
Indian Rail Network: पाली: विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक, भारतीय रेलवे ने पर्यावरण-अनुकूल और हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय रेलवे अब ब्रॉडगेज नेटवर्क के विद्युतीकरण के मामले में स्विट्जरलैंड के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। देश में रेलवे के ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग 99.6 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हो चुका है और शेष बचे नेटवर्क का काम भी मिशन मोड पर जारी है।
साल 2014 से पहले जहां देश में केवल 21,801 किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण हुआ था। वहीं, साल 2014 से 2026 के बीच 48,072 किलोमीटर नई रेल लाइनों को इलेक्ट्रिक कर दिया गया है। इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवेज (UIG) की जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के प्रमुख देशों में रेलवे सिस्टम के विद्युतीकरण की स्थिति इस प्रकार है।
नेटवर्क के तेजी से विद्युतीकरण होने के कारण रेलवे में डीजल की खपत में भारी कमी दर्ज की गई है। साल 2015-16 में डीजल की खपत 293 करोड़ लीटर थी। जो साल 2024-25 में खपत घटकर लगभग 108 करोड़ लीटर रह गई (और अब यह इससे भी कम हो चुकी है)। इस प्रकार देश में डीजल खपत में कुल 185 करोड़ लीटर की कमी आई है।
यदि क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो उत्तर-पश्चिम रेलवे (NWR) ने भी एक साल में 7.5 करोड़ लीटर डीजल की बचत की है। यहां 2023-24 में डीजल की खपत 32 करोड़ लीटर थी, जो 2024-25 में घटकर 24 करोड़ लीटर रह गई।
सड़क परिवहन की तुलना में रेल परिवहन पर्यावरण के लिए काफी सुरक्षित साबित हो रहा है। नीति आयोग की जून 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 टन सामान को 1 किलोमीटर तक सड़क मार्ग से ले जाने पर 101 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। जबकि इतने ही सामान और दूरी के लिए रेल मार्ग से ले जाने पर महज 11.5 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन होता है।
भारतीय रेलवे का 99.6 प्रतिशत ब्रॉडगेज नेटवर्क विद्युतीकृत होना देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे परिचालन अधिक ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और किफायती बना है। उत्तर-पश्चिम रेलवे ने भी डीजल की खपत में कमी लाकर स्वच्छ एवं हरित परिवहन की दिशा में योगदान दिया है।
-अनुराग त्रिपाठी, मंडल रेल प्रबंधक (DRM), उत्तर-पश्चिम रेलवे, जोधपुर मंडल