
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कुर्सी जब से छिनी है, तभी से उनकी मुश्किलें भी शुरू हो गई। प्रधानमंत्री की कुर्सी छिनने के बाद से ही इमरान ने देश के नए प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ और सेना के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी। इससे सेना भी पूरी तरह उनके खिलाफ हो गई। पाकिस्तान में सेना से खिलाफत करना किसी के लिए सही नहीं रहा। कुछ दिन पहले जिस तरफ इमरान को गिरफ्तार करके ले जाया गया था, वो मंज़र दुनियाभर में लोगों ने देखा। हालांकि इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया जहाँ उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए उन्हें रिहा कर दिया गया। तोशखाना मामले में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए और अल कादिर ट्रस्ट मामले में 2 हफ्ते की अग्रिम जमानत देते हुए उन्हें राहत दी। पर सेना की तरफ से इमरान को अभी तक राहत नहीं मिली है।
सेना कस सकती है शिकंजा
इमरान खान को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से तो राहत मिल गई है, पर देश की सेना जल्द ही उन पर शिकंजा कस सकती है। इमरान की गिरफ्तारी के विरोध में उनके समर्थकों ने सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। रिपोर्ट के अनुसार इमरान के समर्थकों ने करीब 25 करोड़ की संपत्ति नष्ट कर दी। साथ ही कई पुलिस स्टेशनों पर फायरिंग भी की।
इमरान समर्थकों की इन हरकतों से सेना के प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने चेतावनी दी थी कि इन हमलों को अंजाम देने वालों पर सेना की तरफ से ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि उनकी नस्लें याद रखेंगी। साथ ही मुनीर ने यह भी कहा कि सेना की तरफ से इन हमलों के योजनाकारों, उकसाने वालों, भड़काने वालों और इस बर्बरता को अंजाम देने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
ऐसे में यह संभव है कि जल्द ही सेना की तरफ से इमरान और उनके समर्थकों पर कार्रवाई की जा सकती है।
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मिलिट्री कोर्ट में जा सकता है इमरान का मामला
पाकिस्तान में सेना को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट से इमरान को राहत मिलने के बाद सेना इमरान के खिलाफ मिलिट्री कोर्ट में कार्रवाई कर सकती है। इस कार्रवाई में इमरान पर सेना के मिलिट्री एक्ट की धारा 59 और 60 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है और दोषी पाए जाने पर उन्हें उम्रकैद या मौत की सज़ा तक हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट पर इमरान को बचाने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में इमरान के मामले के जल्द ही मिलिट्री कोर्ट में जाने की संभावना है।
इमरान का हो सकता है जुल्फिकार अली भुट्टो जैसा हाल
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर मोहम्मद अहमद खान कसूरी की हत्या का आरोप लगाया गया था। ऐसे में तत्कालीन सेना प्रमुख जिया उल-हक ने जुल्फिकार की सेना का तख्तापलट करते हुए देश में मार्शल लॉ लागू करते हुए जुल्फिकार को जेल में डाल दिया था। इसके बाद लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई और सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें राहत नहीं दी। इसके बाद जुल्फिकार को 4 अप्रैल, 1979 के दिन फांसी की दी गई थी।
कुछ लोगों का मानना है कि जैसा हाल जुल्फिकार का हुआ था, वैसा ही हाल इमरान का भी हो सकता है। हालांकि इमरान के साथ क्या होगा, वक्त ही बताएगा।