पाली

Unique Wedding: पाली में हुई अनोखी शादी, बछड़ा बना दूल्हा, बछड़ी बनी दुल्हन, बड़-पीपल ने लिए सात फेरे

Unique Wedding In Pali: पाली जिले के बाड़सा गांव में बछड़े-बछड़ी और बड़-पीपल के पौधों का वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह कराया गया। अनोखे आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और पारंपरिक उत्सव मनाया गया।
2 min read
Jul 04, 2026
Unique wedding in Pali
विवाह समारोह का दृश्य। फोटो- पत्रिका

पाली। शहनाइयों की मधुर गूंज, ढोल-थाली और बैंड-बाजों की धुन, नाचते-गाते ग्रामीण, ऊंट पर सवार दूल्हा और चुनरी ओढ़े दुल्हन… यह दृश्य किसी सामान्य विवाह का नहीं, बल्कि बाड़सा गांव में जगमोहन महिला मंडल के तत्वाधान में आयोजित उस अनूठे विवाह महोत्सव का था, जहां एक ओर बछड़े का विवाह बछड़ी से कराया गया तो दूसरी ओर बड़ और पीपल के पौधों का वैदिक रीति-रिवाजों के साथ परिणय संपन्न कराया गया। इस अनोखे आयोजन ने हर किसी का मन मोह लिया और पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

यह वीडियो भी देखें

परंपरा और आस्था का अनूठा संगम

जगमोहन महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन ने वर्षों पुरानी लोक परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया। ग्रामीणों ने इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गौसंवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला आयोजन बताया। विवाह समारोह में गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने भाग लेकर इस अनूठी परंपरा का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।

बंदोली में झूम उठा पूरा गांव

विवाह से पूर्व शुक्रवार रात्रि को जगमोहन मंदिर से भव्य बंदोली निकाली गई। बंदोली पाली के बाड़सा गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए श्रीराम वाटिका पहुंची। पूरे रास्ते ढोल, थाली और बैंड-बाजों की धुन पर ग्रामीण थिरकते रहे। महिलाओं ने मंगल गीत गाए तो युवाओं ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। देर रात तक भजन, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बनाए रखा।

ऊंट पर सवार होकर पहुंचा दूल्हा

शनिवार को शुभ मुहूर्त में विवाह की रस्में शुरू हुईं। बड़ के पौधे की बारात पूरे पारंपरिक अंदाज में निकाली गई, जबकि दूल्हे बने बछड़े को आकर्षक श्रृंगार कर ऊंट पर सवार करके विवाह स्थल तक लाया गया। तो वही बड़ का पौधा रथ में सवार होकर आया। बारात का ग्रामीणों ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ स्वागत किया।

दुल्हनों का हुआ पारंपरिक श्रृंगार

दुल्हन बनी बछड़ी को कानों में कुड़की और पैरों में पायजेब पहनाकर सुंदर ढंग से सजाया गया। वहीं पीपल के पौधे को चुनरी ओढ़ाकर दुल्हन का स्वरूप दिया गया। पारंपरिक सजावट और लोकरीति के अनुरूप किए गए इस श्रृंगार ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। हनुमान मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बड़-पीपल तथा बछड़ा-बछड़ी का विधिवत विवाह संपन्न कराया गया। पंडितों ने सभी धार्मिक रस्में पूरी करवाईं और सात फेरों के साथ विवाह की परंपरा निभाई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से कन्यादान किया, जिसमें 38 हजार रुपए की राशि एकत्रित हुई।

विवाह के बाद छाया उत्सव का रंग

विवाह संपन्न होते ही पूरा परिसर खुशियों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। आयोजन के अंत में महाप्रसादी का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। जगमोहन महिला मंडल धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक सेवा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मंडल ने इस वर्ष करीब 1 लाख 51 हजार रुपए की लागत से गौवंश के लिए चारे की व्यवस्था करवाई। इसके अलावा भीषण गर्मी में पशु-पक्षियों के लिए विभिन्न स्थानों पर पानी (अवाला) की व्यवस्था भी करवाई गई। महिला मंडल वर्षों से गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहकर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

संस्कृति, पर्यावरण और गौसेवा का संदेश

बाड़सा का यह अनूठा विवाह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और गौसेवा के प्रति समाज को जागरूक करने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि हमारी परंपराएं केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का भी आधार है।

Updated on:
04 Jul 2026 08:47 pm
Published on:
04 Jul 2026 08:46 pm