
पाली। बांगड़ अस्पताल और एएनएम प्रशिक्षण केंद्र में कार्यरत 35 संविदा नर्सिंगकर्मियों को बड़ी राहत मिली है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी कार्यमुक्ति आदेश को विरोध प्रदर्शन और जनदबाव के बाद वापस ले लिया गया है। आदेश निरस्त होने के बाद नर्सिंगकर्मियों ने राहत की सांस ली और अपना धरना समाप्त कर दिया। मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. दिलीप सिंह चौहान ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए 35 संविदा नर्सिंगकर्मियों को कार्यमुक्त करने के आदेश जारी किए थे।
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इसके बाद नए नर्सिंगकर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। आदेश जारी होने के बाद प्रभावित कर्मियों में नाराजगी फैल गई और सभी ने एकजुट होकर बांगड़ अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान नर्सिंगकर्मियों ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. कैलाश परिहार और बाद में अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याएं रखीं। कर्मियों का कहना था कि अचानक नौकरी समाप्त होने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले चार महीनों से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है।
नर्सिंगकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर पहुंचकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और मंत्री जोराराम कुमावत से मुलाकात की तथा अपनी मांगों से अवगत कराया। इसके बाद बढ़ते जनदबाव और उच्चस्तरीय हस्तक्षेप को देखते हुए प्रिंसिपल डॉ. दिलीप सिंह चौहान ने कार्यमुक्ति का आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। आदेश वापस लेने की सूचना मिलते ही धरनारत नर्सिंगकर्मियों ने खुशी जताई और आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
वहीं, पाली के बांगड़ जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने नई पहल की है। मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित, स्वच्छ और नशामुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार से अस्पताल के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर होमगार्ड जवानों की तैनाती शुरू कर दी गई है।
अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को तीन शिफ्टों में विभाजित करते हुए कुल 12 होमगार्ड जवानों को तैनात किया है। अस्पताल में पहले से कार्यरत जीएस एंड कंपनी के 40 सुरक्षा गार्डों के साथ मिलकर ये जवान सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। उनकी प्रमुख जिम्मेदारी अस्पताल में प्रवेश करने वाले लोगों की जांच करना और व्यवस्था बनाए रखना है।
तैनाती के पहले ही दिन होमगार्ड जवानों ने कार्रवाई शुरू कर दी। जांच के दौरान अस्पताल परिसर में गुटखा, बीड़ी और सिगरेट ले जाने पर रोक सुनिश्चित की गई। जिन लोगों के पास तंबाकू उत्पाद मिले, उन्हें बाहर ही इन्हें नष्ट करने के लिए कहा गया। इसके बाद ही उन्हें अस्पताल में प्रवेश की अनुमति दी गई। इसके अलावा बिना पास के वार्डों में घूमने वाले लोगों और अनावश्यक भीड़ को भी नियंत्रित किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इस कदम से परिसर में स्वच्छता, सुरक्षा और अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा।