ओपिनियन

पत्रिका में प्रकाशित अग्रलेख: अक्षम्य !

पचपदरा की रिफाइनरी में हुए अग्निकांड को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यदि यह दुर्घटना लापरवाही के कारण हुई है तो ऐसी लापरवाही अक्षम्य है। यदि सुरक्षा एजेंसियों की चूक इसके पीछे है तो यह और भी ज्यादा चिंताजनक है।

2 min read
Apr 21, 2026
फोटो: पत्रिका

पचपदरा की रिफाइनरी में हुए अग्निकांड को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यदि यह दुर्घटना लापरवाही के कारण हुई है तो ऐसी लापरवाही अक्षम्य है। यदि सुरक्षा एजेंसियों की चूक इसके पीछे है तो यह और भी ज्यादा चिंताजनक है। क्योंकि स्थान भी बेहद संवेदनशील है और अवसर भी। पाकिस्तान से लगती अन्तरराष्ट्रीय सीमा से लगभग सवा सौ किलोमीटर दूर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा के एक दिन पहले हुए इस हादसे को सामान्य लीपा-पोती और जांच का दिखावा करके टालना राष्ट्रविरोधी कदम माना जाएगा। इस बात की तह में शीघ्र से शीघ्र पहुंचना होगा कि इसका जिम्मेदार आखिर कौन है?

समूचा राजस्थान दशकों से इस रिफाइनरी के शुरू होने का सपना देख रहा था। 'राजस्थान पत्रिका' ने इसके लिए एक दीर्घ अभियान चलाया था। तरह-तरह के उतार-चढ़ाव के बाद इस सपने के सच होने का अवसर आया था। ऐसे में लोकार्पण के एक दिन पहले घटी यह दुर्घटना चिंताजनक और निराशाजनक तो है ही साथ ही संबंधित अफसरों और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाने वाली है।

ये भी पढ़ें

पत्रिका में प्रकाशित अग्रलेख: फर्जी डिग्रियां, असली नासूर

विश्व में युद्ध के कारण तेल-गैस का वैसे ही संकट है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चार दिन पहले ही ऑस्ट्रेलिया की जीलांग रिफाइनरी में अग्निकांड हुआ है। कुछ लोग सोशल मीडिया पर चेता भी रहे थे कि ऐसे वातावरण के चलते भारतीय रिफाइनरियों की सुरक्षा बढ़ा देनी चाहिए। लेकिन हमारे अफसरों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। देश के शीर्ष पद पर विराजित प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ऐसी लापरवाही बरतने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

लगभग 80 हजार करोड़ की लागत से बन रही इस रिफाइनरी के लोकार्पण समारोह का पूरा राजस्थान लम्बे समय से इंतजार कर रहा था। अब यह समारोह टल गया है। नब्बे लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष उत्पादन की क्षमता वाली यह रिफाइनरी पश्चिमी राजस्थान का कायाकल्प करने का माद्दा रखती है। इतनी महत्वाकांक्षी परियोजना में सुई बराबर भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए थी। विशेषकर तब, जब प्रधानमंत्री अगले चौबीस घंटे में आ रहे हों। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण भी सीमा सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस तो यहां तैनात है ही, एस.पी.जी., सी.आइ.एस.एफ. जैसी सुरक्षा एजेंसियों ने भी सुरक्षा व्यवस्था संभाली होगी। राजस्थान अपेक्षाकृत शांत राज्य रहा है, लेकिन यह शांति इसकी कमजोरी ना बन जाए, इसे देखने का उत्तरदायित्व राज्य सरकार का है।

आज ही 'पत्रिका' ने लश्करी आतंकी के जयपुर कनेक्शन का समाचार प्रकाशित किया है। ऐसे में सुरक्षा पर पहले से ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। शिलान्यास के बाद आज तक निर्माण के दौरान इस रिफाइनरी में कोई दुर्घटना नहीं हुई। ऐसे में ऐन लोकार्पण के पहले अग्निकांड होना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह औद्योगिक दुर्घटना है, खुफिया तंत्र की नाकामी या व्यावसायिक हितों का टकराव।

केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दुर्घटना की जांच की घोषणा की है। जांच अवश्य हो लेकिन इसे राष्ट्रीय दुर्घटना मान कर पड़ताल होनी चाहिए। चाहे तकनीकी खामी हो, लापरवाही हो या साजिश-जिम्मेदारों को बख्शना नहीं चाहिए। सोचो, यदि जिस समय आग लगी उस समय वहां लोगों की मौजूदगी होती या फिर घटना प्रधानमंत्री की मौजूदगी में होती तो क्या होता!

bhuwan.jain@in.patrika.com

ये भी पढ़ें

पत्रिका में प्रकाशित अग्रलेख: भ्रष्टाचार का जल-भराव
Updated on:
21 Apr 2026 09:49 am
Published on:
21 Apr 2026 09:46 am
Also Read
View All