
राजीव दवे
पाली। खाने को दाने नहीं, अम्मा चली भुनाने कहावत शहर में चल रहे 24 घंटे जलापूर्ति प्रोजेक्ट पर सटीक बैठती है। हमारे जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने पानी की व्यवस्था किए बिना ही जवाई बांध में उपलब्ध जल के आधार पर इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए सडक़ों को खुदवाना शुरू कर दिया। जबकि हालात यह है कि जवाई बांध के छलकने के बावजूद 24 घंटे के अंतराल से जलापूर्ति नहीं की जा सकी। अब 48 घंटे के बजाय 72 घंटे से जलापूर्ति करने की नौबत आ गई है।
इधर, जवाई बांध पुनर्भरण के लिए अभी डीपीआर की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है और बांध बनने में कई साल लगेंगे।
जवाई पर लगातार बढ़ रही निर्भरता पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े जवाई बांध पर पाली जिले की निर्भरता लगातार बढ़ रही है। जवाई बांध से 48 घंटे में जलापूर्ति करने पर जलदाय विभाग को 7.75 एमसीएफटी पानी रोजाना चाहिए। आज हालात यह है कि 6.1 एमसीएफटी पानी ही रोजाना देना शुरू किया गया है। ऐसा करने के बाद भी भीषण गर्मी के माह मई व जून में इतना पानी दिया जा सकेगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है। ऐसे में 24 घंटे जलापूर्ति कैसे की जाएगी। इसका अंदाज आसानी से लगाया जा सकता है।
जवाई पुनर्भरण प्रोजेक्ट एक नजर में
प्रथम चरण
-सेई व साबरमति बांध बनेंगे। यहां से तीन टनल व पाइप लाइन के माध्यम से पानी को नाना के पास जवाई नदी में छोड़ा जाएगा।
-2944 करोड़ का है यह प्रोजेक्ट
-2700 एमसीएफटी पानी डायवर्ट होगा जवाई बांध में प्राजेक्ट पूरा होने पर
द्वितीय चरण
-वांकल व पामेरी बांध बनेंगे। वांकल बांध सबसे ऊंचा होगा। वहां से पानी पामेरी बांध में, पामेरी से साबरमति में और
साबरमति से सेई में आएगा।
-3116 करोड़ का है यह प्रोजेक्ट
-दिसम्बर में आएगी इस प्रोजेक्ट की डीपीआर
जवाई बांध का गणित
10 शहर जवाई बांध पर निर्भर (शिवगंज सहित)
563 गांवों में जवाई से होती जलापूर्ति
ऐसा होगा पूरा प्रोजेक्ट
-30000 : एमसीएफटी पानी एकत्रित होगा बांधों में
-6400 : एमसीएफटी पानी जवाई में किया जाएगा डायवर्ट
-06 : वर्ष लगेंगे कम से कम पूरा होने में
-24 : घंटे जलापूर्ति की स्थिति
-680 : किमी की पाइप लाइन बिछेगी
-375 : किमी की पाइप लाइन बिछाई
-93 : करोड़ का है प्रोजेक्ट अक्टूबर 2018 में होना था पूरा
-2 : नवम्बर 2015 को हुआ था शुरू
अभी प्रारम्भिक स्तर पर
जवाई पुनर्भरण का कार्य प्रारम्भिक स्तर पर है। डीपीआर की हार्ड कॉपी व अन्य जानकारी ही 12 अक्टूबर को क पनी की ओर से दी जाएगी। इसकी जांच के बाद भूमि अधिग्रहण के साथ अन्य कार्य पूरा करने में ही समय लगेगा। फिर कार्यादेश जारी हो सकेंगे। -अनिल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, पाली
अभी प्रारम्भिक स्तर पर
जवाई पुनर्भरण का कार्य प्रारम्भिक स्तर पर है। डीपीआर की हार्ड कॉपी व अन्य जानकारी ही 12 अक्टूबर को क पनी की ओर से दी जाएगी। इसकी जांच के बाद भूमि अधिग्रहण के साथ अन्य कार्य पूरा करने में ही समय लगेगा। फिर कार्यादेश जारी हो सकेंगे। -अनिल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, पाली
वर्तमान जलापूर्ति से संभव
जलदाय विभाग की ओर से की जा रही 48 घंटे की जलापूर्ति के लिए शहर में दिए जा रहे पानी से ही 24 घंटे जलापूर्ति की जा सकती थी। 24 घंटे जलापूर्ति में छीजत कम होगी। जवाई में पानी कम होने पर अधिक अंतराल से पानी देने को लेकर भी हमने अपने सिस्टम में व्यवस्था की है। -के.के. अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, आरयूआइडीपी