
Nishad Kumar Struggle Story: भारत के पैरा एथलीट निषाद कुमार ने जापान में जारी पैरा एशियन गेम्स 2026 में सोमवार को मेंस टी47 लॉन्ग जंप इवेंट का गोल्ड मेडल जीत लिया। दो बार के पैरालंपिक सिल्वर मेडलिस्ट निषाद ने सोमवार को 7.11 मीटर की बेस्ट जंप के साथ अपने शानदार पैरा-एथलेटिक्स करियर में एक स्वर्ण पदक जोड़ लिया। बचपन में निषाद के साथ एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें उन्होंने अपना दाहिना हाथ गंवा दिया। उस हादसे ने निषाद को कमजोर कर दिया लेकिन स्कूल में टीचर की सलाह ने निषाद की जिंदगी बदल दी।
निषाद कुमार ने लॉन्ग जंप में झंडा गाड़ने से पहले हाई जंप में गोल्ड की झड़ी लगी चुके हैं। पिछले एशियाई पैरा खेलों में निषाद ने हाई जंप का गोल्ड जीता था। यह निषाद का लगातार दूसरे पैरा एशियाड में गोल्ड मेडल है। इस गोल्ड से वह दुनिया के ऐसे हजारों युवाओं को प्रेरित करने का काम करेंगे, जो हाथ न होने की वजह से हार मान लेते हैं। निषाद के संघर्ष की कहानी काफी दर्दनाक है।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में निषाद का जन्म हुआ और बचपन से ही वह खेल-कूद के शौकीन थे, लेकिन 8 साल की उम्र में चारा काटने वाली मशीन की चपेट में आने से उनका दाहिना हाथ कट गया। इस हादसे ने उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन निषाद ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दी। निषाद के पिता रशपाल सिंह एक साधारण किसान हैं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को कभी भी 'दिव्यांग' महसूस नहीं होने दिया और जब निषाद ने खेल में अपना करियर बनाने की ठानी तब भी उनके माता-पिता ने साथ दिया।
निषाद स्कूल के स्पोर्ट्स इवेंट्स में हाई जंप में भाग लिया करते थे। उनकी प्रतिभा को उनके टीचर ने पहचाना और उन्हें आधिकारिक रूप से पैरा-एथलेटिक्स में किस्मत आजमाने की सलाह दी। साल 2017 में निषाद स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया पहुंचे और कोच विक्रम चौधरी के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग शुरू कर दी। यहां आकर उन्होंने कई नेशनल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धा का रास्ता खुल गया।
निषाद कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में टी47 हाई तंप में 2.06 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता था। चार साल बाद पेरिस पैरालंपिक में भी उन्होंने इस कारनामे को दोहराया। इसके अलावा दो एशियन गेम्स में वह गोल्ड जीत चुके हैं।