीं, शहर में बची हुई जिंदगी के छोटे-छोटे ठिकाने हैं। लेकिन तेजी से फैलते कंक्रीट के बीच सवाल यही है, क्या हमारे शहर इन ठिकानों के लिए जगह बचा पा रहे हैं?

राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में शहर फैल रहे हैं, बस्तियां बढ़ रही हैं और जमीन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच राजस्थान पत्रिका के सर्वे में 12.8 प्रतिशत लोगों ने पार्क और खेल मैदान को अपने क्षेत्र की बड़ी समस्याओं में गिना है। यानी करीब हर आठवां व्यक्ति अपने आसपास इस कमी को महसूस कर रहा है।

यह आंकड़ा कचरे, टूटी सड़कों या सीवरेज की तुलना में छोटा जरूर है, लेकिन इसका अर्थ छोटा नहीं। क्योंकि पार्क और मैदान शहर की सजावट नहीं, शहर के सामाजिक जीवन और सेहत की बुनियादी जरूरत हैं।

जमीन महंगी हुई तो खुली जगह सबसे आसान निशाना बन गई। कहीं मैदान पार्किंग में बदल गए, कहीं निर्माण की भेंट चढ़े। जो पार्क बचे, उनमें भी रखरखाव का संकट है—टूटे झूले, सूखी घास, उखड़े ट्रैक, खराब रोशनी और असुरक्षित कोने। कई जगह पार्क का उद्घाटन तो हुआ, लेकिन उसकी देखभाल जैसे उसी दिन खत्म हो गई। यहीं स्‍थानीय निकायों की भूमिका अहम हो जाती है। चुनौती सिर्फ नए पार्क और मैदान बनाने की नहीं, मौजूदा खुली जगहों को बचाने और उन्हें उपयोगी बनाए रखने की भी है। हर वार्ड में ऐसा पार्क हो जहां बुजुर्ग सुबह की सैर कर सकें, महिलाएं सुरक्षित माहौल में कुछ पल बैठ सकें और बच्चे खेल सकें। बच्चों और युवाओं के लिए पर्याप्त खेल मैदान हों। और सबसे जरूरी…इन जगहों के रखरखाव की जिम्मेदारी और उसका बजट स्पष्ट हो।

निकाय चुनाव में उम्मीदवारों से सड़क, सफाई और सीवरेज पर सवाल होंगे ही। एक सवाल और होना चाहिए किे आपके वार्ड में बच्चों के खेलने और बुजुर्गों, महिलाओं के समय बिताने के लिए कितनी खुली जगह है? वह कितनी सुरक्षित और उपयोगी है? और अगले पांच साल में उसे बचाने और बेहतर करने की आपकी ठोस योजना क्या है? शहर का विकास सिर्फ चौड़ी सड़कों, ऊंची इमारतों और चमकते बाजारों से नहीं मापा जाना चाहिए। शहर तब भी विकसित होता है, जब बच्चा बिना डर मैदान में खेल सके, बुजुर्ग बिना धुएं और शोर के टहल सकें, महिलाएं पार्क में सुरक्षित महसूस करें और परिवार कुछ पल साथ बिता सकें।

आज पार्क और मैदान बचाना सिर्फ जमीन बचाना नहीं है; यह शहर में जीवन के लिए जगह बचाना है। वरना आने वाली पीढ़ियां हमसे पूछेंगी… शहर तो बना लिया, लेकिन हमारे लिए जगह कहां छोड़ी?

veejay.chaudhary@in.patrika.com

Updated on:
31 Aug 2026 12:03 pm
Published on:
31 Aug 2026 12:03 pm