
Pali Farmer Kills Wife and Two Children: रोहट (पाली): मानसिक बीमारी के इलाज के बजाय अंधविश्वास और तांत्रिक के चक्कर में पड़ने का एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। रोहट थाना क्षेत्र के बीठू गांव के एक कृषक ने तांत्रिक 'भोपे' के बहकावे में आकर अपनी ही पत्नी, 13 वर्षीय बेटी और 11 वर्षीय बेटे की गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद खुद भी फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। इस आत्मघाती कदम से हंसता-खेलता पूरा परिवार एक ही झटके में पूरी तरह खत्म हो गया।
यह रूह कंपा देने वाली वारदात फलोदी जिले के देचू पुलिस थाना क्षेत्र में घटित हुई। देचू उपखंड कार्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर सरहद फतेहगढ़ स्थित एक कृषि फार्म पर मंगलवार सुबह जब एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव मिले, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही देचू थानाधिकारी विक्रमसिंह चारण पुलिस जाब्ते के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।
मिली जानकारी के अनुसार, देचू निवासी खीवराज पुत्र रामचंद्र महाजन का कृषि फार्म फतेहगढ़ सरहद में स्थित है। इस फार्म पर पिछले छह साल से रोहट थाना क्षेत्र के बीठू गांव का निवासी गेनाराम (पुत्र जोधाराम पटेल) सपरिवार रहकर खेती-बाड़ी का काम करता था। खेत पर उसके साथ उसकी पत्नी पुष्पा, एक बेटा और एक बेटी रहते थे।
बताया जा रहा है कि गेनाराम की पत्नी पुष्पा पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ चल रही थी। पत्नी की दिमागी हालत ठीक न होने के कारण गेनाराम भी मानसिक रूप से काफी परेशान और तनाव में रहने लगा था।
अज्ञानता और अंधविश्वास के चलते गेनाराम ने अपनी पत्नी का किसी योग्य डॉक्टर से इलाज करवाने के बजाय इसे 'भूत-प्रेत का साया' मान लिया। वारदात से महज एक दिन पहले वह अपनी पत्नी को झाड़-फूंक करवाने के लिए बीठू मोरिया स्थित एक तांत्रिक के पास लेकर गया था। वहां से सोमवार रात करीब 10 बजे ही पूरा परिवार फतेहगढ़ (देचू) स्थित अपने कृषि फार्म पर वापस लौटा था। गौरतलब है कि गेनाराम का बड़ा भाई चैनाराम, शिवाराम और उसका साला भी आसपास के अन्य कृषि फार्मों पर ही खेती का काम करते हैं।
आशंका जताई जा रही है कि सोमवार देर रात गेनाराम ने अपनी पत्नी और बच्चों के भोजन में नींद की गोलियां मिलाकर उन्हें बेहोश कर दिया होगा। इसके बाद जब सब गहरी नींद में चले गए, तब उसने अपनी 13 वर्षीय पुत्री खुशबू और 11 वर्षीय पुत्र किसन की गला दबाकर हत्या कर दी।
इसके बाद उसने अपनी पत्नी पुष्पा की भी गला घोंटकर जान ले ली। घटनास्थल के हालात देखकर लग रहा है कि पत्नी की हत्या के वक्त दोनों के बीच खींचतान या बचाव का संघर्ष जरूर हुआ होगा, क्योंकि खाट के पास ही मिट्टी की एक मटकी फूटी हुई मिली। तीनों की हत्या सुनिश्चित करने के बाद, गेनाराम ने खुद भी कमरे के बरामदे में लगे पंखे के हुक से फंदा लगाया और अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
मंगलवार सुबह करीब आठ बजे तक जब खेत का नलकूप शुरू नहीं हुआ, तो पड़ोस के खेत में काम करने वाला मृतका का भाई (चुनाराम पटेल) वहां देखने पहुंचा। कमरे के भीतर का खौफनाक मंजर देखकर उसके होश उड़ गए। उसने तुरंत इसकी सूचना कृषि फार्म के मालिक खीवराज हरकुट को दी। मालिक ने तत्काल देचू थाने पहुंचकर थानाधिकारी विक्रम सिंह चारण को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर रवाना हुई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए फलोदी जिला पुलिस अधीक्षक सतनाम सिंह और वृत्ताधिकारी भवानी सिंह भी तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे। साक्ष्य जुटाने के लिए जोधपुर से फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम दोपहर 12:30 बजे बुलाई गई। FSL टीम ने मौके से फिंगरप्रिंट और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। इसके बाद पुलिस ने चारों शवों को देचू के उप-जिला अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया।
अस्पताल में तीन सदस्यीय चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड द्वारा शाम साढ़े चार बजे शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंपकर बीठू मोरिया के लिए रवाना कर दिए गए। मामले को लेकर मृतका के भाई चुनाराम (पुत्र भीखाराम) की ओर से देचू थाने में मर्ग रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
चिकित्सकों ने चारों शवों से विसरा के सैंपल सुरक्षित किए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जाएगा। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था। भोजन में जहर मिलाया गया था, नींद की गोलियां दी गई थीं या सिर्फ गला दबाने से ही मौत हुई।
एक ही परिवार के चार लोगों की इस तरह सामूहिक मौत की खबर जैसे ही पाली जिले के बीठू गांव पहुंची, वहां मातम छा गया। पूरे गांव में चूल्हे तक नहीं जले और हर आंख नम नजर आई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गेनाराम अंधविश्वास के चक्कर में न पड़कर अपनी पत्नी का सही अस्पताल में मानसिक इलाज करवाता, तो आज पूरा परिवार जिंदा होता। क्षेत्र में दिनभर इस दर्दनाक और आत्मघाती कदम की ही चर्चा बनी रही।