
पाली। शहर के मंडिया रोड क्षेत्र में संचालित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उपचार के लिए आने वाले रोगियों पर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। मार्च 2018 के अंतिम सप्ताह में शुरू हुए इस स्वास्थ्य केन्द्र के आसपास तथा सामने गंदगी व कचरेे के ढेर लगे हैं। कचरे व गंदगी के ढेर में यदा-कदा आग भी लगती रही है, जिससे उठने वाले धुएं से रोगियों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं के साथ ही कार्यरत चिकित्साकर्मियों का सांस लेना भी दुश्वार हो जाता है। हालांकि, क्षेत्रवासियों व चिकित्साकर्मियों ने इस सम्बन्ध में कई बार विभागीय अधिकारियों, नगरपरिषद प्रशासन एवं जिला कलक्टर को अवगत करवाया। लेकिन, अभी तक किसी ने सुध लेना मुनासिब नहीं समझा है।
पिछले साल ही हुआ था उद्घाटन
केन्द्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वीकृत इस शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उद्घाटन केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री ने 19 नव बर 2017 को उद्घाटन किया था। समारोह में विधायक ज्ञानचंद पारख व नगर परिषद सभापति महेन्द्र बोहरा भी अतिथि थे।
डम्पिंग यार्ड बन रहा मुसीबत
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मंडिया रोड के सामने नगर परिषद का डम्पिंग यार्ड है, जहां प्रतिदिन शहर के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित कचरा एवं गंदगी लाकर डाली जाती है। इस गंदगी से उठने वाली बदबू और कचरे के ढेर में लगने वाली आठ से उठता दमघोंटू धुआं आमजन के साथ ही रोगियों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है।
प्रतिदिन आते हैं 40-50 रोगी
यहां प्रतिदिन औसत 40-50 रोगी जांच व उपचार के लिए आते हैं। इनमें सर्दी, जुकाम, बुखार के रोगियों के साथ ही गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। खास बात ये है कि प्रतिमाह नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इस गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं की विभिन्न जांचें की जाती है। लेकिन लेब टेक्नीशियन का पद रिक्त होने एवं गायनोकोलॉजिस्ट के नहीं आने से जांचें नहीं हो पाती है।
स्वास्थ्य केन्द्र में ये पद हैं रिक्त
केन्द्र में मेडिकल ऑफिसर का एक पूर्णकालिक एवं एक पार्टटाइम सहित दो पद सृजित हैं, लेकिन दोनों ही पद रिक्त हैं। वर्तमान में टैगोर नगर डिस्पेंसरी के चिकित्सा अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार सौंप रखा है, जो सप्ताह में सोमवार व गुरुवार को यहां आते हैं। एक मेल नर्स का पद सृजित है, जो कार्यरत हैं और चिकित्सक के अभाव में ये ही रोगियों की जांच कर दवाएं देते हैं। लेब टेक्नीशियन का एक पद सृजित है, जो रिक्त है। हिमोग्लोबीन की जांच नहीं होने का सर्वाधिक खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुततना पड़ रहा है।