
नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम के कोच हरेंद्र सिंह का कहना है कि उनके खिलाड़ी 18 अगस्त से जकार्ता में शुरू हो रहे 18वें एशियाई खेलों में आक्रामक शैली में खेलेंगे और स्वर्ण पदक जीतकर ओलम्पिक का टिकट कटाना चाहेंगे। हरेंद्र ने जकार्ता रवाना होने से पहले एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि मैंने कोच बनने के बाद भारतीय हॉकी टीम को दोबारा आक्रामक खेल के लिए तैयार किया। सही तालमेल बनाकर आक्रमण करना भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत है। हम इसके लिए विश्व भर में जाने जाते हैं। टीम के खिलाड़ियों को भी आक्रामक खेल में बहुत आनंद आ रहा है और हम एशियाई खेलों में भी इसे जारी रखेंगे।
भारत के लिए खेल चुके हरेंद्र ने कहा कि वह मॉर्डन हॉकी पर विश्वास रखते हैं और मानते हैं कि टीम के हर खिलाड़ी को मैच के दौरान विभिन्न रोल निभाने होंगे ताकि नतीजे उनके पक्ष में आ सकें। हरेंद्र ने कहा, "मॉर्डन हॉकी बहुत तेज हो गई है। इसमें तेजी और ताकत की जरूरत पड़ती है। आपके अंदर क्षमता होनी चाहिए कि अगर आप अटैक के दौरान गेंद पर नियंत्रण खो देते हैं तो तेजी से पिछे आएं और विपक्षी टीम को आक्रमण करने से रोकें। अगर आप ऐसा कर पाते हैं तो वह मॉर्डन हॉकी होती और अगर ऐसा नहीं कर पाते तो वह ओल्ड-स्कूल हॉकी कहलाती है।"
हरेंद्र ने कहा कि उनका तथा उनकी टीम का पूरा ध्यान एशियाई खेलों पर है क्योंकि इसके माध्यम से उनकी टीम ओलम्पिक का टिकट कटा सकती है। हरेंद्र ने कहा, "हमारा ध्यान पूरी तरह से एशियाई खेलों पर केंद्रित है क्योंकि इसमें स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को ओलम्पिक में सीधा प्रवेश मिलेगा। साथ ही हम एशियाई खेलों में जीत दर्ज करते हुए साल के अंत में भारत में होने वाले विश्व कप के लिए लय हासिल करेंगे।"
एशियाई खेलों के लिए चुनी गई टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का बेहतरीन मिश्रण है और हरेंद्र ने माना कि सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक सरदार सिंह टीम का अहम हिस्सा होंगे। हरेंद्र ने कहा कि सरदार को पिछले कुछ समय से डिफेंसिव मिडफील्डर के रूप में इसलिए खिलाया जा रहा है क्योंकि हमारे पास मनप्रीत जैसे खिलाड़ी हैं जो बेहतरीन अटैकिंग मिडफील्डर हैं। हमने टीम के खेलने के तरीके को नहीं बदला बस खिलाड़ी की भूमिका को बदला, ताकि उनकी प्रतिभा का सही ढ़ंग से उपयोग किया जा सका।