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CWG 2026: पैरा एथलेटिक्स में भारत ने जीते दो मेडल, शॉटपुट में सोमन राणा ने जीता गोल्ड, जुयाल ने अपने नाम किया सिल्वर

सोमन का पहला प्रयास 13.38 मीटर का रहा, जो गोल्ड जीतने के लिए पर्याप्त था। वहीं शुभम का सर्वश्रेष्ठ स्कोर उनके छठे और आखिरी प्रयास में आया। सोमन का यह गोल्ड भारत का ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में आठवां गोल्ड मेडल है।
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Aug 01, 2026
CWG 2026
सोमन राणा का गोल्ड भारत का ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में आठवां गोल्ड मेडल है। (photo - IANS)

Commonwealth Games 2026: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पैरा एथलेटिक्स में दोहरी सफलता मिली है। पुरुषों के शॉट पुट F57 इवेंट में भारत के सोमन राणा ने गोल्ड और शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। सोमन ने 13.40 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि जुयाल 13.28 मीटर का थ्रो फेंककर दूसरे नंबर पर रहे।

भारत को मिला कॉमनवेल्थ गेम्स में आठवां गोल्ड मेडल

सोमन का पहला प्रयास 13.38 मीटर का रहा, जो गोल्ड जीतने के लिए पर्याप्त था। लेकिन उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 13.40 मीटर का थ्रो किया, जो उनका फाइनल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। वहीं शुभम का सर्वश्रेष्ठ स्कोर उनके छठे और आखिरी प्रयास में आया। सोमन राणा का यह गोल्ड भारत का ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में आठवां गोल्ड मेडल है।

दोनों खिलाड़ियों का जोरदार प्रदर्शन

सोमन राणा ने अपने दूसरे प्रयास में 13.40 मीटर का विनिंग थ्रो किया, जिसे प्रतियोगिता के बाकी समय में कोई भी प्रतिद्वंद्वी पार नहीं कर सका। वहीं, शुभम ने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 13.28 मीटर का थ्रो करते हुए सिल्वर मेडल की स्थिति हासिल की। ​​सेड्रिक इड्रिस लेकेजो अजमदजी ने 12.57 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कैमरून के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता।

सोमन ने 13.38 मीटर के शुरुआती थ्रो के साथ प्रतियोगिता में शानदार शुरुआत की। इसके बाद अपने दूसरे प्रयास में गोल्ड मेडल दिलाने वाले 13.40 मीटर के थ्रो तक सुधार किया। उनका तीसरा प्रयास फाउल रहा, जबकि शेष थ्रो क्रमश: 13.14 मीटर, 13.17 मीटर और 13.11 मीटर के थे। हालांकि, वे अपने दूसरे राउंड के प्रयास में सुधार नहीं कर सके, लेकिन पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए यह काफी था।

शुभम ने फाइनल के दौरान बेहतरीन निरंतरता दिखाई

दूसरी ओर, शुभम ने फाइनल के दौरान बेहतरीन निरंतरता दिखाई। उन्होंने 13.08 मीटर से शुरुआत की, उसके बाद 12.42 मीटर का थ्रो किया, और फिर तीसरे राउंड में सुधार करते हुए 13.27 मीटर तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 13.16 मीटर और 12.88 मीटर का थ्रो किया, और अंत में अपने आखिरी प्रयास में 13.28 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके सिल्वर मेडल पक्का किया।

सोमन राणा के लिए यह गोल्ड मेडल एक और बड़ी कामयाबी थी, जिन्होंने 2006 में जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना में सेवा के दौरान माइन ब्लास्ट में घायल होने के बाद यह मुकाम हासिल किया। रिहैबिलिटेशन और पैरा-एथलेटिक्स शुरू करने के बाद, दो बार पैरालंपिक में हिस्सा ले चुके सोमन भारत के बेहतरीन एफ57 शॉट पुटर्स में से एक बन गए हैं। सोमन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतने से पहले एशियन पैरा गेम्स, वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप और नेशनल प्रतियोगिताओं में भी मेडल जीते हैं।

शुभम के लिए सिल्वर मेडल एक शानदार सफर का सुखद अंत था। रुड़की में जन्मे इस एथलीट ने आर्मी ऑफिसर बनने का सपना देखा था, लेकिन साल 2022 में मोटरसाइकिल दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद यह सपना अधूरा रह गया। रिहैबिलिटेशन के दौरान पैरा-स्पोर्ट्स को चुनते हुए, वह सेना के पैरालंपिक स्पोर्ट्स नोड से जुड़े और एफ57 कैटेगरी में तेजी से आगे बढ़े। कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर बड़ी सफलता हासिल करने से पहले उन्होंने नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, खेलो इंडिया पैरा गेम्स और इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स में मेडल जीते।

Updated on:
01 Aug 2026 05:53 pm
Published on:
01 Aug 2026 05:40 pm